इतने बेखबर और बेबस!

इतने बेखबर और बेबस!

Shankar Sharma | Publish: Jun, 26 2017 10:28:00 PM (IST) विचार

राजस्थान के गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को गैंगस्टर आनंदपाल के मारे जाने की जानकारी दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद मिली। घोर आश्चर्य की बात है। पत्रकारों से बातचीत में कटारिया ने स्वीकार किया कि


भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह वाकई 'पार्टी विद डिफरेन्स' यानी अन्य दलों से अलग तरह की पार्टी है। राजस्थान के गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को गैंगस्टर आनंदपाल के मारे जाने की जानकारी दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद मिली। घोर आश्चर्य की बात है।

पत्रकारों से बातचीत में कटारिया ने स्वीकार किया कि मुठभेड़ की जानकारी उन्हें नहीं थी। रात पौने बारह बजे मुख्यमंत्री ने आनंदपाल के मारे जाने पर  बधाई दी तो उन्हें इसकी जानकारी मिली। कटारिया के बयान से साफ हो जाता है कि राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपने ही गृहमंत्री को घटना की जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। क्यों, इसका जवाब प्रदेश ही नहीं देश की जनता भी जानना चाहती है?

किसी भी सरकार का मुख्यमंत्री ताकतवर हो, इससे किसी को इनकार नहीं पर इतनी बड़ी मुठभेड़ की जानकारी पुलिस विभाग के मुखिया को नहीं देना चंद सवाल तो खड़े करता ही है। पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी?

 गृहमंत्री को घटना की जानकारी नहीं थी तो वे इसको छिपा भी सकते थे पर उन्हें यह कहने की जरूरत क्यों पड़ी कि घटना की जानकारी उन्हें मुख्यमंत्री ने दी, अधिकारियों ने नहीं। ये कटारिया का नहीं राज्य की जनता का अपमान है। मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया ही इसलिए जाता है ताकि वे अपने-अपने विभागों के कार्यों को बेहतर ढंग से अंजाम दे सकें।

ये बात सिर्फ कटारिया के विभाग की नहीं है, हो सकता है प्रदेश के बाकी मंत्रियों की हालत भी कटारिया जैसी ही हो। उन्हें भी अपने विभाग के बारे में जानकारी मुख्यमंत्री से मिलती हो। कटारिया की साफगोई से खड़े हुए सवाल जवाब मांगते हैं लेकिन बड़ा सवाल ये कि जवाब देगा कौन? मीडिया या विपक्ष तो आवाज ही उठा सकता है।

ऐसे में क्या कटारिया को नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र नहीं दे देना चाहिए? अधिकारी  समय पर जानकारी नहीं देते तो कटारिया के गृह मंत्री बने रहने का औचित्य क्या है? पुलिस अधिकारियों के तबादले और पद स्थापन में उनकी पहले से ही नहीं चलती, ये किसी से छिपा नहीं है। बेहतर हो कि कटारिया इस्तीफा देकर जता दें कि वे सिर्फ बंगले व गाड़ी के लिए मंत्री नहीं बने रहना चाहते। इससे कटारिया का सम्मान भी बना रहेगा और प्रदेश का मान भी।
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