सवाल क्या कोरोना से लड़ाई में लापरवाह हैं सरकार और नेता, जवाब कोई ठोस नीति नहीं

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि क्या कोरोना से लड़ाई में सरकार और नेता लापरवाह हैं? पाठकों के मिले जुले जवाब आए। पेश हैं कुछ चुनिंदा जवाब

By: shailendra tiwari

Updated: 04 Sep 2020, 06:21 PM IST

कोई ठोस नीति नहीं है
कोरोना ने देश भर में अपना तांडव मचा रखा है, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस नीति अभी तक नहीं बनी हैं। कोरोना का जहां एक ओर आतंक मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर हर मृतक को सरकार कोरोना पॉजिटिव बताकर जनता-जनार्दन को डरा रही है। सवाल यह है कि जब मृतकों की संख्या व कोरोना पॉजिटिव के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही हैं, तो फिर सरकार क्यों नहीं लॉकडाउन लगाती है? हमारे नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए केवल सरकार के गलत कदम का भी हां में हां मिलाकर समर्थन कर रहे हैं। कोरोना के मरीजों को घर में ही अलग से कमरे में रहने के लिए पाबंद किया जा रहा है, लेकिन दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं है। फिर भला दवाएं कहां जाती हैं? हर घर में होम आइसोलेशन की सुविधाएं कहां हैं? ऐसे में कोरोना संक्रमण का बढना स्वाभाविक ही हैं।
सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
......................

लापरवाह सरकार और नेता
कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या से स्पष्ट है की सरकार और नेता लापरवाह हैं। यदि वे अपना निजी स्वार्थ त्याग जनता की सेवा में लगे होते, तो आज हम कोरोना की इतनी भयावह स्थिति में नहीं होते। सरकार में शामिल नेता सत्ता पर कब्जा जमाए रखने और अपना गुणगान करवाने में व्यस्त हैं। नेता कोरोना के इस दौर में भी सभाएं, रैलियां और प्रदर्शन कर रहे हैं। बेवजह की इस भीड़ से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यही वजह है कि कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। इनकी लापरवाही की सजा आम जनता भुगत रही है।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर, मप्र
...........

इसलिए बिगड़े हालात
कोरोना माहमारी विश्वभर में कहर ढा रही है। कुछ देश इस महामारी पर काबू पा चुके हैं। विशेषकर चीन, जहां से यह बीमारी विश्वभर में फैली है, आज करीब-करीब इस बीमारी से मुक्त हो चुका हैं। एक हमारा देश है, जहां कोरोना बहुत तेज गति से पैर फैला रहा है। वर्तमान में इसके कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, तो इसका कारण सरकारों और नेताओं की लापरवाही ही है। आए दिन समाचार पत्रों में इस बाबद फोटो व समाचार प्रकाशित होते हैं, पर नेताओं के कानों पर जूं नही रेंगती। नतीजन इन्हें देखकर जनता भी लापरवाह हो चुकी है। कोरोना की रोक थाम के नियम अब सिर्फ जुर्माने तक ही सीमित हो गए हैं, जिसका फायदा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी बखूबी उठा रहे हैं। नेता कुर्सी पाने और बचाने के खेल में व्यस्त हैं। इसलिए महामारी बहुत तेजी से फैल रही है।
-विनोद कटारिया, रतलाम
.................

केंद्र और राज्य सरकारें
कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। इसकी एक वजह केंद्र और राज्य सरकारें हैं, जिन्होंने निर्देश तो जारी कर दिए हैं। नेता दिए गए निर्देशों का पालन न कर भीड़ जुटाकर अपने राजनीतक उद्देश्यों की पूर्ति करने में लग जाते हैं। यह दृश्य आम जनता देखती है और वह भी लापरवाह हो जाती है। बाजारों में ग्राहकों और दुकानदारों से गाइडलानइ की पालना नहीं करवाई जा रही है। कोरोना योद्धाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। सरकारें जिला स्तर पर समृद्ध शासकीय चिकित्सालय की व्यवस्था तक नहीं कर पाई हैं।
-भगवती प्रसाद गेहलोत, मंदसौर, मप्र
.......................

आम जन भी जिम्मेदारी समझे
सरकार ने कोरोना का संक्रमण रोकने के पूरे प्रयास किए और अब भी कर रही है। अगर सरकार प्रयास नहीं करती, तो हालात बहुत खराब होते। कोरोना की लड़ाई केवल सरकार की नहीं है, बल्कि हम सबकी भी है। हम सब भी लापरवाही नहीं करें। जब भी बाहर जाएं, तो मास्क लगाकर जाना चाहिए। सोशल डिस्टेन्सिंग की पालना करनी चाहिए । जब तक वैक्सीन बाजार में नही आ जाता, तब तक कोरोना से बचाव ही इसका इलाज है।
-कार्तिक शर्मा, नीमकाथाना,सीकर
......................

सामूहिक प्रयास जरूरी
कोरोना से लड़ाई में सक्रियता को मापना काफी मुश्किल है। ये कोई दिखने वाला शत्रु तो है नहीं, पर इस महामारी को हम मिल कर हरा सकते हैं। हमारे प्रयास सामूहिक हों। हम राजनीति, नेताओं की कारगुजारियों, धर्म, वर्ग,वर्ण, आदि के झंझट में फंसने से बचें।
-सोनाली शर्मा, रामगंजमंडी, कोटा
.................

आमजन की बड़ी भूमिका
कोविड-19 के खिलाफ चल रही लड़ाई में सबसे बड़ी भूमिगा आमजन की है। इसलिए हम कोविड-19 की लड़ाई के मामले में सरकार और नेताओं को लापरवाह नहीं बता सकते। जब आमजन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा, तो नेताओं और सरकार को इसके लिए कुछ बंदोबस्त करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
-महेंद्र कुमार सैनी, छापोली, झुंझुनू
.........................

कई अहम फैसले लिए
कोविड-19 के कारण आज पूरी दुनिया अस्त-व्यस्त है। इस महामारी से निपटने के लिए भारत सरकार ने भी कई अहम फैसले लिए हैं। इसके बावजूद देश में तेजी से यह बीमारी फैल रही है। कोरोना योद्धा अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे है। हमें सभी की सराहना करनी चाहिए।
-संस्कृति भारद्वाज, बूंदी
...............


गाइडलाइन का पालन नहीं
कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में सरकार लापरवाह नहीं हैं। समय-समय पर विशेषज्ञों की राय लेकर लगातार आदेश जारी किए हैं। कर्मचारीे पूरी मेहनत और लगन से अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। लोग सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे। इसका प्रमाण है चालानों की संख्या। यदि आम जनता सरकार से जारी गाइडलाइन पर अमल करे, तो निश्चित तौर पर इस बीमारी को प्रभावी तरीके से हराया जा सकता है।
-मगन गोयल, सुमेरपुर, पाली
.....................

इसलिए बढ़ा कोरोना
कोरोना की लड़ाई से निपटने मे सरकारें और मंत्री लापरवाह रहे। गलत निर्णय से भी समस्या बढ़ी। जैसे बार-बार लॉकडाउन लगाने से लोगों में जरूरत का सामान प्राप्त करने की व्यग्रता बढ़ी। इससे लोग गाइडलाइन की पालना न करते हुए बाजार मे जुट गए और कोरोना को खुला निमंत्रण दे आए। मंत्री भी भीड़ जुटाते नजर आए और बिना मास्क के घूमते नजर आए। इससे कोरोना संक्रमण तो फैलने में मदद मिली।
-महिपाल परासरिया, जोधपुर
................

नेताओं ने बढ़ाई समस्या
कोरोना के विरूद्ध पूरा विश्व जंग लड़ रहा है। भारत सरकार और राज्य सरकारें भी इस दिशा में सक्रिय हैं। मुश्किल यह है कि नेताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी इस वैश्विक महामारी को लेकर बेहद उदासीन है। कई नेता कहते है कि कोरोना होना या न होना नियति के अधीन है, वहीं कुछ अंधविश्वासी नेतागण कोरोना को दैवीय प्रकोप मानते हैं। बिहार व बंगाल में कोरोना ने अपना भयावह रूप धारण कर लिया है। इसके बावजूद चुनाव को ध्यान में रखकर नेता जनसभाएं कर रहे हैं। सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा जा रहा।
-महावीर सिंह सोलंकी, जैसलमेर
............

सरकारें और नेता दोनों विफल
देश के कोरोना मरीजों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते है कि कोरोना पर लगाम लगाने में सरकारें और नेता दोनों विफल रहे हंै। अस्पतालों की हालत क्या है किसी से छिपी हुई नहीं है। कानून बनाने वाले, उसका पालन कराने वाले और स्वयं जनता ने भी कम लापरवाही नहीं की है। कई को दूरी नहीं रखने और मास्क नहीं लगाते देखा गया है। बार-बार के लॉकडाउन से कोरोना हारा नहीं है। इससे तो रोजी-रोटी के लाले भी पड़ गए हैं।
-रामेश्वर आमेटा, कारोलिया, राजसमन्द
.............

राजनीति की बजाय कोरोना पर ध्यान दें
कोरोना काल का यह भयावह संकट देश ही नहीं, पूरे विश्व में व्याप्त है। सभी देश इस महामारी से निजात पाने की कोशिश में दिन-रात जुटे हैं। कई ऐसे देश हंै, जो इस महामारी पर पूरी तरह नियंत्रण भी पा चुके हैं, परंतु हमारे देश भारत की स्थिति भयावह होती जा रही है। इस मसले पर सरकारें व जनप्रतिनिधियों के द्वारा राजनीति की जा रही है। हमसे कई ऐसे छोटे देश हैं, जिन्होंने साबित किया है कि कोरोना पर कैसे नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके विपरीत सरकारें व नेता सत्ता लोलुपता और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कोरोना का संक्रमण इसी तरह चलता रहा तो कुछ ही महीने में इसकी संख्या करोड़ तक पहुंच जाएगी। तब हालात और भयावह हो जाएंगे। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर काम करंे और देश को वैश्विक महामारी से निजात दिलाए।
-कुंज बिहारी मधुकर, तालदेवरी जांजगीर चम्पा, छत्तीसगढ़
...............

नेता ही नहीं कर रहे पालना
कोरोना से लड़ाई में सरकार फैसला लेती है कि सोशल डिस्टेंसिंग की पालना होगी। मास्क का प्रयोग आवश्यक होगा, लेकिन नेता सरकार के फैसलों की धज्जियां उड़ा देते हैं। कोरोना से लड़ाई के लिए सरकार तो पैकेज जारी करती है, लेकिन नेता उसमें भी गबन करने की साजिशें रचते हैं।
-केशव जांगिड़,जयपुर
...................

जनता की भागीदारी जरूरी
यह जनता की भी लड़ाई है, सरकार की ही नहीं। जब तक इसमें हमारी सहभागिता नहीं रहेगी, इस महामारी पर विजय प्राप्त नहीं हो सकेगी। जनता को तीन बातें माननी होंगी। सामाजिक दूरी, मास्क की अनिवार्यता और हाथों की स्वच्छता। सरकार नेलॉकडाउन किया, जो अनिवार्य था। संक्रमण की चेन टूटी। सारी सुविधाएं तैयार की गईं। यदि हम सावधानी बरतेंगे, तो समाज बचेगा, देश बचेगा। डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन, पुलिसकर्मी, शिक्षक आदि अपनी भूमिका बखूबी से निभा रहे हैं। हम सबको कोरोना की लड़ाई में सजगता, सावधानी, संयम, धैर्य, अपनाते हुए, निर्भीकता से इसका सामना करना चाहिए। सरकार और जनता दोनों मिलकर इस लड़ाई को लड़ें।
-विद्याशंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर

Corona virus
shailendra tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned