scriptRoad ahead is not easy at all for Imran Khan | Patrika Opinion: इमरान के लिए आगे की राह आसान नहीं | Patrika News

Patrika Opinion: इमरान के लिए आगे की राह आसान नहीं

सरकार बचाने के लिए इमरान अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के बागी सांसदों से संपर्क साधना चाहते थे, पर उन्हें झटका देते हुए करीब 50 संघीय और प्रांतीय मंत्री शुक्रवार से 'लापता' बताए जा रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ तो ये 'लापता' मंत्री इमरान का सिरदर्द बढ़ा सकते हैं।

 

Published: March 28, 2022 03:23:11 pm

पाकिस्तान में जारी राजनीतिक उथल-पुथल ने वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान के माथे के बल बढ़ा रखे हैं। संसद में 25 मार्च को उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखने से पहले भले कार्यवाही स्थगित कर दी गई हो, संकट टला नहीं है। सरकार बचाने के लिए इमरान अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के बागी सांसदों से संपर्क साधना चाहते थे, पर उन्हें झटका देते हुए करीब 50 संघीय और प्रांतीय मंत्री शुक्रवार से 'लापता' बताए जा रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ तो ये 'लापता' मंत्री इमरान का सिरदर्द बढ़ा सकते हैं। पीटीआइ के कई मंत्रियों और नेताओं की चुप्पी भी इमरान सरकार के भविष्य के बारे में कई सवाल खड़े कर रही है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
ताजा घटनाक्रम पर पाकिस्तान की सेना 'तटस्थ' होने का दावा कर रही है, पर इमरान खान की परेशानी बढ़ाने में उसकी भूमिका पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। इमरान ने 2018 में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की मदद से हुकूमत संभाली थी। चार साल में जनरल बाजवा के साथ उनके समीकरण काफी बदल चुके हैं। उनकी जगह इमरान अपने पसंदीदा पूर्व आइएसआइ प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद को सेना प्रमुख बनाना चाहते थे, जबकि सेवा विस्तार पर चल रहे बाजवा पद पर बने रहना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि जनरल बाजवा के इशारे पर ही विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव की तैयारियां शुरू कीं। विपक्ष के बढ़ते दबाव को लेकर इमरान बार-बार कह रहे हैं कि वह हार नहीं मानेंगे। पाकिस्तानी सेना और पीटीआइ का एक बड़ा धड़ा इस बात से नाराज है कि वहां के पंजाब सूबे को लेकर इमरान सरकार ने कई गलत फैसले किए। आर्थिक बदहाली को लेकर भी सरकार निशाने पर है।
पाकिस्तान की 342 सीटों वाली नेशनल असेंबली में सरकार बचाने के लिए 172 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। पीटीआइ के पास 155 सीटें हैं, जबकि 24 सीटें सहयोगी दलों की हैं। बताया जा रहा है कि पहले पीटीआइ के करीब 12 सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट देने को तैयार थे, अब 50 मंत्रियों के 'लापता' होने के बाद सरकार का हिसाब-किताब और गड़बड़ा गया है। विपक्ष के पास करीब 162 सदस्यों का समर्थन है। अगर इमरान बागी सदस्यों को मनाने में नाकाम रहे, तो उनका खेल बिगडऩा तय है। पाकिस्तान में कोई प्रधानमंत्री अब तक पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। ताजा उथल-पुथल वहां लोकतंत्र की दशा-दिशा के साथ-साथ भारत के लिए भी चिंताजनक है। अगर वहां सत्ता में सेना का दखल बढ़ता है, तो यह भारत के हित में नहीं होगा। सत्ता का कट्टरपंथियों के हाथ में जाना और भी खतरनाक साबित हो सकता है।

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