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आपकी बात : बीमारियों का बिगड़ते पर्यावरण से क्या संबंध है ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: April 06, 2022 05:03:51 pm

बीमारियों का मूल कारण खराब हवा

हमारा शरीर पंच महाभूतों से बना है, उनमें से एक हवा अर्थात पर्यावरण भी है। यदि पर्यावरण बिगड़ गया है तो ऑक्सीजन के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, हेवी मेटल्स के तत्व आदि हमारे शरीर में प्रवेश करेंगे और यह तत्व सांस, त्वचा, पेट, ब्लड प्रेशर, शुगर, कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देंगे। इसलिए बीमारियों का मूल कारण खराब हवा अर्थात बिगड़ा हुआ पर्यावरण है।
pollution and health
आपकी बात : बीमारियों का बिगड़ते पर्यावरण से क्या संबंध है ?
- जगदीश यादव, जोधपुर, राजस्थान

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जलवायु परिवर्तन के घातक असर

मनुष्य अगर पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाएगा, इससे वातावरण तो प्रभावित होगा ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचेगा। जलवायु परिवर्तन होने से नई बीमारियां उत्पन्न होंगी।
- शिवपाल सिंह, मेड़ता सिटी, राजस्थान

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संतुलित पर्यावरण जीवन का आधार

संतुलित पर्यावरण ही हमारे जीवन का आधार है, यदि वही स्वच्छ नहीं तो हम स्वस्थ कैसे रह सकते हैं। बढ़ते हुए जल, भूमि, वायु, ध्वनि प्रदूषण ने हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत प्रभावित किया है। संक्रामक बीमारियां हों चाहे क्रोनिक, सभी प्रदूषित पर्यावरण की देन हैं। बढ़ती औद्योगिक क्रान्ति ने सीओटू, एनओटू, सीएफसी, रेडियो विकिरण आदि को जन्म दिया है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हुई हैं। रासायनिक वेस्ट को व्यवस्थित किया जाना चाहिए और जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर, राजस्थान

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संतुलन बिगड़ रहा

पर्यावरण के साथ सही संपर्क नहीं बनाने के कारण ही प्रकृति अपना संतुलन कायम नहीं कर पा रही है। बीमारियों का बिगड़ते पर्यावरण से काफी गहरा संबंध है क्योंकि बीमारियों से निकले वायरस के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता है।
प्रदीप सिंह सोलंकी, कोटा राजस्थान

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जलजनित बीमारियों से परेशानी

पर्यावरण में प्रदूषण के कारण आक्सीजन की कमी, श्वांस रोगों से अधिकांश लोग परेशान हैं। पेयजल की शुद्धता भी प्रभावित हुई है, जिसके कारण अनेक जलजनित बीमारियों ने मानव स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल-मल की व्यवस्थित निकासी न होने से ग्रामीण अनेक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। पर्यावरण के प्रदूषित होने से प्राणी जगत में बहुत कुछ बदल चुका है।
हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश

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वायु प्रदूषण दे रहा बीमारियां

हाल में एक रिपोर्ट में डबल्यूएचओ ने बताया है कि देश की 99 प्रतिशत आबादी गंदी हवा में सांस ले रही है। धरती पर अधिकांश लोग वायु प्रदूषण में जी रहे हैं, जो बीमारी का मुख्य कारण है और यह पर्यावरण असंतुलन के कारण ही हो रहा है।
छाया जायसवाल, कोरबा, छत्तीसगढ़

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पर्यावरण बिगडऩे से श्वांस रोग, चर्म रोग तथा कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। ध्वनि, वायु व जल प्रदूषण हमारे पूरे स्वास्थ्य को खराब कर देता है। ज्यों-ज्यों पर्यावरण बिगड़ता रहेगा, मानव स्वास्थ्य भी बिगड़ता रहेगा।
- डॉ. माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, राजस्थान

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बीमारियां परोस रहा है प्रदूषण

पर्यावरण की अशुद्धता का प्रमुख कारण बढ़ता वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण है। वायु प्रदूषण लोगों की आयु घटने का भी एक बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। बीमारियों में 60 फीसदी हिस्सेदारी संक्रामक रोग, मातृ तथा नवजात रोग या पोषण की कमी से होने वाले रोगों की होती है। वहीं, अब हृदय तथा सांस की गंभीर बीमारियों के अलावा भी बहुत-सी बीमारियां वायु प्रदूषण के कारण ही पनपती हैं।
- खुशवन्त कुमार हिण्डोनिया, चित्तौडग़ढ़, राजस्थान

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सावधानियां जरूरी हैं

जलवायु परिवर्तन से अन-नीनो, सूखा, बाढ़, चक्रवात के साथ अनेक संक्रामक वायरस और रोगजनकों की उपस्थिति रोजाना मालूम हो रही हैं। इन बिगड़ी हुई परिस्थितियों मे विभिन्न बीमारियों के फैलने के तरीके भी निरंतर बदल रहे हैं। पर्यावरण के जहरीले स्तर का असर दमा/अस्थमा वाली बीमारी के मरीजों पर सबसे ज्यादा होता है। इन मरीजों में एलर्जी टेंडेंसी पहले से मौजूद होती है, जो बिगड़ी हुई स्थितियों में कंजेशन और म्यूकस पैदा करती हैं, जो बेहद खतरनाक और परेशान करने वाले संकेत माने जाते हैं। बिगड़ते पर्यावरण मे स्वास्थ्य संबंधी - सावधानियां लेते हुए, घरों से बाहर निकलने पर सबके लिए हमेशा मास्क का उपयोग, बीमारियों से बचाव का कारगर हथियार साबित हो सकता है।
- नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश

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बीमारियों को बढ़ावा

पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है। प्रदूषण स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ आबोहवा जरूरी है।
साजिद अली, इंदौर, मध्यप्रदेश

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घातक बीमारियों की वजह है प्रदूषण

वर्तमान समय में बढ़ता वायु प्रदूषण कैंसर जैसी भयावह बीमारियों का कारण बन रहा है। दिल्ली जैसे शहरों मे लोगो की औसत आयु कम हो रही है। बढ़ता जल प्रदूषण किडनी फेल्योर का कारण है। धारणीय विकास लक्ष्यों को अपनाकर इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
विनायक गोयल, रतलाम, मध्यप्रदेश

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जरूरी है पर्यावरण सरंक्षण

दिन-ब-दिन वायु काफी दूषित हो रही है, जो हमारी सेहत को काफी नुकसान पहुंचा रही है। आसपास की हवा पूरी तरह से प्रदूषित है, जो श्वांस संबंधित बीमारियां जैसे अस्थमा आदि के होने की संभावना बढ़ा रही है। हवा में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड जहर की तरह है। साथ ही, पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग कैंसर, मलेरिया, पेट संबंधित बीमारी और सांस लेने में समस्या जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इससे बचने के लिए घर की खाली जमीन, बालकनी, छत पर पौधे लगाएं, ऑर्गेनिक खाद, गोबर खाद या जैविक खाद का उपयोग करें, कपड़े के बने झोले-थैले लेकर निकलें, पॉलीथिन-प्लास्टिक न लें साथ ही अपने आस-पास की जगह स्वच्छ रखें।
- नरेंद्र रलिया, जोधपुर, राजस्थान

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स्वच्छता में ही स्वास्थ्य

हमारे आसपास लगे कचरे के ढेर और गंदगी, इधर-उधर बिखरे हुए प्लास्टिक और पॉलीथिन के कारण हमारा पर्यावरण और वातावरण प्रदूषित होता जा रहा है। इससे श्वांस संबंधित बीमारियां, पेट और अपच जैसे रोग बढ़ते जा रहे हैं। यदि हम इसी प्रकार प्रकृति और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करते रहे तो जल्द ही हमारा जीवन विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों से भर जाएगा। आवश्यकता है कि पर्यावरण और वातावरण को प्रदूषित होने से बचाएं, जिससे हमारा जीवन सुरक्षित और निरोग रहे।
नीलिमा जैन, उदयपुर, राजस्थान

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जलस्रोत रहें स्वच्छ

बीमारियों का पर्यावरण से सीधा संबंध है। पहले 100 वर्ष की उम्र वाले भारतीय नागरिकों को कोई ज्यादा बीमारियां नहीं होती थी और अब अल्प आयु में भी गंभीर बीमारियां होने लगी हंै। त्वचा, एलर्जी, सांस आदि से संबंधित बीमारियों का पर्यावरण से सीधा रिश्ता है। दूषित जल, यातायात व औद्योगिक प्रदूषण से कई तरह की बीमारियों का जन्म हुआ है। हमें अपने प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी लेनी होगी और वाहन, एसी तथा अन्य प्रदूषण के स्रोतों पर भी कठोरता से लगाम लगानी होगी। तभी देश के नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा सकेगा। हमें पर्यावरण के लिए पौधारोपण, संरक्षण और विद्यमान पेड़ों का संरक्षण सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना होगा पेड़ों की कटाई की लड़ाई निजी रूप से भी लडऩी होगी और प्लास्टिक, पॉलीथिन का प्रयोग बंद करना होगा, तभी जाकर भारतीय नागरिकों को प्रदूषण जनित बीमारियों से राहत मिल सकती है।
सुमन कागरेचा, राजसमंद, राजस्थान

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प्रदूषित पर्यावरण से बढ़े रोग

पर्यावरण प्रदूषण से दिनोंदिन रोगों के संक्रमण में वृद्धि हो रही है। इससे बीमारियों की संख्या बढ़ रही है। पर्यावरण संरक्षण ही प्रकृति के साथ बीमारियों का उपचार है।
चंचल सोढ़ा, बाड़मेर, राजस्थान

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पर्यावरण से जुड़ा है सबकुछ

बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते औद्योगिकरण की वजह से शुद्ध हवा में कमी हुइ है, जिससे अस्थमा, सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारी के होने का खतरा बढ़ रहा है। पेड़ों की कटाई और नदियों, तालाब और जलाशयों के तेजी से सूखने पर शुद्ध पीने के पानी में भारी गिरावट आई और भू-जल स्तर भी कम हुआ। लोगों के दूषित पानी पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश कम हो गई है, जिससे खाने-पीने की चीजों को उगाने के लिए बढ़े स्तर पर केमिकल्स का उपयोग होने लगा है, जो कि गंभीर बीमारियों का खतरा बनती हैं।
धनराज चौधरी, बीकानेर, राजस्थान

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भौतिकतावादी सोच जिम्मेदार

लोगों की भौतिकतावादी प्रवृत्ति के कारण प्राकृतिक पर्यावरण के साथ खिलवाड़ से पर्यावरण असंतुलित होता है। इससे नई-नई बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।
सुमित्रा गिला, नोखा, राजस्थान

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