आत्म-दर्शन : खास क्यों है पूर्णिमा

जब चंद्रमा पूरा होता है तो इसका स्पंदन और अनुभूति चंद्रमा की बाकी स्थितियों से काफी अलग होती है। साथ ही, इसका खिंचाव भी अलग होता है।

By: विकास गुप्ता

Published: 07 Apr 2021, 07:38 AM IST

सद्गुरु जग्गी वासुदेव (ईशा फाउंडेशन के संस्थापक)

पूर्णिमा का अपना महत्त्व है, क्योंकि इसमें एक खास तरह का सौंदर्यबोध होता है। आप जिस भी चीज पर नजर डालते हैं, वह आपको सुंदर दिखाई देती है। अचानक उस वस्तु के प्रति आपकी ग्रहणशीलता बढ़ जाती है। कोई भी चीज जिसे हम असुंदर मानते हैं या हमें बदसूरत लगती है, उसके प्रति हमारी ग्रहणशीलता कम हो जाती है। तो एक चीज है कि इसमें कुछ खास तरह का सौंदर्यबोध तो है, जो निश्चित तौर पर आपकी ग्रहणशीलता को बढ़ाएगा। धरती चांद के साथ एक खास स्थिति में गति कर रही है। जब चंद्रमा पूरा होता है तो इसका स्पंदन और अनुभूति चंद्रमा की बाकी स्थितियों से काफी अलग होती है। साथ ही, इसका खिंचाव भी अलग होता है।

पूर्णिमा की रात को अन्य रातों की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण खिंचाव ज्यादा होने की वजह से सागर में ज्वार ज्यादा आता है। पानी की तरह आपके रक्त में खिंचाव होता है, जिसके चलते यह दिमाग की तरफ ज्यादा बढ़ता है। आपने सुना होगा कि जो लोग दिमागी रूप से थोड़े असंतुलित होते हैं, वे उस दिन और ज्यादा असंतुलित हो जाते हैं, क्योंकि ऊर्जा में चढ़ाव आपमें जो भी खूबियां होती हैं, उन्हें बढ़ा देता है। इसी तरह से आपकी दूसरी खूबियों में भी वृद्धि होती है, लेकिन ज्यादातर लोग इतने संवेदनशील नहीं होते कि वे इस पर गौर कर पाएं। अगर आप ध्यान करते हैं तो आप गहरे ध्यान में चले जाएंगे। आपमें जो भी खूबियां होंगी, वे बढ़ जाएंगी। जो लोग आध्यात्मिकता के रास्ते पर हैं, खासकर अगर वे ध्यान के रास्ते पर हैं, तो चंद्रमा पूर्णिमा की रात ध्यान करने में ज्यादा मददगार होगा।

विकास गुप्ता
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