आखिर कब तक

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Dilip Chaturvedi | Updated: 19 Feb 2019, 01:03:33 PM (IST) विचार

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, वहां भी देश के सभी कानून लागू करने होंगे। धारा-370 इसमें बड़ी बाधा है। सबसे पहले इसे हटाने का सर्वसम्मत निर्णय हो।

कश्मीर जल रहा है। सेब के बाग, केसर की क्यारियां और अखरोट-बादाम के दरख्त जार-जार हैं। पुलवामा जहां 14 फरवरी को आत्मघाती हमले में 40 से ज्यादा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान शहीद हो गए थे, वहीं रविवार रात से फिर जबरदस्त मुठभेड़ हुई हैं। सीआरपीएफ काफिले पर हमले का मास्टरमाइंड अब्दुल रशीद गाजी और जैश-ए-मोहम्मद के दो अन्य आतंकी मारे गए। मुठभेड़ में एक मेजर समेत चार सैनिक शहीद हो गए। एक लेफ्टिनेंट कर्नल व कैप्टन तथा दक्षिण कश्मीर के डीआइजी अमित कुमार घायल हुए हैं। दो नागरिक भी मारे गए हैं।

गाजी जैश का कमांडर और आत्मघाती हमलों का विशेषज्ञ था। उसकी मौत बड़ी सफलता है। वरना वह न जाने कितने और आतंकियों को आत्मघाती प्रशिक्षण देता। लेकिन जिस तरह स्थानीय लोग आतंकियों के लिए ढाल बन रहे हैं, उन्हें शरण दे रहे हैं, सुरक्षा बलों पर पथराव कर उन्हें भागने की गली दे रहे हैं, यह बड़ी चिंता का विषय है। सेना और सुरक्षा बलों के इतने बड़े जमावड़े के बाद भी लोग आतंकियों को अपने घरों में पनाह दे रहे हैं। १४ फरवरी की घटना के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव बनाने के प्रयास शुरू किए हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को आतंकियों की शरणगाह साबित करने में कामयाबी भी मिली है। घाटी में भी पड़ोसी देश के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है। सुरक्षा बलों को भी आतंकियों के खिलाफ 'फ्री हैंड' दिया गया है। लेकिन क्या इन सब प्रयासों से घाटी में अमन कायम हो पाएगा?

पहले भी संसद, मुंबई, जयपुर, पुणे, गुजरात में आतंकी हमलों के बाद इसी तरह के प्रयास हुए थे, लेकिन उसके क्या परिणाम निकले? कुछ दिन शांति, फिर वही आतंकी और वही पाकिस्तान। फिर चीन का रुख भी कम चिंतनीय नहीं है। वहां का सरकारी मीडिया पाकिस्तान और जैश सरगना मसूद अजहर के खिलाफ भारत से सबूत मांग रहा है। क्यों? भारत किसी तीसरे पक्ष को सबूत क्यों दे? चीन को इसका अहसास भी कराना आवश्यक है। अब समय आ गया है कि संपूर्ण भारत को, सभी राजनीतिक दलों को मिलकर सारे निहित स्वार्थ त्याग कर ठोस निर्णय करना होगा। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां भी देश में बने सभी कानूनों को लागू करना होगा।

धारा-370 इसमें सबसे बड़ी बाधा है। सबसे पहले इसे हटाने का सर्वसम्मत निर्णय हो। संसद का विशेष सत्र इसके लिए आहूत करना पड़े, तो किया जाए। पिछड़े राज्यों को मिलने वाले विशेषाधिकार वहां जरूर दिए जा सकते हैं, लेकिन अलगाववाद की इजाजत नहीं दी जा सकती। उत्तर प्रदेश का नागरिक राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल में बस सकता है, तो फिर जम्मू-कश्मीर में क्यों नहीं? राजनीतिक दलों को यह खाई पाटनी होगी। रहा सवाल पाकिस्तान का, तो धारा-370 हटने के बाद स्वयं पीछे हट जाएगा। वरना हमें भी इजरायल बनना होगा। सबसे पहले पाक को जताना होगा कि कश्मीर घाटी में पूरा भारत खड़ा है। उसे अहसास भर हो गया तो गीदड़ की भांति दुम दबा लेगा। कश्मीर में आतंक का खात्मा जरूरी है। देश अब और शहादत बर्दाश्त नहीं करेगा।

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