ट्रंप की चाल

ट्रंप की चाल

Dilip Chaturvedi | Publish: Apr, 09 2019 03:20:33 PM (IST) | Updated: Apr, 09 2019 03:20:34 PM (IST) विचार

अमरीका की ताजा चेतावनी से निपटने के लिए भारत सरकार को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आत्मनिर्भर होने की दिशा में काम करना होगा।

भारत को भविष्य में आर्थिक क्षेत्र में नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अमरीकी राष्ट्रपति जिस तरह लगातार भारत को सबसे ज्यादा शुल्क वसूलने वाला देश बता रहे हैं, भारत सरकार की चिंता बढ़ाने वाला है। डॉनल्ड ट्रंप ने एक सप्ताह में दूसरी बार कहा कि भारत हमारी निर्यातित वस्तुओं पर एक सौ प्रतिशत आयात शुल्क वसूल रहा है जबकि उसी प्रकार की वस्तुएं भारत से अमरीका को बिना किसी शुल्क के निर्यात की जा रही हैं। उन्होंने इसे 'बेवकूफी भरा व्यापार' (स्टूपिड ट्रेड) की संज्ञा दी है। साथ ही अमरीकी प्रशासन को व्यापार में इस विसंगति को दूर करने पर काम करने के आदेश भी दिए हैं। ट्रंप मार्च में अमरीकी कांग्रेस में संकेत दे चुके हैं कि वे भारत को ड्यूटी फ्री व्यापार वाले देशों की वरीयता योजना (जीएसपी) से अलग कर सकते हैं।

ऐसा हुआ तो मई तक भारत से निर्यात होने वाली कुछ वस्तुएं ड्यूटी के दायरे में आ जाएंगी। हालांकि इसमें कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होगा, लेकिन हमारे निर्यात पर असर जरूर पड़ेगा। क्योंकि उसी श्रेणी का सामान अन्य देशों से अमरीका को सस्ता पड़ेगा। अमरीका एक तरफ तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रगाढ़ संबंधों की बात करता है, भारत को अपना सबसे नजदीकी व्यापार सहयोगी बताता है लेकिन दूसरी तरफ ट्रंप की 'अमरीका फस्र्ट' नीति इसके उलट व्यवहार कर रही है। चीन के बाद भारत ऐसा दूसरा देश है, जिस पर ट्रंप की नजर टेढ़ी है। ट्रंप व्यापारी हैं और जानते हैं कि दबाव डलवाकर वे भारत को अपने सामान पर ड्यूटी कम करने को मजबूर कर सकते हैं। इसका बड़ा उदाहरण हार्ले डेविडसन मोटरसाइकल है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि भारत उसकी हार्ले मोटरसाइकल के आयात पर 100 फीसदी शुल्क वसूलता है और भारतीय मोटरसाइकलें अमरीका में ड्यूटी फ्री आयात हो रही हैं। इसके बाद भारत ने हार्ले के आयात पर शुल्क 50 फीसदी कम कर दिया था। इसके बाद अन्य सामानों के निर्यात पर भी शुल्क कम करवाने को ट्रंप प्रशासन दबाव बना रहा है। उसको पता है कि ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन सहित अन्य यूरोपीय देशों में मंदी है, वहां भारत समेत तमाम देशों का निर्यात घटा है। दूसरी ओर, चीन से तनाव के चलते और भारत में मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए मोदी सरकार ने चीन से आयात होने वाली ज्यादातर वस्तुओं पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी थी, लेकिन आधारभूत सुविधाओं के अभाव में मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा और व्यापारी महंगा होने के बावजूद चीन से आयात करने को मजबूर हैं।

अब अमरीका की ताजा चेतावनी से निपटने के लिए भारत सरकार को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आत्मनिर्भर होने की दिशा में काम करना होगा। अमरीकी आयात पर निर्भरता कम होगी तो भारतीय शुल्क मुक्त निर्यात के लिए दबाव बनाया जा सकता है। साथ ही निर्यात के नए क्षेत्र भी तलाशने होंगे। वरना ट्रंप प्रशासन की नीयत तो अभी तक हुए नुकसान (करीब 800 अरब डॉलर) की भरपाई की है। आम चुनावों के बाद, जो भी नई सरकार आए, उसे इस चुनौती से निपटने पर प्राथमिकता से काम करना होगा।

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