आत्म-दर्शन : जीवन संग्राम

विपत्तियां केवल कमजोर, कायर, डरपोक और निठल्ले व्यक्तियों को ही डराती और पराजित करती हैं।

By: Patrika Desk

Published: 07 Sep 2021, 11:51 AM IST

स्वामी अवधेशानंद गिरी

जीवन एक संग्राम है। इसमें वही व्यक्ति विजय प्राप्त कर सकता है, जो या तो परिस्थिति के अनुकूल अपने को ढाल लेता है या जो अपने पुरुषार्थ के बल पर परिस्थिति को बदल देता है। हम इन दोनों में से किसी भी एक मार्ग का या समयानुसार दोनों मार्गों का उपयोग कर जीवन-संग्राम में विजयी हो सकते हैं। इसलिए याद रखिए। विपत्तियां केवल कमजोर, कायर, डरपोक और निठल्ले व्यक्तियों को ही डराती और पराजित करती हैं। ये उन लोगों के वश में रहती हैं, जो उनसे जूझने के लिए कमर कसकर तैयार रहते हैं।

आत्म-दर्शन : हमें कई मुसीबतों से बचाती है खामोशी

ऐसे व्यक्ति भली-भांति जानते हैं कि यह जीवन फूलों की सेज नहीं, वरन् रणभूमि है। यहां हमें आपत्ति से निडर होकर जूझना है। वे इस संघर्ष में सूझबूझ से काम लेते हुए अपना जीवन-क्रम तदनुसार ढांचे में ढालने का प्रयास करते रहते हैं।

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