आत्म-दर्शन : सफलता का राज

इच्छाशक्ति सफलता का शुरुआती बिंदु है, यह हमेशा याद रखें। जिस तरह थोड़ी सी आग से कम गर्माहट मिलती है, उसी तरह कमजोर इच्छा से कमजोर परिणाम मिलते हैं।

By: सुनील शर्मा

Published: 15 Jun 2021, 05:45 PM IST

- स्वामी अवधेशानंद गिरी

दिव्य और महान उद्देश्यों का पीछा करने का प्रयास करें। सर्वोच्च शक्ति में पूर्ण विश्वास के साथ अपना कर्तव्य ईमानदारी से पूरा करें। आशावादी बनें और निराश न हों। बाधाओं को दूर करने के लिए अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें। मनुष्य की उपलब्धियों की सीमा उसकी इच्छाशक्ति पर निर्भर है। इच्छाशक्ति सफलता का शुरुआती बिंदु है, यह हमेशा याद रखें। जिस तरह थोड़ी सी आग से कम गर्माहट मिलती है, उसी तरह कमजोर इच्छा से कमजोर परिणाम मिलते हैं। इच्छाशक्ति वह वृत्ति चक्र है, जिसके अंतर्गत अनुभूति, इच्छा, गति या प्रवृत्ति, शरीर धर्म सबका योग रहता है।

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जो संकल्प को साकार करने का माध्यम बनती है, वह इच्छाशक्ति कहलाती है। ऐसी बलवती इच्छा को जिसकी ज्योति अहर्निश कभी मंद न हो, दृढ़ इच्छाशक्ति कहते हैं। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए, जिन गुणों की आवश्यकता होती है, उनमें सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है- ‘दृढ़ इच्छा शक्ति’। अन्य गुण, जैसे ईमानदारी, साहस, परिश्रम और लगन आदि दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में व्यर्थ हो जाते हैं।

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प्राय: ऐसा देखा गया है कि एक व्यक्ति के पास धन है, बल है और विद्या है, परन्तु वह अपने जीवन-काल में कुछ भी नहीं कर पाता। यदि ऐसे व्यक्तियों के मानसिक जीवन का विश्लेषण किया जाए, तो स्पष्ट पता चल जाएगा कि उनमें इसी दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव था। इसके विपरीत ऐसे अनेक व्यक्ति इतिहास प्रसिद्ध हो गए हैं, जो साधन विहीन थे, परन्तु अपने मनोबल के कारण वे महानता के शिखर तक पहुंच गए और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए।

अत: दृढ़ इच्छाशक्ति सम्पन्न व्यक्ति ही महान कार्यों का संचालन करता है। वही नवसृजन, नवनिर्माण, नवचेतना का शुभारम्भ करता है। साथ ही, अपने और दूसरों के कल्याण, विकास एवं उत्थान का मार्ग भी खोजता है।

सुनील शर्मा
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