साइंस एंड टेक: वर्चुअल मीटिंग में होलोग्राम का तड़का

- एआरएचटी मीडिया ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस और जर्मनी से होलोग्राफिक वक्ताओं को एक मंच पर लेकर आया।

By: विकास गुप्ता

Published: 12 Feb 2021, 08:47 AM IST

डैल्विन ब्राउन, इनोवेशंस रिपोर्टर

कोरोना की वैक्सीन आने के बाद अब जबकि जनजीवन पटरी पर लौट रहा है, लाखों लोगों को काम पर लौटना मुश्किल लग रहा है। हालांकि कुछ टेक कम्पनियों ने ऐलान कर दिया है कि लोग 'वर्क फ्रॉम होम' प्रारूप में काम करना जारी रख सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि कार्यप्रणाली ऐसी हो, जिसमें कर्मचारी कुछ दिन घर से काम करें और शेष दिन ऑफिस जाकर। इसके लिए कर्मचारियों के बीच 'रोटेशन' पद्धति अपनाई जा सकती है। कोरोना के बाद की दुनिया में कुछ कंपनियां ऐसे भविष्य की कल्पना कर रही हैं, जहां लोग अधिक सक्रिय भागीदारी निभा सकें, भले ही वे ऑफिस में उपस्थित हों या घर से जुड़े हों। इसका एक तरीका है 3-डी होलोग्राम्स।

बीते माह कनाडा की एआरएचटी मीडिया ने होलोपॉड लॉन्च किया। इस 3-डी प्रणाली के तहत उन लोगों को बैठकों और सम्मेलनों में सांकेतिक रूप से उपस्थित दिखाया जाता है, जो बैठक में भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते। जनवरी में ही तकनीक सम्मेलन सीईएस में 3-डी ग्राफिक्स कंपनी इमवर्स ने ऐसा सॉफ्टवेयर जारी किया जो वर्चुअल मीटिंग में होलोग्राम संयोजन को संभव करता है। गत वर्ष भी स्पेशियल ने ऑक्यूलस क्वेस्ट पर होलोग्राफिक-स्टाइल की वर्चुअल मीटिंग को साकार कर दिखाया था। इसी तरह और भी कई कंपनियां हैं जो ऐसी ही वेब कॉन्फ्रेंस क्षमताएं विकसित करने की दौड़ में शामिल हैं। एक प्रकार से यह कंपनियों के लिए भी नए अनुभव का अवसर है, जिसमें वे कर्मचारी के ऑफिस से और अन्यत्र स्थान से काम करने के बीच तुलनात्मक अध्ययन कर सकती हैं। जनवरी में हुए पीडब्ल्यूसी के वर्क प्लेस सर्वे में अधिकांश लोगों ने इस साल दूसरी तिमाही में हाइब्रिड वर्कप्लेस के हकीकत में तब्दील होने की संभावना जताई, जबकि नेशनल एसोसिएशन फॉर बिजनेस इकोनॉमिक्स के सर्वे के अनुसार 11 प्रतिशत कर्मचारी कोरोना काल से पहले वाले कामकाजी माहौल में लौटने के इच्छुक हैं।

हालांकि कॉरपोरेट यात्राओं के पहले जैसी स्थिति में लौटने की उम्मीद नहीं है। पारंपरिक रूप से हाई-डेफनिशन होलोग्राम के लिए प्रोजेक्शन तकनीशियनों की आवश्यकता होती है, लेकिन एआरएचटी के होलोपॉड इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे बहुत कम समय में प्लग-एंड-प्ले प्रणाली की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।  इसी तरह स्टार्ट-अप इमवर्स का सॉफ्टवेयर डेप्थ कैमरों से जानकारी जुटाता है और छवियों को वॉल्यूमेट्रिक पिक्सल में परिवर्तित करता है जिससे वास्तविक समय में होलोग्राम तैयार किया जा सकता है। ये डिजिटल क्लोन विविध रूपों में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
द वाशिंगटन पोस्ट

विकास गुप्ता
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