चेत भाई चेत

चेत भाई चेत
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Mukesh Kumar Sharma | Updated: 06 Jan 2016, 11:20:00 PM (IST) विचार

अगर कौन बनेगा करोड़पति टाइप प्रश्न किया जाए कि देश में इस समय सबसे लोकप्रिय नेता कौन हैं-

अगर कौन बनेगा करोड़पति टाइप प्रश्न किया जाए कि देश में इस समय सबसे लोकप्रिय नेता कौन हैं- (अ) राहुल गांधी, (ब) अरविन्द केजरीवाल, (स) नरेन्द्र मोदी और (द) मुलायम सिंह तो निस्संदेह इसका सही उत्तर होगा (स) यानी प्रधानमंत्री। लेकिन अब धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर उनकी खिंचाई शुरू हो गई है। यह बात हम नहीं , जमाना कह रहा है। हम फेसबुक, ट्विटर, वाट्सऐप पर ऐक्टिव तो नहीं पर उन्हें देखते जरूर हैं।  सोशल मीडिया पर अब भाई को लेकर चुटकुलेबाजी शुरू हो गई है। ऐसी चुटकुलेबाजी पहले मौनमोहन को लेकर खूब चली थी।


 लेकिन उसे शुरू होने में सात-आठ बरस लगे थे लेकिन यहां तो अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं। चाहे भक्तगण जोर-जोर से घंटे घडि़याल बजाते हुए चालीसा गाते रहें लेकिन हकीकत है कि लोगोंं ने तंज करना शुरू कर दिया है। इसका कारण भी है। अब देश यह कैसे सहन करेगा कि  पठानकोट में खूनी खेल चल रहा है और प्रधानमंत्री मोदी योग की महत्ता पर 'सुभाषितÓ लिख रहे हैं।


 ऐसे में चाहे विपक्षी ही सही कहेंगे ही कि जब 'रोम जल रहा था तो नीरो बांसुरी बजा रहा थाÓ। हालांकि हमारी मोटी बुद्धि से यह व्यंग्य कुछ अतिशयोक्तिपूर्ण है पर साहब किसी का मुंह बंद तो नहीं किया जा सकता। क्योंकि इसी तरह की सैकड़ों सूक्तियां विपक्ष में रहते मोदी भी कर चुके हैं। हमें याद है कि उनके परम समर्थक बाबा ने एक बार कहा था कि यूपीए सरकार के शासन में पांच सैनिक शहीद हो गए अगर मोदी प्रधानमंत्री होते तो अब तक सौ सिर ले आते। लेकिन अब तो बाबा की बोलती बंद है और वे भी काले-सफेद धन की माला जपना छोड़ कर आजकल अपने देसी घी का प्रचार करने में जुटे हैं। यानी उन्होंने भी 'सेवाÓ के पलड़े को हल्का कर 'धंधेÓ के पलड़े को झुकाने पर जोर दे रखा है। अब अपनी छोटी-सी बुद्धि से हम तो उनसे यही अर्ज करना चाहते हैं कि समझो भाई समझो। खूब घूम चुके दुनिया।

   अब जरा घर को भी संभालो। इससे पहले कि आपके सेवक हनुमान शाह साहब यह स्पष्टीकरण दें कि 'न खाऊंगा और न खाने दूंगाÓ भी एक चुनावी जुमला ही था आप कमान को संभालो। अब सत्ता का 'हनीमून कालÓ समाप्त हो चुका है। अब तो अच्छे-अच्छे धीरज रखने वालों के सब्र का पैमाना भी छलकने लगा है। अब तो चेत जाओ। वरना देश की जनता इतनी हरफनमौला है कि हंसते-हंसते अच्छे-अच्छों की कुर्सी चरमरा देती है। सब कहने लगे हैं- चेत भाई चेत!                                       - राही

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