scriptTiger conservation is meaningful only if the forest is safe | International Tiger Day : जंगल सुरक्षित तो ही बाघ संरक्षण अर्थपूर्ण | Patrika News

International Tiger Day : जंगल सुरक्षित तो ही बाघ संरक्षण अर्थपूर्ण

world tiger day : हम आज विश्व बाघ दिवस मना रहे हैं। भारत में साल दर साल बाघ अभयारण्यों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को देश का 52वां अभयारण्य घोषित किया गया है।

नई दिल्ली

Updated: July 29, 2021 07:50:27 am

international tiger day : कोरोना महामारी के इस दौर में एक खुशखबर भी रही। वह यह कि मानव आवाजाही कम होने से वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ। लेकिन, चिंतित होने वाली खबर यह है कि वन्य जीवों के व्यापार से उनकी आबादी में औसतन 62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर साल करीब 10 करोड़ वनस्पतियों और जानवरों की तस्करी होती है। वन्य जीवों का यह व्यापार सालाना करीब 1,45,418 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्युशन की यह रिपोर्ट तब और चिंता बढ़ा देती है, जब हम आज विश्व बाघ दिवस मना रहे हैं।

world tiger day
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कहने के लिए भारत में साल दर साल बाघ अभयारण्यों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को देश का 52वां अभयारण्य घोषित किया गया है। लेकिन, सोचने वाली बात है कि क्या इसी अनुपात में बाघों की आबादी बढ़ी है। 1973 से अब तक टाइगर प्रोजेक्ट पर अरबों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन बाघ जैसे वन्य जीवों की संख्या अभी भी अंगुलियों पर गिनने भर जितनी है। 2019 में आई रिपोर्ट के अनुसार देश में सिर्फ 2967 बाघ हैं। इनमें 526 बाघ मध्यप्रदेश और 524 कर्नाटक में हैं। बाघों की आबादी नहीं बढऩे का प्रमुख कारण उनके अधिवास क्षेत्र में कमी और बढ़ती मानव दखलंदाजी है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बाघों के लिए देशभर के टाइगर रिजर्व पूरी तरह सुरक्षित हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की रिपोर्ट कहती है कि हर साल करीब 56 बाघों की मौत हो जाती है। यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार बाघों को रहवास देने के लिए बनाए टाइगर रिजर्व ही उनके लिए असुरक्षित बन गए हैं। सात साल (2012-2019) के आंकड़े तो बहुत चौंकाते हैं। इन सात सालों में देशभर में 750 बाघों की जान गई। इनमें से 393 (52.4 प्रतिशत) बाघ टाइगर रिजर्व के भीतर ही मारे गए, जबकि 254 यानी 33.8 प्रतिशत बाघ जंगल से बाहर मरे हैं। वन अधिकारी इन मौतों की वजह बाघों में आपसी संघर्ष और शिकार की घटनाएं बताते हैं।

देश में जिस तरह टाइगर रिजर्व और उनके आसपास के क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां बढ़ी हैं, वह बाघों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। बाघों के संरक्षण के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता उनके रहवास को पूरी तरह संरक्षित रखने की है। टाइगर रिजर्व को मानवीय दखल से दूर रखना होगा। बाघों के शिकारियों पर नकेल कसने के लिए बेहतर आधुनिक सिस्टम विकसित करना होगा। जंगल सुरक्षित रहेंगे तो अभयारण्यों के अनुपात में बाघों की संख्या भी बढ़ेगी।

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