आपकी बात, कोरोना के कारण अनाथ हो रहे बच्चों के लिए क्या किया जाना चाहिए ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 02 May 2021, 03:54 PM IST

सरकार जिम्मेदारी उठाए
कोरोना की इस महामारी में सैकड़ों परिवार उजड़ गए हैं। माता-पिता दोनों के चले जाने से बच्चे अनाथ हो गए हैं। जो बच्चे छोटे हैं, उन्हें अनाथ आश्रम में रखा जा सकता है। ऐसे बच्चे जो शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उन्हें सरकारी छात्रावासों में प्राथमिकता देते हुए प्रवेश दें और उनकी सारी शिक्षा नि:शुल्क हो। डिप्लोमा, तकनीकी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण में कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों का अलग से रिजर्व कोटा बनाया जाए। युवा होने पर उन्हें सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दी जाए। इन बच्चों के लिए सरकार अलग से फंड बनाए। जब तक बच्चे आत्मनिर्भर नहीं हो जाते, तब तक सरकार इनकी जिम्मेदारी उठाए। इस पुनीत कार्य में आम जनता भी सरकार का सहयोग करे।
-अनिता शिंदे, चितौडग़ढ़
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पुनर्वास की व्यवस्था की जाए
अनाथ बच्चे अक्सर अपराध की राह पर चले जाते हैं अथवा आपराधिक गैंग इन बच्चों से भीख मंगवाने एवं चोरी करवाने लगते हैं। अत: कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को गंवा चुके बच्चों के पुनर्वास की जिम्मेदारी हम सबकी है। हरेक राज्य में बाल कल्याण समिति, बाल देख-रेख संस्था जैसी कई संस्थाएं हैं। बच्चों को इन संस्थाओं के हवाले कर देना चाहिए, जहां इनके पालन-पोषण के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी शिक्षा की भी उचित व्यवस्था हो सकती है। बच्चों का मन कोमल होता है। विपरीत परिस्थितियों की बुरी छाप मन-मस्तिष्क पर न रहे, इसलिए उनकी काउंसिलिंग कराना भी बहुत जरूरी है। धनाढ्य परिवारों को आगे बढ़कर इन बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ले लेनी चाहिए। नि:संतान दम्पती कानूनी रूप से गोद लेकर बच्चों का भविष्य संवार सकते हैं।
-विभा गुप्ता, बैंगलूरु
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आवासीय विद्यालय बनाए जाएं
कोरोना के कारण अनाथ हो रहे बच्चों के लिए केंद्र और प्रदेश की सरकारों को एक निधि बनानी चाहिए। अनाथ बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय-महाविद्यालय की स्थापना करने की जरूरत है, जिसमें केवल अनाथ हुए बच्चों के लिए ही व्यवस्था का प्रबंधन हो। इस व्यवस्था के प्रारंभ होने के उपरांत बहुत सारी स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सहायता की उम्मीद की जा सकती है।
-डा.अशोक, पटना, बिहार
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सभी मदद करें
कोरोना के संक्रमण के कारण कई परिवार तबाह हो चुके हैं। अपने परिवारजनों की मृत्यु से कई बच्चे अनाथ हो चुके हैं। अब उन्हें सहारे की जरूरत है। इसलिए सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आकर इन बच्चों की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उनके आवास, भोजन, शिक्षा एवं चिकित्सा की व्यवस्था करनी होगी। इस संकट के समय में हम सबको मिलकर अनाथ बच्चों की मदद करनी चाहिए
-शुभम वैष्णव ,सवाईमाधोपुर
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पुनर्वास की जरूरत
कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को संभालने के लिए सरकार, प्रशासन और भामाशाहों को आगे आना चाहिए। इन बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था की जानी चाहिए। ऐसे बच्चों के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ऐसे बच्चों को सूचीबद्ध करते हुए सरकारी लाभ पहुंचाने की व्यवस्था करे।
-कुलदीप सिंह भाटी, जोधपुर
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समाज और सरकार बने सहारा
कोरोना महामारी ने बहुत सारे बच्चों के ऊपर से मां-बाप का साया उठा दिया है। हंसते-मुस्कुराते इन मासूम चेहरों पर आज उदासी की परत चढ़ गई है। हमारी सरकार को विभिन्न गैर सरकारी संगठनों एवं समाजसेवियों के साथ तालमेल बैठा कर ऐसे बच्चों का जीवन संवारने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्हें आवास, शिक्षा एवं उचित पोषण मुहैया कराना सरकार एवं समाज की एक नैतिक जिम्मेदारी है। ये भी अन्य बच्चों की तरह हमारे देश का भविष्य हैं। हम सबको ऐसे मासूमों की हर संभव मदद करनी चाहिए।
-अरविंद शर्मा, भागीना, झुंझुनूं
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बाल गृहों की व्यवस्था सुधारी जाए
बच्चे किसी भी राष्ट्र की धरोहर होते हैं। जिन बच्चों के माता-पिता नहीं रहे, उनकी सलामती की जिम्मेदारी समाज और सरकार की है। इन बच्चों को अच्छी चिकित्सा और शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। गोद लेने के कानून में भी आवश्यक सुधार हो। सरकार, एनजीओ एवं समाजों द्वारा संचालित बाल गृहों की व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
-गिरीश कुमार जैन, इंदौर
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सामाजिक संगठन भी आगे आएं
महामारी के इस दौर में हमें मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा। अनाथ होने वाले बच्चों के लिए सरकारी तंत्र के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए। अनाथ बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाए। इनके सुनहरे भविष्य के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए, ताकि ये भी अपने पैरों पर खड़ा होने में सक्षम हो सकें ।
-सुनीता सांडेला, सरदारशहर
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बाल संरक्षण आयोग ले जिम्मा
कोरोना महामारी ने कई परिवारों के बच्चों का सहारा छीन लिया है। ऐसे हालात बच्चों को कमजोर कर देते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे बच्चों को संभालने के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग को आगे आना चाहिए। बच्चे दूसरों पर निर्भर होते हैं। इनके लिए दवाई, भोजन, आश्रय, कपड़े आदि की व्यवस्था की जाए।
-सी.पी. गोदारा, ओसियां, जोधपुर
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लेनी होगी शासन को जिम्मेदारी
कोरोना हर दिन कई लोगों की मृत्यु का कारण बन रहा है। बडी संख्या में ऐसे युवा भी इसके शिकार बन रहे हैं, जिन पर उनका परिवार आश्रित था। अत: शासन को इनके बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी लेनी होगी। शासन को बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना चाहिए एवं परिवार को पेंशन, मानदेय या रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए । जिन बच्चों के परिजन नहीं रहे, उन्हें संभालने की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
-रजनीश मिश्रा, सागर, मप्र
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गोद लेने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए
कोरोना के कारण अनाथ होने वाले बच्चों को तेजी से गोद दिया जाना चाहिए, जिससे बच्चों बच्चों का पालन पोषण ठीक तरह से हो सके। अगर सरकार के भरोसे रहेंगे तो काफी समय निकल जाएगा और तब तक बच्चे बड़ी मुसीबत में फंस जाएंगे।
-डॉ. हितेष पंचाल, डूंगरा छोटा, बांसवाड़ा
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बच्चों को गोद ले सकते हैं नि:संतान दंपती
कोरोना महामारी के कारण हमारे देश में कई परिवार तबाह हो गए हैं। कहीं किसी के पिता, तो कहीं मां की मौत ने पूरे परिवार को हिला के रख दिया है। अनेक ऐसे परिवार भी है, जहां बच्चों के सिर से उनके मां-बाप का साया उठ गया है और वे अनाथ हो गए हंै। इन बच्चों की जिम्मेदारी उठाना सरकार और समाज दोनों का कर्तव्य हैं। सरकार को अलग से इन बच्चों के लिए एक संस्था का निर्माण करना चाहिए, जहां उनकी सभी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही उनकी शिक्षा व्यवस्था का उचित प्रबंध किया जाए। नि:संतान दंपती भी इन बच्चों को गोद ले सकते हैं।
-नीलिमा जैन, उदयपुर
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गोद दिए जा सकते हैं बच्चे
कोरोना के कारण अनाथ हो रहे बच्चों का ही सवाल नहीं है। सवाल है सभी अनाथ बच्चों का। सरकार को अनाथ बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था में सुधार करनी चाहिए। आज भी ऐसे परिवार बड़ी संख्या में हैं, जिनके लिए बच्चा एक सपना बना हुआ है। ऐसे परिवार बच्चे को गोद ले सकते हैं।
-श्याम सुंदर, बीकानेर
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कैलाश सत्यार्थी की तरह आगे आएं
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों को संभालने का बीड़ा उठाया है। इसी तरह दूसरे लोगों को भी आगे आना चाहिए। धनाढ्य वर्ग ऐसे कार्यों के लिए धन दे सकता है।
-हेमा हरि उपाध्याय, अक्षत खाचरोद, उज्जैन
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बच्चों की परवरिश का इंतजाम हो
आज कोरोना के कारण लाखों परिवार उजड़ रहे हैं। कई बच्चों के सिर से उनके मां-बाप का साया उठ गया और ना जाने कितने और बच्चे अनाथ होंगे। उनकी पढ़ाई-लिखाई उनकी परवरिश और उनके भविष्य का क्या होगा, ये किसी को नहीं पता। कोरोना से अनाथ होने वाले बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनकी परवरिश की व्यवस्था की जाए, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।।
-भारत नागर, बारां
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बच्चों को शिक्षित और संस्कारित किया जाए
कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी संबंधित सरकार के साथ समाज की भी है। उनकी परवरिश ठीक तरह से होनी चाहिए, ताकि वे संस्कारित और समाजोपयोगी नागरिक बन सकें। उनके लिए भोजन, शिक्षा व रहने की व्यवस्था की जाए। तदनंतर नई शिक्षा नीति के तहत उनकी योग्यता व झुकाव के अनुसार रोजगार की व्यवस्था भी की जाय।
-जी.डी. वैष्णव, सौभाग्य नगर, भोपाल
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उपयोगी है पालनहार योजना
पालनहार योजनान्तर्गत ऐसे अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि के लिए पालनहार को अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे अनाथ बच्चों को 2 वर्ष की आयु में आंगनबाड़ी केन्द्र पर तथा 6 वर्ष की आयु में स्कूल भेजना अनिवार्य है। प्रत्येक अनाथ बच्चे के लिए पालनहार परिवार को 5 वर्ष की आयु तक के बच्चे के लिए 500 रुपए प्रतिमाह की दर से तथा स्कूल में प्रवेशित होने के बाद 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक 1000 रुपए प्रतिमाह की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त वस्त्र, जूते, स्वेटर एवं अन्य आवश्यक कार्य के लिए 2000 रुपए प्रति वर्ष प्रति अनाथ की दर से वार्षिक अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है। पालनहार परिवार को उक्त अनुदान आवेदन करने पर शहरी क्षेत्र में विभागीय जिला अधिकारी एवं ग्रामीण क्षेत्र में सम्बन्धित विकास अधिकारी स्वीकृत करता है।
पलक जैन, भोपाल, मप्र
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सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाए
कोरोना की महामारी प्राकृतिक आपदा है। इससे कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं। कई बच्चे अनाथ हो चुके हैं। ऐसे में एक मात्र उपाय यही बचता है कि उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। इसके लिए सरकार को सामाजिक संगठनों का सहयोग लेना चाहिए ।
-हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्य प्रदेश
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आश्रय गृह खोले जाएं
कोरोना के कारण अनाथ हो रहे बच्चों के लिए सभी राज्य सरकारों को ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर व नगरीय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर आश्रय गृह की व्यवस्था करनी चाहिए। इन आश्रय स्थलों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत में सरपंच व वार्डो में पार्षदों को दी जाना चाहिए, जो समय-समय पर आश्रय गृह का औचक निरीक्षण करें और जो भी कमी हो उसे पूरा करवाएं। आश्रय गृह में बच्चों के देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था की जाए। बच्चों को मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए जाएं। बच्चों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण हो। एक हेल्पलाइन नंबर भी होना चाहिए, जिसमें कोई भी व्यक्ति अनाथ बच्चों की जानकारी दे सके और उन्हें आश्रय गृह में रखा जा सके।
- आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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सक्षम लोग लें जिम्मेदारी
अनाथ बच्चों के लिए सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए और उनके लिए रहने, खाने-पीने, शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था करनी चाहिए। समाज में ऐसे कई उदार लोग मिल जाएंगे, जो यह काम करने के लिए तैयार होंगे। जरूरत सिर्फ उनको विश्वास में लेने की है।
-इंदर सिंह पुरोहित, बीकानेर
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सभी की जिम्मेदारी
महामारी के कारण माता-पिता का निधन हो जाने से कुछ बालक और किशोर अनाथ हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में शासन और प्रशासन के साथ भारत के समस्त नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे बालको और किशोरों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं दैनिक जीवन की मूलभूत जरूरतों का ध्यान रखे। बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
-भारत भूषण झा, सोंध, दतिया, मध्यप्रदेश

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