आत्म-दर्शन - सभी के लिए हैं धर्मग्रंथ

- सदियों पहले धर्मग्रंथ में ईश्वर के लिखित वचन हमारे लिए ही लिखे गए हैं।

- ईश्वर के वचन हमारे हृदय की गहराई में उतरते हैं।

By: विकास गुप्ता

Published: 30 Jan 2021, 10:49 AM IST

पोप फ्रांसिस ईसाई धर्म गुरु

बाइबिल जैसे धर्मग्रंथ इसलिए नहीं लिखे गए हैं, उनमें उल्लेखित विचार वहींं तक सीमित रहें। लक्ष्य यह है कि धर्मग्रंथ में वर्णित प्रार्थना श्रद्धालुओं के हृदयों का स्पर्श करते हुए उन्हें पुष्पित करे। ईश्वर के वचन हमारे हृदय की गहराई में उतरते हैं। धर्मग्रंथ का पठन-पाठन ईश्वर और मानव के बीच एक सेतु का काम करता है। सदियों पहले धर्मग्रंथ में ईश्वर के लिखित वचन हमारे लिए ही लिखे गए हैं।

धर्मग्रंथ के पद जिसे हम लगातार सुनते रहते हैं, हमें किसी एक दिन प्रभावित कर लेते हैं और वे हमारे जीवन को आलोक से भर देते हैं। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम धर्मग्रंथ के वचनों को अपने हृदय के खुलेपन, अपनी प्रार्थना के जरिए ईश्वर के सजीव वचन बनाते हैं या नहीं। धर्मग्रंथ ईश्वर के संदूक हैं, जहां ईश्वर के वचन निवास करते हैं और सुरक्षित रहते हैं। धर्मग्रंथ किसी एक खास मानव समुदाय के लिए नहीं, वरन हम सभी नर और नारियों के लिए लिखा गया है। ईश्वर के वचनों को खुले हृदय से सुनने से हमारी आत्मा को पोषण मिलता है।

विकास गुप्ता
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