scriptwhen will there be a concern to raise roadways from deep losses? | प्रसंगवश: आखिर कब होगी रोडवेज को घाटे से उबारने की चिंता? | Patrika News

प्रसंगवश: आखिर कब होगी रोडवेज को घाटे से उबारने की चिंता?

लाइसेंस लेने के बाद मनमानी ढुलाई पर कैसे अंकुश लग पाएगा इसकी विभाग के पास कोई तैयारी नहीं है

Published: August 03, 2022 09:00:30 pm

सरकार चाहे तो कानून-कायदों को ताक पर रखकर वह सब किया जा सकता है जो अब तक अवैध की श्रेणी में आता था। अब तक निजी बसों को रोडवेज बस स्टैंड से रवाना करने का विरोध कर रहे परिवहन विभाग ने जिला परिवहन अधिकारी को जिला बस अड्डा प्रबंधक बनाने के साथ ही अब इन बसों को खुद के बस अड्डों से ही चलाने की तैयारी कर ली है। वह भी ऐसे समय में, जब रोडवेज पिछले तीन साल के दौरान 549 करोड़ रुपए का घाटा उठा चुका है। सरकार बार-बार यह सफाई भी देती रहती है कि रोडवेज के घाटे में रहने का बड़ा कारण पथ परिवहन निगम के वाहनों के समानांतर निजी बसों का प्रतिस्पर्धात्मक संचालन भी है। रोडवेज बसों की क्या हालत है यह भी किसी से छिपी नहीं। निजी परिवहन की अपेक्षाकृत ठीक-ठाक बसों के आगे ये बसें पहले ही सफर के मामले में कम सुविधाजनक रहती आई हैं। ऐसे में जब रोडवेज की बसों के साथ-साथ निजी बसें भी एक ही बस अड्डे से रवाना होने लगेंगी तो यात्री किन बसों को तरजीह देंगे, यह स्वत: ही समझा जा सकता है।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
रोडवेज बसों की ओर से तय किए गए रूटों पर अवैध बसों का संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा। इस साल जनवरी के अंत तक रोडवेज प्रबंधन को चार सौ से ज्यादा शिकायतें इस बाबत मिली थीं। शिकायतों के बाद जुर्माना वसूली की कार्रवाई भी हुई, पर रोडवेज अफसर इन बसों को बंद करने में लाचारी जताने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। बस संचालकों के राजनीतिक रसूखात भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। अब तो एक कदम और बढ़कर परिवहन विभाग ने बसों में माल ढुलाई करने की इजाजत भी दे दी है। यह बात और है कि बस संचालकों को इसके लिए लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस लेने के बाद मनमानी ढुलाई पर कैसे अंकुश लग पाएगा, इसकी विभाग के पास कोई तैयारी नहीं है। तभी तो यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का जमकर उल्लंघन होने की आशंका बढ़ गई है। परिवहन विभाग साल-दर-साल रोडवेज के अफसरों को घाटे के कारण गिनाते हुए परिपत्र जारी कर खानापूर्ति करता रहा है। परिपत्र में बिना परमिट के बसों के संचालन तथा निगम की बसों के आगे-आगे निजी बसों के संचालित होने से राजस्व के नुकसान की दुहाई दी जाती है। अब सरकार इन्हीं कारणों को दरकिनार कर लीपापोती के नए बहाने तलाशने लगे तो कोई अचरज नहीं। (ह.पा.)

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