Exclusive: कांग्रेस के 23 नेताओं की वो चिट्ठी जिस पर पार्टी के भीतर हंगामा हुआ

  • नेताओं ने लिखा, पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘‘सांस्थानिक नेतृत्व व्यवस्था’ की स्थापना करना अब अत्यंत आवश्यक

 

 

By: shailendra tiwari

Published: 31 Aug 2020, 06:00 AM IST

प्रिय माननीय कांग्रेस अध्यक्ष महोदया,

हम सभी अधोहस्ताक्षरकर्ता, जिनमें से अधिकतर ने पार्टी को ही अपना पूरा जीवन समर्पित किया है, इस पत्र के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक परिवेश और कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक मामलों पर विचारों को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत करवाना चाहते हैं। स्वतंत्रता के बाद भारत आज राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के कठिनतम दौर से गुजर रहा है। हमारे संवैधानिक मूल्यों पर लगातार प्रहार जारी है। भारतीय जनता पार्टी और इसके सहयोगी दल अपने सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडा से राजनीति की दिशा तय कर रहे हैं। यह महात्मा गांधी के संयुक्त भारत की परिकल्पना के विपरीत है। लोकतंत्र के निर्माताओं ने हमें विरासत में ऐसा भारत नहीं दिया था।

देश भर में भय और असुरक्षा का माहौल है। कांग्रेस का कर्तव्य है कि वह इसे चुनौती का सामना करे। पार्टी जनता को आश्वस्त करे कि वह जनता के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करेगी। यह नई और दृढ़ कांग्रेस पार्टी द्वारा ही संभव है, जो प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों से मिलकर बनी हो। देश इस समय गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और आर्थिक मंदी ने देश के ज्यादातर नागरिकों को हाशिए पर धकेल दिया है। कोरोना महामारी संकट ने इन चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। आर्थिक गतिविधियां ठप होने से लाखों मजदूर बेरोजगार हो गए, उन्हें वेतन-भत्ते नहीं मिले। गरीब और वंचितों, खास तौर पर प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। कांग्रेस पार्टी को इन चुनौतियों पर पार पाकर ऐसी व्यापक जवाबदेही के साथ सामने आना होगा, जिसमें पार्टी की दूरदर्शिता और नीतियां परिलक्षित हों।

भारत के पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं की स्थिति और चीन के साथ सैन्य तनाव बड़ी चिंता का विषय हैं। भारत की विदेश नीति में परिवर्तन के चलते हमारे उन पड़ोसी देशों से संबंध तनावपूर्ण होने लगे हैं,जिनके साथ अतीत में हमारे संबंध सद्भावनापूर्ण व मित्रतापूर्ण रहे हैं। इस दिशा में गंभीर सुझावों के साथ आवश्यक संशोधन करने होंगे।

स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने भारत के विकास की नींव रख आधुनिक भारत का निर्माण किया है। कांग्रेस पार्टी को विदेश नीति,रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखना चाहिए।

वर्ष 2014 और 2019 के आम चुनावों और राज्य विधानसभा चुनावों में हमने कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखी है। इसके कारण बहुत से हैं, जिन्हें तुरंत समझना जरूरी है। अन्यथा राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी हाशिए पर सिमट जाएगी। कांग्रेस का आधार कमजोर होना, खास तौर पर युवाओं में विश्वास खोना चिंता का विषय है। पिछले दो आम चुनावों में भारत में पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 18.7 करोड़ बढ़ी। इसमें 10.15 करोड़ मतदाता 2014 में तथा 8.55 करोड़ मतदाता 2019 में बढ़े। युवाओं ने मोदी और बीजेपी को भरपूर वोट दिए। 2009 में बीजेपी का मत प्रतिशत में 7.84 करोड़ वोटों की वृद्धि देखी गई जो 2014 में बढ़ कर 17.6 करोड़ हुई और 2019 में बीजेपी के 22.9 करोड़ वोट बढे। इसके विपरीत कांग्रेस का मत प्रतिशत 2009 में 1.23 करोड़ वोटों से कम रहा। गत लोकसभा चुनावों में भी हमें 2009 से बस थोडत्रे ही वोट ज्यादा मिले। 2019 के आम चुनावों के 14 महीनों बाद भी कांग्रेस ने लगातार हो रही हार के कारणों पर ईमानदारी से कोई आत्म मंथन नहीं किया है।

पार्टी के इसी प्रकार जारी पतन पर लगाम लगाने के उद्देश्य से हम सब आपसे खुल कर बात कर रहे हैं ताकि कांग्रेस पार्टी का भविष्य जो इस समय अधरझूल में है,वह और संकट में न पड़े। नेतृत्व की अस्थिरता और दिशाहीनता ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल कम किया और पार्टी को भी कमजोर किया है। कुछ राज्यों में नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी छोड़ कर जाने से हमारा आधार कमजोर हुआ है।

सीडब्लूसी (कांग्रेस कार्य समिति) पार्टी को प्रभावी दिशा निर्देश देने में नाकाम रही है कि वह बीजेपी सरकार के विभाजनकारी और जनता विरोधी ऐजेंडे के खिलाफ जनता को कैसे चेताएं।
इन दिनों पार्टी की बैठकें दस्तूर बन कर रह गई हैं और राष्ट्रीय एजेंडा तय करने एवं नीतिगत कदम उठाने के बजाय केवल समसामयिक विषयों पर चर्चा तक ही सीमित हैं।

सीपीपी(कांग्रेस संसदीय दल) की बैठकें भी कई वर्षों से सीपीपी नेता के संबोधन और कुछ औपचारिकताओं तक ही सिमट कर रह गई हैं। मुद्दों पर मंथन की परम्परा छोड़ दी गई है, जबकि विपक्ष में रहते हुए पार्टी के लिए ऐसा विचार-विमर्श करना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में यह भी देखा गया है कि पीसीसी अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों तथा डीसीसी अध्यक्षों की नियुक्ति में अनावश्यक देरी होती है। प्रदेश में सम्मानित व स्वीकार्य नेताओं को समय पर नियुक्त नहीं किया जाता और पीसीसी प्रमुख पद पर नियुक्ति के बाद भी उन्हें संगठनात्मक निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती। साथ ही जिला स्तरीय समितियां समन्वित नहीं हैं और प्रदेश की सही जनसांयिख्की का प्रतिनिधित्व नहीं करती। पीसीसी को किसी प्रकार की वित्तीय स्वायत्ता प्रदत्त नहीं है। नेतृत्व की अनुपस्थिति में विश्वसनीयता भी नहीं रह जाती।

युवा एवं छात्र
कांग्रेस पार्टी का इतिहास रहा है कि पार्टी ने अपने नेतृत्व को पोषित करने के साथ ही नई प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित किया है। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस से आए कई नेताओं ने उच्च पद पाए हैं। इन नेताओं की विचारधारा में स्पष्टता और प्रतिबद्धता साफ देखी जा सकती है। वरिष्ठों के अनुभव और युवा ऊर्जा के संयोजन ने पार्टी को मजबूत और दक्ष बनाया है।
पिछले कुछ वर्षों में सांस्थानिक मेरिट और सर्वसम्मति के आधार पर चयन नहीं हो रहा। युवा संगठनों एनएसयूआई और आईवाईसीे संघर्ष और विघटन का कारण बने हैं। साधन संपन्न लोगों और प्रभावशाली संरक्षकों द्वारा समर्थित लोेग इन संगठनों पर हावी हो गए हैं। इस कारण साधारण पृष्ठभूमि के प्रतिबद्ध नेताओं को आगे बढ़ कर पार्टी की सेवा करने का मौका नहीं मिला। इसी का नतीजा रहा कि पार्टी इन प्रमुख सांगठनिक स्तर पर कमजोर हो गई। पार्टी अब न तो राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करती है और न ही प्रदेश स्तर पर, जो इसकी परम्परा रही है। एआईसीसी और पीसीसी में भी नियमित रूप से कोई विचार-विमर्श नहीं होता जिसके अंतर्गत विविधतापूर्ण राष्ट्र के सामाजिक विषयों पर चर्चा की जाती थी।
पार्टी को पुनर्जीवित करने आश्र लाखों कार्यकर्ताओं को उद्देश्यपरक सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए कुछ सुझावः-

  • पूर्णकालिक व प्रभावी नेतृत्वए जो क्षेत्र में सक्रिय हो और एआईसीसी और पीसीसी मुख्यालयों पर दिखाई दे।
  • पीसीसी और जिला समितियां सक्रिय व प्रतिनिधित्व करने वाली हों।
  • सांस्थानिक विश्वसनीयता के लिए सभी पीसीसी को कार्यात्मक स्वायत्ता दी जाए।
  • भारत की भौगोलिक विविधता और संगठन का कंेद्रीकरण व सूक्ष्म प्रबंधन विरोधाभासी रहे हैं। इसलिए डीसीसी अध्यक्षों व विभागीय तथा प्रकोष्ठ पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए एआईसीसी से चयन पर रोक लगानी चाहिए। इसके बजाय डीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति प्रदेश कांग्रेस समितियों के अध्यक्षों के समन्वय से राजधानी में बैठे पार्टी के प्रभारी महासचिव द्वारा की जानी चाहिए।
  • सांगठनिक मामलों,नीतियों और कार्यक्रमों पर सामूहिक विचार-विमर्श तथा निर्णय लेने के लिए केंद्रीय संसदीय बोर्ड (सीपीबी) का गठन किया जाए।
  • राष्ट्रीय सदस्यता अभियान चलाया जाए और प्राथमिकता के आधार पर नामांकन अभियान शुरू किया जाए।
  • ब्लाॅक, पीसीसी प्रतिनिधियों और एआईसीसी सदस्यों के चुनाव में पारदर्शिता बरती जाए।
  • सीडब्लूसी सदस्यों का चुनाव कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुरूप हो।
  • केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) का पुनर्गठन हो, जिसमें सांगठनिक पृष्ठभूमि के नेताओं को शामिल किया जाए, जिन्हें फील्ड में काम करने की जानकारी और अनुभव हो।
  • संसदीय और विधानसभा उम्मीदवारों के पैनल के चयन के लिए बनी चांच समिति में सांगठनिक व चुनाव संबंधी कार्यों का लंबा अनुभव रखने वाले राजनेता शामिल किए जाएं।
  • स्वतंत्र, निष्पख एवं लोकतांत्रिक चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विष्वसनीय एवं वरिष्ठ नेताओं वाले एक स्वतंत्र चुनाव अधिकरण का गठन किया जाए।
  • पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘‘सांस्थानिक नेतृत्व व्यवस्था’ की स्थापना करना अब अत्यंत आवश्यक है।

हम इस कठिन दौर में आपके द्वारा कांगेस पार्टी का कुशल नेतृत्व करने के लिए आपकी हृदय से प्रशंसा करते हैं और विगत पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी की भी उनके कार्यकाल के लिए। कांग्रेस पार्टी श्रीमती इंदिरा गांधी और श्री राजीव गांधी के योगदान व बलिदान पर गौरवान्वित है और इसके लिए सदा उनकी आभारी रहेगी। हम पंडित जवाहर लाल नेहरू के संघर्ष दूरदर्शितापूर्ण नेतृत्व और उल्लेखनीय योगदान को याद रखेंगे। उनकी विरासत हमारे लिए मार्गदर्शन व प्रेरणा का स्रोत है।

नेहरू-गांधी परिवार सदैव कांग्रेस पार्टी के सामूहिक नेतृत्व का अभिन्न अंग बना रहेगा। कांग्रेस पार्टी को मौजूदा चुनौती को दोबारा संघर्ष के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

अब समय आ गया है जब युवाओं, महिलाओं, छात्रों, किसानों, अल्पसंख्यकों, दलितों और मजदूरों की आवाज सुनी जाए। कांग्रेस पार्टी को बीजेपी के एजेंडा से मुकाबला करने के लिए लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों का राष्ट्रीय गठबंधन बनाना होगा। अप्रत्याशित चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस का पुनर्नवीनीकरण राष्ट्रीय आवश्यकता है।

इसलिए पार्टी हित में और भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संविधान अनुरूप उपरोक्त सुझावों पर अमल कर इन्हें लागू करें।

-सादर

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