scriptunchecked medical facilities can give a new disease to the system | प्रसंगवश: बीमारियों का इलाज करते-करते न पाल लें कोई नया मर्ज | Patrika News

प्रसंगवश: बीमारियों का इलाज करते-करते न पाल लें कोई नया मर्ज

ध्यान रहे कि सरकारी संसाधन आम आदमी के चुकाए गए टैक्स से ही उपलब्ध हो रहे हैं

Published: June 02, 2022 10:56:26 pm

राजस्थान सरकार ने आमजन के हितों के प्रति सकारात्मक कदम उठाकर मरीजों के लिए 155 प्रकार की जांचों को नि:शुल्क कर दिया है। इनमें हर वह जांच आ जाती है, जिसकी सामान्यतया जरूरत पड़ती है। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा व जांच योजना का दायरा बढ़ाकर अब इसे मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी राजस्थान योजना का नाम दिया गया है। अब हर आमोखास को बिना किसी खर्च के लगभग सभी प्रकार की जांच करवाने का वरदान मिल गया। इसके साथ ही हर व्यक्ति से लेकर चिकित्सकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे इस योजना का दुरुपयोग न करें। जिस जांच की जरूरत हो उसे ही लिखा जाए, उसे ही करवाया जाए। ऐसा न हो कि किसी को जांच की जरूरत न हो फिर भी उसे लिखकर सरकार के साधन व पैसा खराब किया जाए। जिसे जल्दी जांचों की जरूरत है उसे पहले मौका देना होगा ताकि समय पर उपचार शुरू हो सके।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
देखने में आ रहा है कि पूरे प्रदेश में जांचों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अच्छी बात है कि हर बीमारी की जांच हो, पर साधनों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर न हो। यदि हम उदाहरण के लिए राजस्थान के सिर्फ उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज को ही लें तो मार्च माह में कुल जांचों की संख्या 2,97,854 थी, जो अप्रेल माह में 3,84,343 हो गई। मई में ये जांचें बढ़कर 5 लाख से अधिक हो गईं। लगभग यही हाल राजस्थान के सभी जिलों व मेडिकल कॉलेजों का है। जांच करवाने से पहले हर उस व्यक्ति को ये देखना होगा कि यदि किसी सामान्य जांच से काम चल सकता है तो फिर किसी बड़ी जांच को बेवजह क्यों करवाया जाए। जैसे एमआरआइ हो या सिटी स्कैन, ऐसी जांचें करवाने से पहले देखना होगा कि एक्स-रे से काम चल रहा हो तो इन जांचों को करवाने से क्या फायदा है। ये भी ध्यान रहे कि एक्स-रे सहित कई जांचें शरीर के लिए बहुत घातक हैं। चिकित्सकों को अपने अनुभव के आधार पर निर्णय लेना चाहिए कि बेवजह की जांचों को नजरअंदाज करना ही ठीक रहता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि संदेह होने पर जांच न करवाई जाए। कुल मिलाकर मरीज को भी लाभ मिले व सरकारी संसाधनों का भी दुरुपयोग न हो। ध्यान रहे कि सरकारी संसाधन आम आदमी के चुकाए गए टैक्स से ही उपलब्ध हो रहे हैं। यह किफायत से खर्च किया जाए, यह जिम्मेदारी आम आदमी के साथ चिकित्सा पेशे से जुड़े हर शख्स की है। सरकार ने तो पहल कर दी है अब बारी आपकी, हम सबकी है। (सं.पु.)

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