चौकन्ना रहें!

चौकन्ना रहें!
pm modi

Dilip Chaturvedi | Publish: Mar, 05 2019 01:10:25 PM (IST) विचार

सीमा पर अभी गर्मी कम नहीं हुई है। पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है, घाटी में सुरक्षा बल आतंकियों से निपटने में लगे हैं।

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक और फिर विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की सकुशल वापसी ने एनडीए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में नई ऊर्जा का संचार किया है। रविवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान और फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में मोदी जमकर गरजे। 21 विपक्षी दलों के महागठबंधन को महामिलावट बताते हुए उन्होंने कहा, गरीब का शोषण करने वाले ये दल 'चौकीदार' से परेशान हैं। उन्होंने कहा- यह नया भारत है, अपने जवानों की शहादत पर चुप नहीं बैठेगा। चुन-चुन कर बदला लिया जाएगा। चौकीदार पूरी तरह चौकन्ना है। उन्होंने विपक्ष पर देश के विकास को अवरुद्ध करने के साथ ही हमारे वीर जवानों के शौर्य को दरकिनार कर उनका मनोबल गिराने के प्रयास करने का आरोप लगाया। पटना के गांधी मैदान में उन्होंने जहां नीतीश को कर्मठ और गरीबों का मसीहा बताते हुए कहा कि उन्होंने पिछड़े बिहार को नई दिशा दी। वहीं अमेठी में राहुल को आड़े हाथ लिया। उन्होंने अमेठी में नए हथियार कारखाने का उद्घाटन किया। यहां अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल काल्शनिकोव-२०३ का निर्माण होगा। उन्होंने बिना किसी दल का नाम लिए कहा कि जब सेना आतंक को कुचलने में जुटी है, हमारे देश में ही कुछ ऐसे लोग हैं जो सेना का मनोबल बढ़ाने के बजाय दुश्मन को खुश करने वाले काम कर रहे हैं। सेना की कार्रवाई के सबूत मांग रहे हैं। देश की जनता सब देख रही है। समय पर सबको देख लेगी।

पटना की संकल्प रैली इस मायने में भी महत्त्वपूर्ण थी कि बिहार में पहली बार नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार एक मंच पर आए थे। इससे पूर्व दोनों 2009 में साथ दिखे थे। मोदी और नीतीश के मतभेद जगजाहिर थे। यही कारण था कि नीतीश ने 2005 से 2010 के विधानसभा चुनावों में मोदी को बिहार में चुनाव प्रचार के लिए नहीं आने दिया था। दोनों की महत्त्वाकांक्षाओं के कारण 2013 में एनडीए में बिखराव हुआ था। नीतीश ने लालू यादव के साथ महागठबंधन कर देश में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद भाजपा को बड़ी शिकस्त दी थी। अब दोनों फिर साथ हैं। इनके खिलाफ विपक्ष महागठबंधन कर रहा है। नीतीश ने फिलहाल केन्द्र की राजनीति में आने की महत्त्वाकांक्षाओं को कहीं दफन कर दिया लगता है। समझौते की राजनीति में वे बिहार तक सीमित हो गए लगते हैं। संभवत: उन्हें भान हो गया है कि मोदी के साथ में ही भलाई है। कुछ भी हो, सर्जिकल स्ट्राइक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने पर सफल रहने के बाद मोदी ही नहीं, सम्पूर्ण एनडीए आत्मविश्वास से लबरेज है। चुनाव आयोग घोषणा कर ही चुका है कि आम चुनाव समय पर कराए जाएंगे। आगामी दो माह देश में चुनावी पारा चरम पर होगा। नए-पुराने मुद्दों को लेकर पक्ष-विपक्ष चुनाव मैदान में उतरेंगे। सीमा पर अभी गर्मी कम नहीं हुई है। पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है, घाटी में सुरक्षा बल आतंकियों से निपटने में लगे हैं। चुनावी माहौल में आतंकी देश के अन्य हिस्सों में सक्रिय हो सकते हैं। चौकन्ना रहने की जरूरत है।

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