आपकी बात, बंगाल नतीजों का राष्ट्रीय स्तर पर क्या असर होगा ?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 03 May 2021, 04:51 PM IST

क्षेत्रीय दलों का प्रभाव सीमित
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जीत से देश मे क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा बढ़ेगा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई असर नहीं दिखेगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन दलों का एकजुट होना मुश्किल है। द्रमुक, अन्नाद्रमुक, सपा, शिवसेना, राजद, अकाली दल जैसे दलों का एक साथ आना मुश्किल है। इन क्षेत्रीय दलों के नेताओं का प्रभाव अपने-अपने राज्यों तक सीमित है। कांग्रेस का लगातार खराब प्रदर्शन देश की राजनीति के लिए बड़ा नुकसान है।
-माणक सालेचा, सूरत
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ममता बनर्जी का कद बढ़ा
प. बंगाल में ममता बनर्जी के साथ कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम थी। ममता बनर्जी स्थानीय चेहरा भी थी। 10 साल से वे सत्ता में थीं। भाजपा ने आयातित उम्मीदवारों के आधार पर चुनाव लड़ा। सत्ता में आने के लिए जमीनी आधार जरूरी है। जाहिर है कि अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में ममता बनर्जी का कद बढ़ जाएगा।
-रवि प्रकाश सैनी, नवलगढ़, झुंझुनूं
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प्रधानमंत्री पद की दावेदारी
शिखर पर पहुंचना संयोग हो सकता है, किंतु लंबे समय तक वहां टिके रहना योग्यता को प्रदर्शित करता है। ममता बनर्जी पर यह बात लागू होती है। अब राष्ट्रीय स्तर पर दीदी का प्रभाव बढ़ेगा। आगामी लोकसभा चुनाव में वह प्रधानमंत्री की दावेदारी भी पेश कर सकती हैं।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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भाजपा की बढ़ गई सीटें
पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने केवल 3 सीटें हासिल की थी। अब यह आंकड़ा 78 पर पहुंच गया है। साथ ही ममता बनर्जी को उन्हीं के किले नंदीग्राम में भाजपा के उम्मीदवार ने हराया। यह भाजपा के लिए एक शुभ संकेत है। भाजपा को यहां की जनता से जमीनी तौर पर जुडऩा होगा। इन चुनावों का दिल्ली की राजनीति पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि भाजपा के घोड़े को कहीं ना कहीं किसी ना किसी को तो रोकना ही था।
-अलका सोनी, बर्नपुर, पश्चिम बंगाल
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राष्ट्रीय स्तर पर खास प्रभाव नहीं
बंगाल के चुनाव परिणामों का राष्ट्रीय स्तर पर खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि राज्यस्तरीय चुनाव में जनता राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं बल्कि राज्य स्तरीय मुद्दों पर वोट करती है। बंगाल में तो वैसे भी भाजपा का जनाधार नहीं था और न ही कोई ऐसा नेता था जो पूरे राज्य का नेतृत्व कर सके। अधिकांश नेता तो टीएमसी से आए हुए थे। जब हम बंगाल के चुनाव को देखते हैं, तो असम के परिणाम को भी देखना चाहिए। असम सीसीए के विरोध का केंद्र बिंदु था, फिर भी चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आए। इसलिए किसी एक राज्य के चुनाव परिणाम के आधार पर राष्ट्रीय स्तर का आकलन करना गलत है।
-भारत नागर, बारां
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भाजपा की छवि धूमिल
पश्चिम बंगाल की जनता ने एक बार फिर से ममता बनर्जी को सत्ता सौंप दी है और भाजपा सहित अन्य पार्टियों के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है। साथ ही इस हार के कारण भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर छवि धूमिल हो जाएगी। अकेली भाजपा ही नहीं, बंगाल में जिन पार्टियों का सूपड़ा साफ हो गया है, उन पार्टियों को भी सोचने की जरूरत है।
-पंकज कुमावत, जयपुर
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झांसे में नहीं आई जनता
बंगाल के चुनाव परिणाम का राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के लिए नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बंगाल में दलबदलू नेताओं को जनता ने अच्छी मार लगाई है। बाहरी लोगों का हुजूम दिखाकर माहौल तो बनाया गया, लेकिन लोग झांसे में नहीं आए। उत्तर प्रदेश के चुनाव में अब भाजपा की राह आसान नहीं होगी। वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव अब शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर केंद्रित होने चाहिए। नफरत की राजनीति से बहुत नुकसान हो चुका।
-विनोद यादव, हनुमानगढ़ जंक्शन
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मजबूत नेता के रूप में उभरेंगी ममता बनर्जी
बंगाल के नतीजों से राष्ट्रीय राजनीति भी स्वाभाविक रूप से प्रभावित होगी। ममता बनर्जी ने शानदार जीत हासिल कर अपने आपको एक मजबूत नेता साबित किया है। वैसे भी संसद मे तृणमूल कांग्रेस ही सरकार की नीतियों के खिलाफ सर्वाधिक मुखर रहती है। ऐसे में विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस का कद छोटा होगा और भविष्य में केन्द्रीय स्तर पर भी विपक्षी राजनीति के केन्द्र बिन्दु में ममता बनर्जी रहेंगी। .
---कमलेश कुमार कुमावत, चौमू, जयपुर
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विपक्ष होगा मजबूत
भारत जैसे लोकतंत्रात्मक प्रणाली वाले देश में सत्ता पक्ष पर अंकुश रखने के लिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी होता है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर निर्वाचित सरकार अपने आपको सर्वेसर्वा न समझ बैठे। विपक्ष की भूमिका उस महावत की तरह होती है, जो मदमस्त चल रहे हाथी को अंकुश लगाते हुए सही रास्ते पर रखता है। वर्तमान में कांग्रेस मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रही है। अंत: क्षत्रपों का राजनीति में उभरना संघीय ढांचे के लिए अच्छा संकेत कहा जा सकता है।
-सी.पी.गोदारा, ओसियां, जोधपुर
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राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा असर
बंगाल के नतीजों का राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा। ममता बनर्जी केंद्रीय स्तर पर भी विपक्षी राजनीति का केंद्र बिन्दु बन सकती हैं। दूसरी ओर भाजपा के लिए भी संकेत है कि उसे विकास के मुद्दों को लेकर भी जनता के बीच में जाना होगा। जमीनी स्तर पर कार्य भी करना होगा और अपने संगठन को मजबूत करना होगा।
-कृष्ण कांत माली, छोटी सादड़ी
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क्षेत्रीय दलों को मिलेगी मजबूती
एक क्षेत्रीय दल ने एक राष्ट्रीय दल की कड़ी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इससे क्षेत्रीय दलों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे और ज्यादा सशक्त बनने के प्रयास करेंगे।
-शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर
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राजनीतिक दलों को जनता के लिए काम करना होगा
बंगाल के नतीजों से राष्ट्रीय स्तर पर यह असर होगा कि केवल मुद्दों पर चर्चा करने, सिर्फ चुनावी अखाड़े लगाने, चुनावी घोषणाएं करने और चुनावी माहौल बनाने से वोट नहीं मिलेंगे। धरातल पर रहकर जनता के लिए काम करने से वोट मिलेगा। सभी पार्टियों को जमीनी हकीकत देखकर काम करना होगा।
-नरेन्द्र भूषण सिंह, जयपुर
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भाजपा मजबूत होगी
बंगाल चुनाव परिणाम के पश्चात संसद में विपक्ष की एकता बढ़ सकती है। नतीजों से स्पष्ट हो गया कि देश में कांग्रेस और कम्युनिस्टों का सफाया नजदीक ही है। भविष्य में राज्यसभा में भाजपा मजबूत हो सकती है।
-प्रहलाद यादव, महू, मध्य प्रदेश
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एकजुट होगा विपक्ष
पश्चिम बंगाल के चुनावों ने राष्ट्रीय राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। ऐसी अप्रत्याशित हार के लिए कभी भी भाजपा ने नहीं सोचा होगा। वास्तव में यह भाजपा के बड़बोडेपन की हार है। बंगाल की आम जनता की जीत ने यह साबित कर दिया है कि भय, नफरत और धार्मिक उन्माद फैलाकर हर चुनाव नहीं जीता जा सकता है। चुनाव जीतने के लिए धनबल और प्रशासन को भले ही झोंक दिया जाए, लेकिन जनता ही जनार्दन होती है। इस जीत ने राष्ट्रीय राजनीति में मूल परिवर्तन यही होगा कि विपक्ष अब एकजुट होकर आने वाले 2024 के चुनावों में भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनेगा।
-मुकेश कुमार व्यास, गांधीनगर, गुजरात
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भाजपा के लिए चेतावनी
बंगाल के नतीजों का राष्ट्रीय राजनीति पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं होगा, क्योंकि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में है और दूसरा राष्ट्रीय दल कांग्रेस बंगाल में बुरी तरह से विफल रहा। बंगाल को भविष्य भांपने वाला राज्य माना जाए, तो भाजपा नेताओं के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट, आइटी सेल व न्यूज चैनल के दम पर जनता को ज्यादा दिनों तक भ्रमित नहीं किया जा सकता। राष्ट्रवाद, हिंदुत्व जैसे मुद्दों से कुछ समय तक ही भावनाओं को पक्ष में किया जा सकता है।
-गिरीश कुमार जैन, इंदौर

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