Fuel Crisis In UK : सेना ने संभाली मालवाहक वाहन संचालन की जिम्मेदारी

ब्रिटेन में जारी ईंधन आपूर्ति संकट का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट ने ब्रिटेन की सम्पूर्ण आपूर्ति शृंखला को ध्वस्त कर दिया है। भारी मालवाहक वाहन चालकों की व्यापक कमी के चलते ब्रिटेन के लगभग नब्बे फीसदी पेट्रोल पम्पों पर ईंधन समाप्त हो चुका है और जहां पर ईंधन उपलब्ध है, वहां पर गाडिय़ों की कई किलोमीटर लम्बी कतारें लगी हुई हैं।

By: Patrika Desk

Published: 08 Oct 2021, 10:08 AM IST

सुरेश यादव, (अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार)

ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होते समय प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपने संदेश में कहा था - 'बहुत सारे लोगों के लिए यह उम्मीद की घड़ी है, उन्हें लगा था कि ऐसी घड़ी कभी नहीं आएगी, हालांकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो चिंतित हैं और नुकसान होने जैसा महसूस कर रहे हैं।' उत्साह और भविष्य की चिंता को इंगित करता बोरिस जॉनसन का यह संदेश ब्रिटेन में जारी वर्तमान ईंधन आपूर्ति संकट की वजह से बेहद सटीक साबित हो रहा है। इस संकट ने ब्रिटेन की सम्पूर्ण आपूर्ति शृंखला को ध्वस्त कर दिया है। भारी मालवाहक वाहन चालकों की व्यापक कमी के चलते ब्रिटेन के लगभग नब्बे फीसदी पेट्रोल पम्पों पर ईंधन समाप्त हो चुका है और जहां पर ईंधन उपलब्ध है, वहां पर गाडिय़ों की कई किलोमीटर लम्बी कतारें लगी हुई हैं। डर की वजह से लोग ज्यादा खरीद कर रहे हैं। इससे डिपार्टमेंटल स्टोर खाली हो चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई अन्य अत्यावश्यक सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। कमोबेश समूची दूनिया पर राज करने वाले ब्रिटेन की धरती पर विकासशील दुनिया जैसा दृश्य नजर आ रहा है।

ब्रिटेन में जारी वर्तमान संकट की अवधि का अनुमान और आकलन अत्यंत मुश्किल है, क्योंकि वर्तमान में जारी ईंधन आपूर्ति संकट के मूल में कामगारों की भारी कमी है। ब्रेक्जिट और कोरोना काल के चलते ईयू पासपोर्ट पर काम करने वाले चालक, प्लम्बर, फार्म- वर्कर और केयर सेक्टर के कामगारों सहित चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े लाखों लोग ब्रिटेन वापस नहीं लौटने की मंशा के साथ स्वदेश लौट चुके हैं। आर्थिक सांख्यिकी उत्कृष्टता केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में यहां पर 1.3 मिलियन विदेशी कामगारों की कमी है। कठोर आव्रजन कानूनों के चलते निकट भविष्य में इस कमी की भरपाई फिलहाल नजर नहीं आ रही है। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन करीब पांच हजार हैवी गुड्स व्हीकल चालकों और 5,500 पोल्ट्री कामगारों के लिए अस्थाई वीजा जारी करने की घोषणा के साथ ही सेना के करीब दो सौ जवानों को ईंधन आपूर्ति वाहन चलाने का जिम्मा सौंपा गया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर ब्रेक्जिट के इस तरह के मध्यम और दीर्घकालीन दुष्प्रभावों के आकलन के बारे में अर्थशास्त्रियों की व्यापक सहमति रही है। यद्यपि ब्रेक्जिट के अन्य दुष्प्रभावों यथा- वैश्विक स्तर पर सामरिक मामलों में ब्रिटेन के प्रभाव में उल्लेखनीय कमी, विदेशी निवेश और व्यापार में भारी गिरावट, राष्ट्रीय सुरक्षा, समृद्धि और विकास पर विपरीत प्रभावों का पूर्वानुमान था।

आव्रजन की गंभीर चिंता, अरबों पाउण्ड के सदस्यता शुल्क की बचत और सम्प्रभुता प्रभाव में बढ़ोतरी की चाह में यूके के 51.89 फीसदी लोगों ने ब्रेक्जिट के पक्ष में वोट किया था। अब ईंधन आपूर्ति संकट के चलते पैदा हुई अव्यवस्थाओं से घिरे नागरिक सरकार से सवाल करने लगे हैं कि क्या हमने इंतजार और कतारों के लिए ब्रेक्जिट के पक्ष में मतदान किया था? बेशक बोरिस जॉनसन अपने बचाव के लिए कोई भी तर्क प्रस्तुत करें ,परन्तु यह स्पष्ट है कि पूर्वानुमान के बावजूद उन्होंने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए। अब बोरिस जॉनसन सरकार के प्रयासों से कुछ समय में स्थिति नियंत्रित हो सकती है। इसके बावजूद आगे का वक्त आशंकाओं से भरा है, क्योंकि वर्तमान सप्लाई चेन का संकट ईंधन आपूर्ति तक ही सीमित नहीं होकर पूरी अर्थव्यवस्था पर भी नजर आ रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पूर्व की भांति ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के हाल के संकट के बादल भी जल्द ही छट जाएंगे।

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