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जनजातीय सशक्तीकरण से बनेगा गौरवशाली भारत

locationजयपुरPublished: Nov 15, 2022 10:09:37 am

Submitted by:

Patrika Desk

बिरसा मुंडा जयंती पर विशेष : जनजातीय कार्यक्रमों से अधिक संगठित एवं एकजुट महसूस कर रहे जनजातीय समुदाय

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अर्जुन मुंडा
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री
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हर साल 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला पूरे देश के लिए ऐतिहासिक क्षण था क्योंकि जनजातीय गौरव दिवस गौरवशाली जनजातीय विरासत, परंपरा, संस्कृति और भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना से ओत-प्रोत है। यह वैश्विक मंच पर भारत की छवि को भी मजबूत करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, ‘आजादी के इस अमृत काल में, देश ने संकल्प लिया है कि वह भारत की जनजातीय विरासत एवं परंपराओं तथा उनकी वीरता की कहानियों को और अधिक भव्य रूप से व्यापक पहचान दिलाएगा।’
दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत जनजातीय आबादी भारत में रहती है, जो इसे एक विविध एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला देश बनाती है। इसमें नौजवान आदिवासी भी शामिल हैं। वे शिक्षा, खेल जैसे क्षेत्रों में मिल रहे अवसरों का पूरे समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ लाभ उठा रहे हैं। वे प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार भी जीत रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बना रहे हैं। यद्यपि, नैसर्गिक प्रतिभा के बावजूद उपेक्षा के चलते जनजातीय समुदायों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा है पर अब उनके हालात बेहतर हो रहे हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण हैं, देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। भारत ने जनकेंद्रित सरकार के रूप में एक आदर्श बदलाव देखा है। प्रधानमंत्री के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ (सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन) के आह्वान ने सरकार के पिछले आठ वर्षों के कार्यकाल में मार्गदर्शक सिद्धांत का काम किया है। अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को लाभ मिलना सुनिश्चित करने और देशभर में विकास के परिणाम में सुधार के लिए जन-हितैषी नीतियां व पहल लागू की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, स्वास्थ्य देखभाल के विकल्पों का विस्तार करने, किसान कल्याण और कमजोर लोगों की मदद को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही विकास में युवाओं और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया गया है।
निजी अनुभव से बात करूं, तो जब मैं भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने के बारे में विचार करता हूं तो मुझे महसूस होता है कि जनजातीय समाज को विकसित करना, सभी जनजातीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना, उनके महत्त्वपूर्ण संस्थागत मसलों को सुलझाना और उनकी सांस्कृतिक विरासत को महत्त्व देते हुए समाज की मुख्यधारा से जोडऩा बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने विकास के लिए जिस महत्त्वपूर्ण रणनीति पर जोर दिया है, वह समग्र शिक्षा है। हमारी सरकार की नीतियों का आधार जनजातीय विरासत को संरक्षित रखते हुए शिक्षा पर अधिक केंद्रित है। जनजातीय समाजों में, विशेष रूप से युवा लड़कियों के लिए शैक्षिक उन्नति की परंपरा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा खड़ा करने की अपनी चुनौतियां हैं। हमारा लक्ष्य जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर ब्लॉक स्तर पर इन समस्याओं का समाधान करना है, ताकि वे सर्वश्रेष्ठ एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में पढ़ सकें और पांच छात्रवृत्ति कार्यक्रमों - प्री/पोस्ट मैट्रिक, राष्ट्रीय फेलोशिप, टॉप क्लास स्कॉलरशिप और नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप - का लाभ उठा सकें।
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय समुदाय के कल्याण को आगे बढ़ाने एवं सुशासन के तहत नवीनतम डिजिटल तकनीकों को अपनाया है ताकि दूरदराज के इलाकों में भी जनजातीय लोगों का कौशल बढ़ाया जा सके। हमारे राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थान, गैर-सरकारी संगठन, उत्कृष्टता केंद्र और अन्य संबद्ध समूह जनजातीय जीवन एवं संस्कृति की उन्नति के साथ-साथ इसके मानव विज्ञान संबंधी घटकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनका शोध, विकास योजना तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत@2047 का विजन गांवों और शहरों दोनों में हर जरूरी सुविधाएं प्रदान करना, दुनिया के सबसे उन्नत बुनियादी ढांचे का निर्माण कर खुशहाली के ऊंचे स्तर को हासिल करना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने तय किया है कि स्थायी आजीविका, आय का सृजन, आजीविका में वृद्धि, स्वास्थ्य और विविध जातीय संस्कृतियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। हमारे प्रमुख कार्यक्रमों और पहलों के परिणामस्वरूप, आज जनजातीय लोग समाज में अधिक संगठित एवं एकजुट महसूस करते हैं। मंत्रालय भारत में कई जनजातीय भाषाओं को संरक्षित और पोषित करने के भी प्रयास कर रहा है और जनजातीय भाषाओं में वर्णमाला की पुस्तक तैयार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों एवं विशेषज्ञों के साथ काम कर रहा है। मंत्रालय विभिन्न जनजातीय समुदायों की मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर दे रहा है। इसके अलावा, स्थानीय शासी संस्थाओं के समन्वय से हमारे कार्यक्रमों व नीतियों को स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ संचालित किया जाता है।

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