scriptviolent campaign against Uighur Muslims in china | द वाशिंगटन पोस्ट से... जो हो रहा, क्या उसे नकारते रहेंगे ओलंपिक के प्रायोजक | Patrika News

द वाशिंगटन पोस्ट से... जो हो रहा, क्या उसे नकारते रहेंगे ओलंपिक के प्रायोजक

From The Washington Post सामयिक: चीन ने छेड़ रखा है 1.2 करोड़ उइगर मुस्लिमों के समूह को जैविक रूप से खत्म करने का हिंसक अभियान। इसमें निगरानी रखना, सामूहिक नजरबंदी और अब जबरन बंध्याकरण व आइयूडी उपयोग, पुरुष व महिलाओं को कैद करके अलग-अलग रखना, जबरन विस्थापन और उइगर जाति की महिलाओं का चीन की हान बहुसंख्यक प्रजाति के पुरुषों के साथ जबरन विवाह जैसे कृत्य शामिल हैं।

नई दिल्ली

Published: November 17, 2021 08:28:29 am

फ्रेड हायट
(स्तम्भकार और 'द पोस्ट' के संपादकीय पृष्ठ के संपादक)
द वाशिंगटन पोस्ट

चीन के कम्युनिस्ट नेता, कितने ही तरीकों में नवोन्मेषी, जातिसंहार के लिए 21वीं सदी के मुताबिक अपने अलग ही नजरिए को पुख्ता करते नजर आ रहे हैं। जबकि बीजिंग ओलंपिक में करीब तीन माह का समय ही बाकी रह गया है, क्या कोका-कोला व खेलों के बाकी प्रायोजक चीन के साथ जश्न मनाएंगे, जबकि चीन उइगर मुसलमानों के समूह को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने में जुटा हो।

Uighur Muslims in china
Uighur Muslims in china

अमरीकी होलोकॉस्ट म्यूजियम के जातिसंहार रोकथाम के लिए सिमोन-स्कॉट सेंटर की गत सप्ताह प्रकाशित रिपोर्ट 'टु मेक us स्लोली डिसअपीयर' ('ताकि हमें धीरे-धीरे विलुप्त किया जा सके') के अनुसार, चीन ने जातिसंहार का नया तरीका निकाला है, जो कि 'यादा भयावह भले ही न हो लेकिन कपटपूर्ण अवश्य है। एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले चीन के पश्चिमी इलाके में करीब 1.2 करोड़ अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिम रहते हैं। इनके खिलाफ चीन ने एक प्रकार की मुहिम छेड़ रखी है। इसमें निगरानी रखना, सामूहिक नजरबंदी और अब जबरन बंध्याकरण व आइयूडी उपयोग, पुरुष व महिलाओं को कैद करके अलग-अलग रखना, जबरन विस्थापन और उइगर जाति की महिलाओं का चीन की हान बहुसंख्यक प्रजाति के पुरुषों के साथ जबरन विवाह जैसे कृत्य शामिल हैं। इसके अलावा उइगर मुस्लिमों के बच्चों का अपहरण, उनके माता-पिता से छीनकर उन्हेे सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में भर्ती करना भी शामिल है। यह मुहिम हिंसा, अत्याचार और हत्या से अछूती नहीं है, परिवार में जीवित रहे व्यक्तियों की गवाही यह स्पष्ट करती है। रिपोर्ट के अनुसार इस सब की धुरी कहीं और है: 'उइगर मुस्लिमों को अच्छी-खासी संख्या में अस्तित्व में आने से रोकने के लिए चीन सरकार का बलपूर्वक हस्तक्षेप।'

होलोकॉस्ट म्यूजियम का एक मिशन है - 'जातिसंहार के पीडि़तों के लिए आज वह करना, जो यूरोप के यहूदियों के लिए नहीं किया जा सका।' यह जिम्मेदारी स्वीकारने के प्रति म्यूजियम की गंभीरता इसकी दस्तावेजी रिपोर्ट में बरती गई अति सावधानी से साफ झलकती है। ट्रंप और बाइडन प्रशासन की उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन के जातिसंहार को मान चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, म्यूजियम 'चीन सरकार के जातिसंहार में लिप्त होने की आशंका को लेकर बेहद चिंतित है।' दरअसल, अनिश्चितता बनाए रखना ही चीन की मंशा है। उसने सूचना व जानकारियों को रोकने का बड़ा भयावह तंत्र तैयार किया है। उइगर विद्वान सामूहिक नजरबंदी में पहला निशाना बने हैं। विदेशी अध्येता, संवाददाता और थिंक-टैंक विशेषज्ञों को शिनजियांग से बाहर रखा जाता है, जहां अपराधों को अंजाम दिया जाता है। चीन विदेश में रह रहे उइगरों को चुप रखने के लिए उनके रिश्तेदारों को परेशान करने में भी पीछे नहीं है। 'रेडियो फ्री एशिया' के रिपोर्टर इसके ज्यादा शिकार हुए हैं। म्यूजियम की ओर से बीते सप्ताह आयोजित एक फोरम में इन्हीं में से एक रिपोर्टर गुलशेहरा होजा ने खुलासा किया था कि 'चीन सरकार अपने अपराध छिपाने में माहिर है।' होजा को चुप करने के लिए उसके भाई, मां, उनके जीवनसाथी सहित करीब 24 रिश्तेदारों को बिना किसी आरोप-सुनवाई के जेल में डाल दिया गया।

शोधकर्ताओं ने 2019 में उइगर प्रजाति की जन्म दर में चौंकाने वाली गिरावट देखी, लेकिन चीन के आंकड़ों को छिपाने के चलते रिपोर्ट की तुलना में सच कहीं अधिक डरावना है। रिपोर्ट यह आह्वान भी करती है कि चीन, संयुक्त राष्ट्र से अधिकृत आयोग को शिनजियांग में जांच करने दे। होजा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चुप्पी तोडऩे की अपील करते हुए कहती हैं कि यह त्रासदी उइगर के लिए ही नहीं, समूची मानवता के लिए है। क्या कोका-कोला व ओलम्पिक खेलों के बाकी प्रायोजक ऐसा दिखावा करते रहेंगे कि यह सब नहीं हो रहा है? कोका-कोला के अधिकारी एक ओर न्याय और समानता के लिए आवाज उठाने वालों के साथ खड़े होने की बात कहते हैं, दूसरी ओर खेलों के आयोजन स्थल के चयन में प्रायोजकों का दखल न होने की दुहाई देते हैं।

रिपोर्ट कहती है, 'इन लोगों का भविष्य वैश्विक ताकतों की समन्वित और जल्द कार्रवाई पर निर्भर करता है।' अन्यथा हम यह कर सकते हैं कि जो कुछ हो रहा है, उस ओर से आंखें मूंद लें, एक कोक उठा लें और खेलों का लुत्फ उठाएं!

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