छोटा देश, बड़ी सीख

स्विट्जरलैंड भले छोटा देश होगा लेकिन उसके नागरिकों ने दुनिया के तमाम देशों और उनके नागरिकों को बड़ी

By: मुकेश शर्मा

Published: 06 Jun 2016, 10:40 PM IST

स्विट्जरलैंड भले छोटा देश होगा लेकिन उसके नागरिकों ने दुनिया के तमाम देशों और उनके नागरिकों को बड़ी सीख दी है। सीख ये कि मुफ्त में कोई चीज लेना उन्हें मंजूर नहीं। यहां तक कि सरकार की तरफ से हर व्यक्ति को प्रतिमाह एक लाख 80 हजार रुपए दिए जाने का प्रस्ताव भी। स्विट्जरलैंड सरकार हर व्यक्ति को जीवनयापन के लिए 1.80 लाख रुपए देने की योजना लाई थी और इस बारे में देशवासियों की राय ली गई थी।

 लोगों ने कहा कि वे काम करके वेतन लेना चाहते हैं न कि घर बैठकर। सवाल काल्पनिक है कि भारत जैसे देश में अगर सरकार की तरफ से ऐसा प्रस्ताव आया होता तो क्या होता? शायद 99 फीसदी लोग घर बैठे वेतन के प्रस्ताव पर मोहर लगा देते। बिना ये सोचे-समझे कि सक्षम होते हुए भी घर बैठे वेतन क्यों लिया जाए? ऐसा नहीं कि स्विट्जरलैंड के 100 फीसदी लोगों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया हो। वहां भी 23 फीसदी लोग ऐसे थे जो घर बैठे वेतन लेने को अच्छा प्रस्ताव मान रहे थे।

सवाल ये कि क्या हम भारतीयों को स्विट्जरलैंड के नागरिकों से कुछ सीख नहीं लेनी चाहिए? देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझना चाहिए? भारत में हजारों गांव ऐसे मिल जाएंगे जहां के लोग बिजली चोरी करना अपना अधिकार समझते हैं। आम भारतीय टैक्स चुराने का कोई मौका नहीं गंवाना चाहता। अधिकांश लोग सफर के दौरान पांच साल के बच्चे को पौने तीन साल का बताकर आधा टिकट लेना भी मुनासिब नहीं समझते।

 हर आदमी बात देश की जरूर करता है लेकिन उसे चिंता सिर्फ अपनी और अपने परिवार की ही होती है। ए. राजा हों, कानिमोझी या एकनाथ खडसे और छगन भुजबल सरीखे नेता, पकड़े जाने के बाद भी अपना दामन पाक-साफ ही बताते रहते हैं। हालत ये हो गई है कि अब तो ईमानदारी और नैतिक मूल्य जैसे शब्द स्कूली किताबों से भी गायब होने लगे हैं। सरकारें भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रहती हैं।


 राष्ट्र उत्थान के नारे सिर्फ भाषणों में ही सुनने को मिलते हैं। ऐसे माहौल में स्विट्जरलैंड के निवासियों की सोच हमें कुछ सीखने का, कुछ समझने का अवसर देती है। बताती है कि हम इंसान हैं तो इंसानों जैसी सोच भी रखें। पाप करके गंगा में डुबकी लगाने की बजाय पाप नहीं करने का संकल्प लें। ऐसा करना आसान नहीं लेकिन कोशिश की जाए तो असंभव भी नहीं।

मुकेश शर्मा Reporting
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