अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा क्यों मिल रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 13 Sep 2021, 04:04 PM IST

हिंदी को न भुलाएं
लोग हिंदी की बजाय अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। आम बोलचाल हो या पढ़ाई, अंग्रेजी का चलन बढ़ रहा है। आधुनिकता का दौर कम्पीटीशन से भरपूर है। यदि किसी को अंग्रेजी नहीं आती है, तो वह अन्य लोगों से पीछे रह जाता है। इस वजह से अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भर्ती कराते हैं। इन्हीं कारणों से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का व्यवसाय बढ़ता चला जा रहा है। बेहतर तो यह है कि जरूरत के हिसाब से अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराई जाए, परंतु हिंदी को भुलाएं बिना।
-शुभम् दुबे, इंदौर, मध्यप्रदेश
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रोजगार की भाषा बन रही है अंग्रेजी
यह देश का दुर्भाग्य है कि यहां की भाषा हिंदी है लेकिन बढ़ावा अंग्रेजी को मिलता है। असल में लोगों को अंग्रेजी में ही भविष्य दिखाई देता है। अंग्रेजी जानने वाले नौकरी पा जाते हैं। हर जगह अंग्रेजी का बोलबाला है। हिंदी को हर स्तर पर दरकिनार किया जाता है। हिंदी माध्यम से पढऩे वाले दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। हिंदी को रोजगार की भाषा बनाना होगा, तकनीकी भाषा बनाना होगा। जिस प्रकार से लोगों को अंग्रेजी में लाभ दिखता है, वह लाभ हिंदी में भी प्राप्त होने लगेगा तो अंग्रेजी माध्यम और अंग्रेजी को कम से कम देश में तो बढ़ावा मिलना बंद हो जाएगा और हिंदी अपने शिखर पर फिर से पहुंच जाएगी।
-अंकित शर्मा, झोटवाड़ा
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दिखावा भी, जरूरत भी
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा दो कारणों से मिल रहा है। एक, अपने बच्चों को बड़े स्कूल में भर्ती कराके अपना रुतबा बढ़ाना और अपने को ऊंचा दिखाना। दो, आज अंग्रेजी हर काम के लिए जरूरत बन चुकी है।
-मांगीलाल
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राष्ट्रीय भाषा से लगाव कम
भारतीयों में अपनी मातृभाषा और संस्कृति के प्रति लगाव कम है। फिर समाज में यह धारणा मजबूत हो चुकी है कि अंग्रेजी के बगैर हमारा काम ही नहीं चल सकेगा। गौरतलब है कि जापान और यूरोप के छोटे-छोटे देश अपनी मातृभाषा में काम करके हमसे कई गुना आगे हैं !
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप
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उच्च शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम
सरकारी हिंदी विद्यालयों में गुणवत्ता वाली पढ़ाई का अभाव, शिक्षकों की कमी एवं व उच्च शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम होने की वजह से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है ।
-वीरेंद्र टेलर, प्रतापगढ़
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हिंदी की उपेक्षा
भारतवर्ष की राष्ट्र भाषा तो हिन्दी घोषित कर रखी है, परन्तु आज भी सारे राजकाज के कार्य अंग्रेजी में ही संपादित किए जाते हैं। कहने को तो हम प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाते हैं, परन्तु हिंदी का महत्व नहीं समझते।
-कैलाश चंद्र मोदी, सादुलपुर चूरू
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अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा
अंग्रेजी एक अंतरराष्ट्रीट्रीय भाषा है और करियर के हर क्षेत्र में आज अंग्रेजी भाषा को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। अभिभावक यह नहीं चाहते कि कोई भाषा उनके बच्चों के भविष्य में बाधा बने। इसलिए वे अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे है।
-सुरभि चन्देल, राजपुर, म.प्र
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मानसिकता का परिणाम
भारतीय अंग्रेजों से तो आजाद हो गए, लेकिन अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी संस्कृति से आज तक आजाद नहीं हो पाए। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा इस अंग्रेजी मानसिकता का ही परिणाम है। देश-विदेश में रोजगार उन्मुख उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी ही है। हिंदी माध्यम की संस्थाएं दोयम दर्जे की मानी जाती हैं, क्योंकि अंग्रेजी संस्कृति भारत के नागरिकों पर हावी थी, है और हमेशा रहेगी।
-मुकेश भटनागर, वैशालीनगर, भिलाई
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नौकरी में मुश्किल
वर्तमान समय में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा मिल रहा है। हिन्दी माध्यम स्कूलों में शिक्षा सस्ती होने के बावजूद भी बच्चे नहीं आते। लोगों में आम धारणा है कि हिन्दी माध्यम सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं होती। स्कूलों में व्यवस्था अच्छी नहीं होती तथा इन स्कूलों में पढ़कर बच्चे अंग्रेजी अच्छे से नहीं बोल पाते, जिससे आगे उन्हें नौकरी मिलने में मुश्किल आती है।
-सरिता प्रसाद, पटना, बिहार
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मानसिकता बदलने की जरूरत
वैश्वीकरण के माहौल में आज सर्वत्र अंग्रेजी भाषा का बोलबाला हैं। शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी हम अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की तरफ बढ़ते है। कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन यह वास्तविकता है कि आगे बढऩे की होड़ में आज अंग्रेजी भाषा को हमने ही इतना महत्वपूर्ण बना दिया है कि हिंदी भाषी शिक्षण संस्थानों को उपेक्षा का सामना करना पढ़ता है। हिंदी भाषी विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता मिले। इसके लिए आवश्यक है कि हिंदी भाषी विद्यार्थियों को भी उतना ही सम्मान मिले, जितना अंग्रेजी भाषी विद्यार्थियों को मिलता है। जरूरत है मानसिकता को बदलने की।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर

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