आत्म-दर्शन : जो दिया, वही पाया

यदि आप लोगों को देखकर मुस्कुराते नहीं, बल्कि भौहें चढ़ाते हैं, तो उनकी प्रतिक्रिया भी वैसी ही होती है।

By: विकास गुप्ता

Published: 09 Jul 2021, 12:09 PM IST

दलाई लामा, बौद्धधर्म गुरु

प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए लोगों को यह समझाना होगा कि पर्यावरण का सीधा प्रभाव हमारे अपने हितों पर पड़ता है। इस बात को समझना होगा कि यदि आप दूसरों के कल्याण के लिए चिंतित हैं, दूसरों की पीड़ा बांटते हैं और उनकी सहायता करते हैं, तो अंतत: आपका ही लाभ होगा। यदि आप केवल अपने बारे में ही सोचते हैं और दूसरों के हितों की उपेक्षा करते हैं, तो अंत में आप की ही हानि होगी। यह भी एक प्रकार से प्रकृति के नियम जैसा ही है। इसे इस तरह समझ सकते हैं।

जैसे यदि आप लोगों को देखकर मुस्कुराते नहीं, बल्कि भौहें चढ़ाते हैं, तो उनकी प्रतिक्रिया भी वैसी ही होती है। यदि आप दूसरे लोगों के साथ सच्चा और अच्छा व्यवहार करते हैं, तो वे भी आपके साथ उसी प्रक ार का व्यवहार करते हैं। यह तो हम मानेंंगे ही कि सभी व्यक्ति मित्र चाहते हैं, कोई भी शत्रु नहीं चाहता। ध्यान रहे कि मित्र बनाने का उचित ढंग है सहृदयता। प्रकृति को भी अपना मित्र बनाएं। इसका ध्यान रखेें, निश्चित रूप से वह भी आपका ध्यान रखेगी।

विकास गुप्ता
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