सवाल क्या बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी भी जिम्मेदार

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि क्या देश के भीतर बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी जिम्मेदार है। लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

By: shailendra tiwari

Updated: 07 Sep 2020, 05:17 PM IST

जीएसटी ने भी बिगाड़ी अर्थव्यवस्था
बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी भी जिम्मेदार है। सरकार के गलत निर्णयों ने विकास दर को बहुत नीचे ला दिया है। अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ महीनों से छाई सुस्ती के लिए नोटबंदी और जीएसटी को काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। आम जनता के साथ ही कारोबारी भी यह मानते हैं कि एक जुलाई 2017 से लागू हुई जीएसटी से व्यापार करना कठिन हो गया है। जनता के नजरिये से देखा जाए, तो इससे महंगाई पर किसी तरह का ब्रेक नहीं लगा है, बल्कि यह पहले के मुकाबले और ज्यादा बढ़ गई है। सरकार के ऐसे निर्णयों से सदैव आमजनता की ही कमर टूटती है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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जीएसटी में खामियां
जीएसटी भारत में अप्रत्यक्ष कर को आसान बनाने, कर राजस्व में वृद्धि करने एवं प्रक्रियाओं को कम व सरल बनाने के लिए लाया गया था। मुश्किल यह है कि जीएसटी में खामियां निकलीं। भारत की अर्थव्यवस्था बिना लघु और मध्यम उद्योग-व्यापार के नहीं चल सकती। यह वर्ग जीएसटी के जटिल नियमों के कारण संकट में है। ऐसे में अर्थव्यवस्था गर्त में ही जाएगी। सरकार को चाहिए कि वह जीएसटी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करे, तभी अर्थव्यवस्था विकास के रथ पर आगे बढ़ पाएगी।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा, जयपुर
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अब भी समझ से बाहर
जीएसटी के कारण सब वस्तुओं के दाम बढ़ गए। ज्यादा कर देना पड़ रहा है। व्यापार बहुत कम हो गया। बहुत से लोगों को ये कर का ढांचा ही समझ नहीं आ रहा है। जीएसटी लागू करने वाली सरकार ही घनचक्कर हो रही है। अर्थव्यवस्था लुढ़क रही है। कब क्या हो जाए, कुछ नहीं कह सकते।
-राम नरेश गुप्ता,,सोडाला, जयपुर
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सही क्रियान्वयन नहीं हुआ
भले ही बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए दोष किसी पर भी डाल दिया जाए, पर हकीकत में यह है कि जीएसटी का सुचारू रूप से सही व समुचित क्रियान्वन नहीं हुआ। बाजार की मुनाफाखोरी और लालच भी कारण है।
-ओम हरित, फागी, जयपुर
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हो रही है कर चोरी
कच्चे माल के क्रय से लेकर वस्तु निर्माण और फिर उपभोक्ता तक पहुंच में जितने स्तर पर कर वसूलने का जो नियम बना है, उससे देश की अर्थव्यवस्था में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है। विक्रेता द्वारा हर उपभोक्ता से कर तो वसूल कर ही लिया जाता है, पर वह शासन के खजाने तक नहीं पहुंच पाता है। हर स्तर पर कर चोरी होती है। उदाहरण के लिए रेलवे स्टेशन पर सूचना पढऩे को मिली की बिल देने पर ही राशि का भुगतान करें, मुझे नहीं लगता कि किसी यात्री-उपभोक्ता ने एक कचोरी खाने का बिल मांगा हो या दुकानदार ने इस सूचना का पालन किया होगा । तो फिर देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसे सुधरे?
-रामेश्वर लाल आमेटा, कारोलिया,राजसमन्द
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आर्थिक विफलता का सबूत
देश की बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए नोटबंदी व जीएसटी जिम्मेदार है, वहीं कोरोना वायरस संक्रमण ने कोढ़ में खाज का काम किया है। नोटबन्दी के बाद मांग में असर हुआ। जीएसटी लागू होने के बाद आयात करने वालों को रिफंड मिलने में देरी हुई। जीएसटी उलझन भरा है। छोटे व्यापारियों पर जीएसटी भारी पड़ा है। निश्चित रूप से जीएसटी अर्थव्यवस्था की बदहाली के लिए जिम्मेदार है। यह सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता का सबूत भी है।
-शिवजी लाल मीना, मानसरोवर, जयपुर
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आएंगे अच्छे परिणाम
देश की अर्थव्यवस्था की माली हालत के लिए जीएसटी को जिम्मेदार ठहराना गलत है, क्योंकि इससे पहले देशभर में वस्तुओं की खरीद-फरोख्त में क्रेता और विक्रेता को जगह-जगह कर अदायगी करनी होती थी। अब एक देश, एक टैक्स की पद्धति के लागू होने से दीर्घगामी व सुखद परिणाम आएंगे और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ़ राजसमंद
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जीएसटी को ठीक तरह से लागू किया जाए
अप्रत्यक्ष कर की एकरूपता के लिए जीएसटी लागू किया गया है, किन्तु आमजन की दैनिक उपयोग की वस्तुओं को अधिक दर की श्रेणी में रखने से मंहगाई बढ़ी है। इसके साथ ही कर संग्रह ठीक से नहीं हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था बदहाल हुई है। जीएसटी को ठीक ढंग से लागू करना चाहिए।
-अमित दीवान, भोपाल
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नोटबंदी और जीएसटी जिम्मेदार
देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था के अनेक कारण हैं जिसमें नोटबंदी व जीएसटी को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता हैं। वैसे ऊपरी तौर पर देखा जाए तो सरकार का वित्तीय प्रबन्धन नकारात्मक है। देश में न उद्योगधंधे चल रहे हैं, न व्यापार-व्यवसाय। व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, तो उद्योगों को कोरोना खा गया हैं। अधिकतर रेल, हवाईयात्राएं बंद होने से भी अर्थव्यवस्था चरमराई हुई हैं। रही सही कसर चीन के साथ तनाव की स्थिति से पूरी हो रही हैं। सरकार कोरोना को जिम्मेदार ठहराकर हाथ पर हाथ धरे बैठी है, जबकि सरकार को मनमोहनसिंह व उनके जैसे अन्य अर्थशास्त्रियों से चर्चा कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास करने चाहिए।
-विनोद कटारिया, रतलाम
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जीएसटी जिम्मेदार नहीं
अर्थव्यवस्था की कमजोरी के लिए जीएसटी तो जिम्मेदार नहीं है। जीएसटी तो बहुत पहले लागू हो गया था। अभी कोरोना का महाप्रकोप ही इसके लिए जिम्मेदार है। हां, कोरोना से पहले और जीएसटी लगने के बाद में अर्थव्यवस्था के कमजोर होने का कारण है असंगठित व्यपार का कमजोर होना। संगठित व्यपार तो आज भी मजबूत है।
संजय जाजू, भीलवाड़ा
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भविष्य में सकारात्मक परिणाम आएंगे
भारत सरकार ने आर्थिक सुधार के लिए कई कदम उठाए। इनमें जीएसटी भी शामिल है। इन सबकी वजह से अर्थव्यवस्था नीचे आई है, लेकिन भविष्य में इन उपायों का सकारात्मक परिणाम अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
-विरेन्द्र सिंह, मुआना, नागौर
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व्यापार करना हुआ कठिन
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार करना पहले से कठिन हो गया है। महंगाई कम न होकर, बढ़ी है। औद्योगिक उत्पादन में कमी आई है।
-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर
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जीएसटी पर दोषारोपण गलत
बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए केवल जीएसटी पर दोषारोपण करना बेमानी है। इसके लिए विभिन्न देशों में आपसी टकराव तथा व्यापारिक वर्ग का ईमानदारी से कर नहीं भरना। इसके साथ हम सभी को भी स्वदेशी वस्तुओं को खरीदने को वरीयता देना होगा।
कृष्ण शर्मा, खंडेला
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जीएसटी का खराब असर
जब जीएसटी लागू किया गया था, तो यह उम्मीद की जा रही थी कि इससे राजस्व बढ़ेगा, लेकिन इसका उलटा असर हुआ। जाहिर है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर जीएसटी का असर खराब रहा है।
-संजय कुमार बाबल, भूकरका, हनुमानगढ़
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बिगड़ गई अर्थव्यवस्था
बदहाल अर्थवयवस्था के लिए जीएसटी भी किसी हद तक जिम्मेदार हैं। कारण कोरोना की वजह से बाजार में माल की खपत कम है। पहले हमारी अर्थव्यवस्था की हालत ठीक थी, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी के कारण भी हमारी जीडीपी की ग्रोथ कम हो गई
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़

सिरदर्द है जीएसटी
बदहाल अर्थव्यवस्थ के लिए जीएसटी भी जिम्मेदार है, क्योंकि यह बहुत जटिल है। इसका फायदा बड़े व्यापारियों को ही हो रहा है। छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए तो यह सिरदर्द है।
-महिपाल परासरिया, जोधपुर
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जीएसटी जिम्मेदार
बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए नोटबंदी के साथ जीएसटी भी जिम्मेदार है। मुश्किल यह है कि सरकार अब तक इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
-हरिवंश आर व्यास, पोकरन
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अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए
जीएसटी के असर के बारे में अर्थशास्त्री जानें। यह याद रखें कि जमीन, जंगल और जल का संरक्षण जरूरी है। इससे भी अर्थव्यवस्था जुड़ी है। इसलिए सरकार और समाज को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना होंगा।
-दानाराम भामू मोमासर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर
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नोटबंदी से शुरुआत
नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था बिगडऩी शुरू हुई। आम आदमी अभी इससे उबर ही नहीं पाया था के जीएसटी जल्द लागू कर दी। इसका खमियाजा आज पूरा देश भुगत रहा है।
-अब्दुल रहीम, राजनांदगांव

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