आत्म-दर्शन : जिम्मेदारी समझें

अगर विश्व शांति स्थाई नहीं रहती और प्राकृतिक पर्यावरण का विनाश वर्तमान गति से चलता रहा, तो भावी पीढ़ी को एक विशाल नष्ट हुआ ग्रह मिलेगा।

By: विकास गुप्ता

Published: 17 Jul 2021, 08:27 AM IST

दलाई लामा,बौद्ध धर्म गुरु

प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का विनाश अज्ञान, लालच और पृथ्वी के जीवों के प्रति सम्मान के अभाव के कारण होता है। सम्मान का यह अभाव धरती के मनुष्यों की भावी पीढिय़ों तक पहुंचता है। अगर विश्व शांति स्थाई नहीं रहती और प्राकृतिक पर्यावरण का विनाश वर्तमान गति से चलता रहा, तो भावी पीढ़ी को एक विशाल नष्ट हुआ ग्रह मिलेगा। हमारे पूर्वजों ने धरती को समृद्ध और सम्पन्न दृष्टि से देखा था, जो वह है। अतीत में भी कुछ लोगों ने प्रकृति को कभी समाप्त न होने वाला और सदा बने रहने वाला माना था।

अब हम जानते हैं कि ऐसा तभी हो सकता है, जब हम इसकी देख-रेख करें। अज्ञान के कारण अतीत में हुए विनाश को भुला पाना कठिन नहीं है, पर आज हमारे पास अधिक सूचना प्राप्ति के साधन है। यह आवश्यक है कि हम नैतिक रूप से पुनर्परीक्षण करें कि हमने विरासत में क्या पाया है, हम किसके लिए उत्तरदायी हैं और हम भावी पीढिय़ों को क्या देकर जाएंगे? यह स्पष्ट है कि यह एक निर्णायक पीढ़ी है। हममें क्षमता भी है और यह हमारी जिम्मेदारी भी है।

विकास गुप्ता
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