scriptWhat is the impact of expensive elections on democracy? | आपकी बात, खर्चीले चुनावों का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? | Patrika News

आपकी बात, खर्चीले चुनावों का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: January 20, 2022 06:15:38 pm

सरकारी खर्च पर हो चुनाव प्रचार
खर्चीले चुनाव के कारण गलत लोग भी चुनाव जीत जाते हैं, जो कि लोकतंत्र के लिए खतरा है। चुनावी खर्च सरकार को उठाना चाहिए। हर सक्षम उम्मीदवार के लिए एक तयशुदा रकम निर्धारित कर देना चाहिए।
-पी मोहन, भिलाई छत्तीसगढ़
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आपकी बात, खर्चीले चुनावों का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
आपकी बात, खर्चीले चुनावों का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
धन बल से प्रभावित चुनाव
चुनावों में धन के बढ़ते उपयोग से निर्वाचन प्रक्रिया में गरीबों के लिए अवसर कम हो जाते हैं। निष्पक्ष चुनाव मुश्किल हो गया है।
-श्रद्धा तलवाड़ीया, पचपहाड़, झालावाड़
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बढ़ता है भ्रष्टाचार
उम्मीदवार येन केन प्रकारेण चुनाव जीतने का मन बना लेता है, तो बहुत धन खर्च करता है और जीतने के बाद उस धन की भरपाई करने के लिए अवैध काम करता है। यही वजह है कि आज भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। मतदाता भी लोभ-लालच में आकर ईमानदार उम्मीदवार को हरा देता है।
-रामेश्वरलाल आमेटा, राजसमन्द
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प्रभावित होते हैं मतदाता
अत्यधिक खर्चीले चुनाव स्वच्छ तथा ईमानदार छवि के उम्मीदवारों के लिए भारी पड़ते हैं। चुनाव में अत्यधिक धन का व्यय मतदाताओं को प्रभावित करता है। धनबल के प्रभाव से विजयी उम्मीदवार पैसा बनाना शुरू कर देता है। इससे भ्रष्टाचार, महंगाई और भाई भतीजावाद जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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आम आदमी की हिम्मत पस्त
लोकतंत्र में आम आदमी चुनाव लड़ तो सकता है, लेकिन चुनाव इतने खर्चीले हो चुके हैं कि हर कोई चुनाव लडऩे की हिम्मत नहीं कर पाता। इससे आपराधिक छवि के लोग या धनाढ्य वर्ग ही चुनाव जीत पाते हैं।
-ललित पुनाडिया, रानी, पाली
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लोकतंत्र की खामी
अयोग्य उम्मीदवार भी अपने धन-बल के कारण चुनाव जीत जाते हैं। ऐसे व्यक्ति सरकार में शामिल हो जाते हैं। यह लोकतंत्र की खामी है।
-देव गुजराती, भीलवाडा
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लोकतंत्र के हित में नहीं
चुनाव में अनाप-शनाप का खर्च करना गलत है। खर्चीला प्रचार करके मतदाताओं को दिग्भ्रमित करना या मतदाताओं को लालच देना गलत है। मतदाताओं को निष्पक्ष रुप से जनप्रतिनिधि चुनने में मुश्किल होती है। अपने जनाधार को कमजोर देखते हुए चुनाव में उम्मीदवार अनाप-शनाप खर्च करते हैं। चुनाव में धन का खुला दुरुपयोग होता हैं। यह लोकतंत्र के हित में नहीं है।
-रेखा उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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नहीं होते विकास कार्य
खर्चीले चुनावों से उम्मीदवार चुनाव में खूब पैसा खर्च करता है और चुनाव जीतने के बाद वह खर्च किया पैसा कमाने में लग जाता है। विकास के कार्य नहीं करवाता, जिससे जनता की मुश्किलें बढ़ती हैं।
-मोहर सिंह सलावद, बीकानेर
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गलत हाथों में सरकार
कुछ उम्मीदवार धन और शक्ति के बल का प्रयोग कर मतदाताओं को अपने पक्ष में कर लेते हैं और चुनाव जीत जाते हैं। इससे गलत हाथों में सरकार चली जाती है और इस प्रकार देश का विकास नहीं हो पाता है।
-गोपाल रैकवार, मनेंद्रगढ़,कोरिया, छत्तीसगढ़
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खर्च में कमी हो
चुनाव सुधार की बातें तो जोर- शोर से होती हैं, मगर विशेष सुधार नहीं होता। यही कारण है भारत में चुनावी प्रक्रिया साल दर साल खर्चीली होती जा रही है। यह वाकई चिंताजनक है।
-साजिद अली इंदौर.
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बड़ी चुनौती
चुनावों में लगातार खर्चों में हो रही बढ़ोतरी राजनीतिक व्यवस्था में बड़ी चुनौती उभरकर सामने आ रही है। देश में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में योग्य व प्रतिभावन लोगों की सहभागिता कम हो रही है। यह लोकतंत्र शासन प्रणाली की मूल भावना के विपरीत है।
-संजीव कुमार मिश्रा, सांभर लेक, जयपुर
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धनबल और बाहुबल को मिल रहा प्रोत्साहन
खर्चीले चुनाव लोकतंत्र की मूल भावना तथा जड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। साथ ही ये लोकतंत्र में निहित समानता के सिद्धांत के साथ भी धोखा है क्योंकि आम जन चुनाव लडऩा चाहे तो धन के अभाव में उसे पीछे हटना पड़ता है। खर्चीले चुनाव धनबल व बाहुबल को प्रोत्साहन देते हैं।
-केशव शर्मा, श्रीमाधोपुर, सीकर

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