scriptRajasthan Govt should take lessons from Berar Gram Panchayat | प्रसंगवश : बरार ग्राम पंचायत के उदाहरण से सबक ले सरकार | Patrika News

प्रसंगवश : बरार ग्राम पंचायत के उदाहरण से सबक ले सरकार

छह साल लम्बी चली लड़ाई के बाद बरार की जनता ने आखिर अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्राम पंचायत में शराब की बिक्री रुकवा दी। खास बात यह है कि जिले के मगरा इलाके में ऐसा करने वाली यह चौथी ग्राम पंचायत है। सरकार को चाहिए कि शराब से हो रही कमाई के फेर में वह जनता के हितों की ओर से आंखें नहीं मूंद ले

नई दिल्ली

Published: November 18, 2021 09:58:49 am

नई दिल्ली। पिछले दिनों राज्य में सरकार की मंशा पर आवाम की दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत हुआ। यह जीत थी शराब की दुकान को बंद करने की लड़ाई में, और इसे हासिल किया राजसमंद जिले की भीम उपखंड की बरार-हामेला के वैर की जनता ने। दरअसल, अपना खजाना भरने के लिए सरकार शराब की बिक्री को प्रोत्साहित करने में जुटी रहती है और इसके लिए गांव-गांव शराब की दुकानें खोलने से बाज नहीं आती।
Barar gram panchayat
जनता शराब का विरोध करती रहे, अदालतों में गुहार लगाती रहे, पर सरकार शराब से हो रही कमाई के फेर में जनता के हितों की ओर से आंखें मूंद लेती है। लेकिन जनता यदि ठान ले तो सरकार को भी मुंह की खानी पड़ती है।
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छह साल लम्बी चली लड़ाई के बाद बरार की जनता ने आखिर अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्राम पंचायत में शराब की बिक्री रुकवा दी। खास बात यह है कि जिले के मगरा इलाके में ऐसा करने वाली यह चौथी ग्राम पंचायत है।
करीब साढ़े पांच हजार मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत के साढ़े तीन हजार से ज्यादा मतदाताओं ने एकजुट हो कर शराबबंदी पर मुहर लगाई। महिलाओं ने इस जनआंदोलन की कमान संभाली। जिन परिवारों को शराब ने तबाह किया है, उनका दर्द वे परिवार ही जान सकते हैं।
प्रदेश में आज भी कई ऐसी जगहों पर दुकानें चल रही हैं, जहां लोगों का विरोध जारी है। सरकार शराब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए नीति के अनुसार दुकानों के आवंटन के साथ इन दुकानों को पूजा स्थल, स्कूल परिसर इत्यादि से दूर खोलने का दावा करती है।
राजमार्ग पर भी शराब की दुकान नहीं होने का प्रावधान है, लेकिन इन प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने वाले इस ओर ध्यान ही नहीं देते। राजमार्गों पर जगह-जगह शराब की दुकानों के बोर्ड दिखाई देना आम है। एक लाइसेंस से एक से अधिक दुकानों के संचालन की शिकायतें भी बहुतायत में होती हैं, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रांच का नाम दे दिया जाता है।
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यह मानना मुश्किल है कि जिम्मेदारों की जानकारी के बिना इस तरह की ब्रांच का संचालन संभव है। नीति -नियम बनाने के बाद उनका सख्ती से पालन करना जरूरी है। कहीं ऐसा न हो कि राजसमंद जिले में मतदान के जरिए शराब की बिक्री रोक कर जैसे वहां की जनता ने जागरूकता का परिचय दिया है, उसी का अनुसरण करते हुए पूरे प्रदेश की जनता कदम आगे बढ़ाने को मजबूर हो जाए। (अ.सिं.)

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