पार्वती वैली: अद्भुत रहस्यों से भरी घाटी

  • वैसे तो पार्वती वैली की हर जगह खूबसूरत है, कहीं भी चार यार बैठकर पर्यटन का भरपूर आनंद ले सकते हैं। लेकिन जहां लोग सबसे ज्यादा पहुंचते हैं, उनमें हैं कसोल, तोश, चलाल, रसोल, खीरगंगा, मलाना और पुल्गा।

By: shailendra tiwari

Published: 22 Oct 2020, 06:01 PM IST

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पार्वती वैली के सौन्दर्य से अधिक उसका रहस्य लोगों को अपनी ओर खींचता है। यही कारण है कि इस घाटी को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा रहस्यमयी घाटी के तौर पर जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश में स्थित यह घाटी युवाओं का पंसदीदा हॉलिडे डेस्टिनेशन है। इस जगह पर सालभर ठंड रहती है।


अगर आपको एडवेंचर पसंद है, ट्रेकिंग का शौक रखते हैं तो उसकी तैयारी अलग से कर लें क्योंकि यह घाटी जितनी सुंदर है, उससे भी ज्यादा खतरनाक। इस जगह पर आने के एक नहीं, सैकड़ों कारण हैं। अपनी घुमक्कड़ी को यहां आप अपने तरीके और अपने रंग में रहकर इन्जॉय कर सकते हैं।

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कुछ लोग यहां प्राकृतिक खूबसूरती देखने आते हैं, कुछ लोग ट्रेकिंग के लिए, कुछ लोग कैफे कल्चर को एक्सप्लोर करने, तो कई लोग घाटी को और ज्यादा एक्सप्लोर करने के लिए। घाटी बहुत ही दुर्गम है, साथ ही अकेले ट्रेकिंग करना खतरनाक भी। कई लोग यहां से कभी वापस नहीं लौटे। अगर आप इस घाटी को एक्सप्लोर करने के लिए आते हैं तो इसके सौंदर्य के साथ-साथ थोड़ा-सा इसके इतिहास और भूगोल के बारे में जान लें।

जगहों की सही जानकारी पैसों के साथ-साथ आने वाले खतरे भी पचास फीसदी कम कर देती है। अगर आप पहले से किसी जगह को जानते हैं तो आपकी यात्रा का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है। सुरक्षा से समझौता कभी नहीं करें क्योंकि जान है तभी जहान है। सही गाइडेंस और स्थानीय लोगों से मदद जरूर लें।


भौगोलिक दृष्टि से देखें तो ईश्वर ने इस जगह को खूबसूरती की बेशुमार नेमत बरती है। नदी, पहाड़, झरने, जीव-जंतु, वनस्पतियां, प्रकृति, गहरी और संकरी घाटियां। यहां पहुंच कर पर्यटन भूगोल समझना काफी दिलचस्प हो सकता है। जो लोग कभी घर नहीं लौटे, उनकी केस स्टडी भी कर सकते हैं। वह किन परिस्थितियों में गायब हुए, यह पर्यटन के लिहाज से अहम खोज हो सकती है। अब जब आप इतना कुछ समझ और जान चुके हैं तो अब मैं आपको पार्वती वैली की कुछ खास जगहों के बारे में भी बता देता हूं।

वैसे तो यहां की हर जगह खूबसूरत है, कहीं भी चार यार बैठकर पर्यटन का आनंद ले सकते हैं। लेकिन जहां लोग सबसे ज्यादा पहुंचते हैं, उनमें हैं कसोल, तोश, चलाल, रसोल, खीरगंगा, मलाना और पुल्गा। स्थानीय लोगों की भावनाओं का ख्याल, कहीं भी किसी भी हाल में नहीं निकल जाना, होश न खोना, घूमने से पहले शिड्यूल तैयार करना, घर वालों से हर रोज बात करना, और जहां जा रहे हैं उसके बारे में पहले से किसी अपने को बताना वे जरूरी बातें हैं जिनका ध्यान रखना हित में है।

shailendra tiwari
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