ट्रैवलॉग: उनाकोटि : शिव का रहस्यमयी संसार

जगंलों के बीच शैलचित्रों और मूर्तियों का यह भंडार किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है। एक बार इसके बारे में जान लेने के बाद शायद ही कोई खुद को रोक पाए।

By: सुनील शर्मा

Published: 08 Apr 2021, 09:41 AM IST

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भारत में अपनी भौगोलिक संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य से अचंभित करने वाली जगह मानो अनंत हैं। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित उनाकोटि ऐसी ही एक जगह है। यह स्थान काफी सालों तक अज्ञात रूप में इस जगह पर मौजूद रहा है, हालांकि अब भी बहुत लोग इस स्थान का नाम तक नहीं जानते हैं। जगंलों के बीच शैलचित्रों और मूर्तियों का यह भंडार किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता है। एक बार इसके बारे में जान लेने के बाद शायद ही कोई खुद को रोक पाए। सच कहूं तो त्रिपुरा आने के पीछे का मेरा सबसे बड़ा आकर्षण उनाकोटि ही रहा। शिव का यह रहस्यमयी संसार न जाने क्यों, वर्षों से मुझे खींचता रहा है।

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यह स्थान जितना अद्भुत है उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प इसका इतिहास है। इसका रहस्यमयी इतिहास जानने-समझने के दौरान मुझे उनाकोटि के बारे में कई अहम जानकारियां हासिल हुईं। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो उनाकोटि एक पहाड़ी इलाका है जो दूर-दूर तक घने जंगलों और दलदली इलाकों से भरा है। इस तरह जंगल के बीच जहां आसपास कोई बसावट नहीं, एक साथ इतनी मूर्तियों का निर्माण कैसे संभव हो पाया, ये मूर्तियां कब और किसने बनाईं, इस बारे में कहा जाता है कि देवता इसी रास्ते से होकर काशी जा रहे थे और थकने के बाद यहां ठहर गए। शिव ने कहा सभी सुबह होने से पहले इस जगह को छोड़ देंगे लेकिन देवताओं ने जब इसका पालन नहीं किया तो शिव ने उन्हें श्राप दे दिया। शिव काशी चले गए और बाकी देवता पत्थर में परिवर्तित हो गए। यहां मूर्तियां दो तरह की हैं - एक पत्थरों को काट कर बनाई गईं, और दूसरी पत्थरों पर उकेरी गईं।

जगह का नाम उनाकोटि कैसे पड़ा, इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि एक शिल्पकार के कैलास जाने की जिद पर शिव-पार्वती ने शर्त रख दी कि अगर वह एक रात में एक करोड़ (एक कोटि) मूर्तियों का निर्माण कर देगा तो कैलास जा सकेगा। शिल्पकार काम में जुट गया। सुबह जब गिनती हुई तो एक मूर्ति कम रह गई। स्थानीय भाषा में एक करोड़ में एक कम संख्या को उनाकोटि कहा जाता है। तभी से इस जंगली और दलदली इलाके का नाम उनाकोटि पड़ गया।

सुनील शर्मा
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