नजरिया: 'जनता आवाज बुलंद करे और सरकारें तत्काल कदम उठाएं'

- ये भी जानें: 'इक्सटिंगशन रिबेल्यन' यानी 'एक्सआर' का आह्वान

By: विकास गुप्ता

Published: 22 Feb 2021, 07:45 AM IST

दिल्ली पुलिस ने ग्रेटा थनबर्ग 'टूलकिट' मामले में पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु मुलुक को नामजद किया है। अग्रिम ट्रांजिट जमानत के लिए दायर की गई याचिका में जैकब ने कहा, 'यह वालंटियर आंदोलन विश्व में विभिन्न पर्यावरण संकटों और चिंताओं के बारे में जागरूकता लाने और बिना किसी हिंसा के मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। हाल ही किसान आंदोलन के मद्देनजर टूलकिट मामला सुर्खियों में आया। यह टूलकिट जिस वैश्विक संगठन से जुड़ा है उसका नाम है - 'एक्सआर' यानी 'इक्सटिंगशन रिबेल्यन'। जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्यक्रमों को समर्थन देने के अलावा 'एक्सआर' का भारतीय समूह स्थानीय मुद्दों पर भी आवाज उठाता रहा है।

'अहिंसक और निष्पक्ष आंदोलन'-
समूह के मुताबिक, यह एक विकेंद्रीकृत, अंतरराष्ट्रीय एवं राजनीतिक रूप से निष्पक्ष आंदोलन है। इसके तहत अहिंसक एवं अवज्ञाकारी तरीके से सरकारों को बाध्य किया जाता है कि वे जलवायु एवं पारिस्थितिकी की आपात स्थिति को लेकर समुचित कदम उठाएं। जलवायु परिवर्तन पर यूएन के इंटरगवर्नमेंटल पैनल की एक रिपोर्ट के बाद 31 अक्टूबर 2018 को यूके में 'एक्सआर' शुरू किया गया। रिपोर्ट में घोषणा की गई द्ग 'जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों को रोकने के लिए और इस बात को समझने के लिए कि मानव जाति बड़े पैमाने पर विलुप्ति की छठी घटना में प्रवेश कर चुकी है, हमारे पास महज 12 वर्ष का समय रह गया है।' यह समूह भारत सहित 75 देशों में फैल चुका है। इसी समूह ने मुंबई के बांद्रा रीक्लेमेशन पर अक्टूबर 2019 में 'डाइ इन' विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके तहत सैकड़ों वालंटियर सड़कों पर 'शवासन' की मुद्रा में लेट गए थे।

2018: लंदन में आंदोलन-
एक्सआर ने लंदन में नागरिक अवज्ञा आंदोलन चला कर सरकार से मांग की कि 2025 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करे। इसके पीछे उनका इरादा सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया पाना था। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनकी योजना थी - 12 नवम्बर 2018 से दो सप्ताह तक बाधा उत्पन्न करना और बलिदान देना। समूह ने यातायात रोकने का अह्वान करने और सामूहिक गिरफ्तारियां देने की बात भी कही थी। इन गतिविधियों में लिप्त करीब 1000 वालंटियर ने गिरफ्तारी दी थी।

अवज्ञा आंदोलनों से प्रेरित-
भारत में 'एक्सआर' विश्व के 15 बड़े अवज्ञा आन्दोलनों से प्रेरित है। इसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 1930 में किया गया महात्मा गांधी का नमक सत्याग्रह भी शामिल है। एक्सआर की वेबसाइट के अनुसार, देश में इसके 19 समूह हैं, जो मुंबई, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलूरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों से लेकर गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और केरल जैसे राज्यों में सक्रिय हैं। इसका एक समूह नागपुर में भी है, जिसके सदस्य 1990 के बाद जन्मे युवा हैं।

'2025 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हो शून्य'-
एक्सआर, दुनिया के विभिन्न देशों की सरकारों से चाहता है कि जलवायु एवं पर्यावरणीय आपदा की स्थिति में वे 'सच बताएं', 'तत्वरित कार्रवाई करें' और 'राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करें'। सरकारें बदलाव लाने की तत्काल जरूरत को लोगों तक पहुंचाएं और, आपसी संवाद करें और 2025 तक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन शून्य के स्तर पर लाएं। 'एक्सआरÓ के मुताबिक वे लोग, जो समूह के सिद्धांतों और मूल्यों का समर्थन करते हैं, बिना किसी की अनुमति लिए स्वयं संगठित हों, सामूहिक कार्य योजना तैयार करें और आवाज बुलंद करें।

विकास गुप्ता
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