आपकी बात, क्या तलाक की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 30 Dec 2020, 05:23 PM IST

आसान हो तलाक की प्रक्रिया
तलाक के ज्यादातर मामलों में दोनों पक्ष लगभग अपनी दिशा तय कर चुके होते हैं। बहुत कम अवसर होते हैं, जब वे समझौता कर साथ रहने को तैयार हों। यदि ऐसा हो भी जाता है, तो बाद का जीवन सुखमय नहीं कहा जा सकता। यदि तलाक कम समय में और बिना किसी मानसिक तनाव के आसानी से हो जाता है, तो दोनों पक्षों को आगे के जीवन की राह चुनने में आसानी रहती है। एक लंबी प्रक्रिया उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाती है। एक आसान तलाक प्रक्रिया दोनों पक्षों को समाज में अपनी प्रतिष्ठा पुन: स्थापित करने में भी सहायता करेगी। इसलिए बहुत जरूरी है कि तलाक की प्रक्रिया को आसानी से ही नहीं, बल्कि कम समय में भी पूरा किया जाए।
-मनोज कुमार जैन, टोंक
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तलाक की प्रक्रिया को ज्यादा जटिल बनाया जाए
तलाक की प्रक्रिया को और अधिक जटिल बनाया जाना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक घर में छोटी-मोटी बातें तो होती रहती है। इन्हीं छोटी-छोटी बातों के कारण कई बार स्थिति तलाक तक पहुंच जाती है। जब तलाक की प्रक्रिया को अधिक जटिल कर दिया जाएगा, तो तलाक के मामले भी कम हो जाएंगे और रिश्तों को अधिक मजबूत और स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
-योगेश टेलर, सुजानगढ़, चूरू
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जटिल प्रक्रिया से मुश्किल
भारतीय समाज में विवाह एक पवित्र संस्कार है, किंतु कभी-कभी परिस्थितियां इतनी प्रतिकूल हो जाती हंै कि तलाक की नौबत आ जाती है। मसले को अदालतों में मध्यस्थों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाता है, किंतु कुछ मामलों में ही सफलता मिल पाती है। अदालत में पेशी और तामील की प्रक्रिया भी परेशानी भरी है। कभी-कभी तलाक की प्रक्रिया में बहुत समय लगता है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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भ्रम भी बनता है तलाक का कारण
तलाक एक ऐसा कदम है, जिसको अमूमन भारतीय समाज, खास कर गांवों में आम नहीं माना जाता। पति या पत्नी के मन में पैदा हुए भ्रम के कारण भी कई बार तलाक की नौबत आ जाती है। अत: तलाक की वर्तमान अपनाई गई व्यवस्था काफी हद तक सही है। ये बेहतर है कि दोनों पक्षों को आपस में बिठा कर सब स्थिति साफ कर दी जाए और फिर यदि लगे की साथ नहीं चल सकता तो तलाक करवा दिया जाए। बेहतर तो यह है कि समझा-बुझाकर तलाक को टाल दिया जाए। असल में तलाक सिर्फ एक युगल ही नहीं, वरन् दो परिवारों का भविष्य भी तय करता है।
-जिगर माहेश्वरी, चोहटन, बाड़मेर
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परिवार को टूटने से बचाएं
तलाक कभी भी खुशी में नहीं दिए जाते। जब इंसान क्रोध की हालत में होता है, तब ही वह तलाक जैसे रास्ते को चुनता है। क्रोध हर समस्या की जड़ है। मेरी राय में तलाक की प्रक्रिया को आसान नहीं करना चाहिए, बल्कि दोनों पक्षों को समय देना चाहिए। इस दिए गए समय में मुमकिन है कि दोनों में साथ जिंदगी गुजारने की सोच फिर से पैदा हो जाए। इस तरह एक परिवार टूटने से बच सकता है।
-अन्सार इन्दौरी, कोटा
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सरल हो तलाक की प्रक्रिया
यदि कोई व्यक्ति अपने साथी के साथ खुश नहीं है और वह अलग होना चाहता है, तो तलाक हो जाना चाहिए। इससे परिवार में शांति बनी रहेगी और इसमें सबकी खुशी होगी। सकारात्मकता बरकरार रहेगी। तलाक की प्रक्रिया आसान हो जानी चाहिए।
-ज्योति दयालानी, बिलासपुर
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महिलाओं पर भारी पड़ता है खर्च
तलाक की प्रक्रिया लम्बी और जटिल होती है। वर्षों अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वकील के बेतुके और बेहूदा सवालों का सामना करना पड़ता है। अदालत में तलाक की अर्जी लगाने और फैसला होने तक काफी कुछ बदल जाता है। महिला तो आर्थिक रूप से भी टूट जाती है। पुरुष तो आर्थिक रुप से सक्षम होते हैं और अदालत की कार्यवाही पूरी होने तक आर्थिक भार वहन कर लेते हैं। इसलिए जिस दिन से तलाक की प्रक्रिया शुरू हो, उसी दिन से भरण पोषण भत्ते की राशि दी जानी चाहिए।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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ज्यादा देरी न की जाए
तलाक की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए। जब तलाक का मामला अदालत में आए तो शुरू में दोनों पक्षों को कुछ समय देना चाहिए, जिससे वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकें। इसके बावजूद भी वे अलग होना चाहते हैं, तो उनके साथ किसी भी प्रकार की बहस नहीं होनी चाहिए । उनकी बात को स्वीकार करते हुए तुरंत प्रभाव से तलाक की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
-राधेश्याम गोस्वामी, बीदासर
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महिला हितों का ध्यान रखा जाए
तलाक की प्रक्रिया निश्चित रूप से आसान की जानी चाहिए, परन्तु शर्त यह भी रखी जाए कि इसमें महिला के अभिमत को अधिक महत्त्व मिले। परिवार टूटने से सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को होता है। अत: महिला के हितों का ध्यान रखते हुए शीघ्रतापूर्वक तलाक होना चाहिए।
-राम प्रकाश अवस्थी, जोधपुर
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जरूरी है तलाक की आसान प्रक्रिया
आज की युवा पीढ़ी में धैर्य और सहनशीलता की क्षमता बहुत कम होती जा रही है। इस कारण आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ रही है। साथ ही दहेज प्रथा के कारण स्त्रियों पर अत्याचार, प्रताडऩा, हत्या आदि मामलों की वृद्धि हो रही है। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए तलाक की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। न्यायालय में इनका फैसला भी शीघ्र हो, जिससे स्त्री तलाक पाकर स्वयं को सुरक्षित अनुभव कर सके।
-राजकुमार सक्सेना, भिलाई
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जटिल प्रक्रिया से नुकसान
भारत की तलाक प्रक्रिया बहुत जटिल है। इसके कई चरण होते हैं, जिससे समय ज्यादा लगता है। इस दौरान व्यक्ति मानसिक रूप से भी बहुत प्रताडि़त होता है। इन सब समस्याओं से बचने के लिए तलाक की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए।
-प्रज्ञा ओझा, रीवा, मध्य प्रदेश

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