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विवाद छोड़ सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं

बिना किसी विवाद, आरोप-प्रत्यारोप के मंत्री अपनी सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका निभाएं और जनता की भलाई में जुट जाए।

उदयपुर

Updated: November 19, 2021 06:20:56 pm

संदीप पुरोहित
राजस्थान में सरकार के कार्यकाल में अब दो वर्ष बचे हैं। यह सरकार शुरुआत से लेकर अब तक लडखड़़ाती ही रही है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री के पद को लेकर, उसके बाद मंत्रीमंडल का गठन और फिर मानेसर की घटना सभी जानते हैं। इसके अलावा हर रोज सरकार के आला नेता आपस में उलझते रहते हैं। असंतुष्ट उलझे तो समझ में आता है पर सरकार के मंत्री ही आपस में लड़े, यह बात समझ से परे है। ऐसे में क्या जनहित के निर्णय होंगे? क्या उनकी अनुपालना होगी? पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल व शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा आपस में उलझ गए थे और हाल ही में मंत्रीमंडल की बैठक में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी की डोटासरा, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, लालचंद कटारिया ने खिंचाई कर दी। उनकी शिकायत थी कि उनके कामों का निपटारा नहीं हो रहा। जब सरकार के आला मंत्रियों के कामों का निपटारा नहीं हो रहा है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी?
सरकार के पहले साल को छोड़ दे तो बाकी समय कोरोना के मैनेजमेंट में ही गुजरा है। जो बचा हुआ थोड़ा समय है, उसमें मनमुटाव त्याग कर फटाफट निर्णय करने चाहिए। पार्टी के घोषणा पत्र पर अमल करना चाहिए पर इस ओर नेताओं का ध्यान कम है और वे आपसी हितों में ही उलझे हुए हैं। यह भी सब जानते हैं कि मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सबकी सामूहिक जिम्मेदारी होती है और जो भी निर्णय होते हैं, वे सामूहिक होते हैं पर इस सरकार में ऐसा नहीं दिख रहा है। सबकी अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग है। इसे छोडकऱ अब राजस्थान के समुचित विकास की ओर ध्यान दें। कोरोना के बाद जनजीवन पटरी पर लौट रहा है और उसे किस तरह से पूरा सामान्य किया जाए इस पर ध्यान देना होगा। बेरोजगारों को रोजगार देने, सभी जिलों के समुचित विकास, योजनाओं का फायदा अंतिम पायदान तक पहुंचाने से लेकर आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर ठीक करने जैसे काम करने होंगे। अब यह लड़ाई का समय नहीं है। कांग्रेस संगठन में फाड़ और मंत्रियों के विवाद सबके सामने है। आगे भी इनमें ही समय निकाल दिया जाएगा तो फिर जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर जाएंगे तब क्या बताएंगे। अब जनता की भलाई और उनकी सेवा सच्चे सेवक बनकर करें। सरकार को विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र और बजट घोषणाओं के हिसाब-किताब को सामने रखकर उसकी समीक्षा करने के साथ ही उसमें जहां काम करना है, उसे अमलीजामा पहनाया जाए। सरकार के मंत्री अपने विभागों की समीक्षा करे और उनकी योजनाओं की ऑडिट करे कि उसका जमीनी स्तर पर लोगों को फायदा मिल रहा है या नहीं। शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर रिश्वत लेने की बात आई तो सरकार के सभी मंत्री अपने विभागों में नीचे के स्तर के हालात को देखे और ठीक करे। चुनाव से एक साल पहले तो अगले चुनाव की तैयारियों में पार्टियां जुट जाएगी। अब बचे हुए समय का अच्छे से अच्छा उपयोग किया जाए। बिना किसी विवाद, आरोप-प्रत्यारोप के मंत्री अपनी सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका निभाएं और जनता की भलाई में जुट जाए।
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