आपकी बात, केंद्र सरकार से किसान नाराज क्यों हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 27 Nov 2020, 05:23 PM IST

कृषि कानूनों से किसान नाराज
किसानों की नाराजगी की वजह हाल ही में पारित तीन कृषि कानून हैं। किसानों को लगता है कि लिखित में कहीं भी एमएसपी की गारंटी नहीं दी गई। ऐसे में सरकार पर विश्वास कैसे किया जाए? सरकार फसल बेचने के रहे-सहे सरकारी ठिकाने भी खत्म कर रही है। इससे जमाखोरी बढ़ेगी और फसल खरीद की ऐसी शर्तों को जगह मिलेंगी, जो किसान के हित में नहीं होंगी। किसानों को लगता है कि इन कानूनों के बाद स्थानीय व्यापारियों की संख्या भी तेजी से घटेगी और बाजार में कुछ कंपनियों का एकाधिकार होगा। ऐसी स्थिति में किसान को फसल की अधिक कीमत कैसे मिलेगी?
-रमेश भाखर, फागलवा, सीकर
..........................

आशंकित हैं किसान
केंद्र सरकार संसद के पिछले सत्र में खेती से जुड़े तीन विधेयक लेकर आई थी, जो संसद में पारित हो चुके है और कानून बन चुके हैं। इन कानूनों से पंजाब और हरियाणा समेत कुछ राज्यों में किसान नाराज हैं। उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य की चिंता है। किसानों को डर है कि अब न्यूनतम समर्थन मूल्य सिस्टम खत्म हो जाएगा। किसान अगर मंडियों से बाहर उपज बेचेंगे तो मंडियां खत्म हो जाएंगी। किसानों को डर है कि कॉन्ट्रेक्ट या एग्रीमेंट करने से किसानों का पक्ष कमजोर होगा। वे कीमत तय नहीं कर पाएंगे। विवाद की स्थिति में बड़ी कंपनियों को फायदा होगा। बड़ी कंपनियां आवश्यक वस्तुओं का स्टोरेज करेगी। इससे कालाबाजारी बढ़ सकती है।
-आशीष कुमार सैन, दौसा
.......................

नाराज हैं किसान
किसान संगठन हाल ही संसद से पारित तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। किसानों को इस बात का डर है कि अब न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ हो गया है और वे बड़े कॉर्पोरेट घराने पर निर्भर हो जाएंगे। दाल, आलू, प्याज, अनाज जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिया गया है व स्टॉक सीमा खत्म कर दी गई है। इसके अलावा कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग नीति को बढावा देने से किसान नाराज हैं। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मांग रहे हैंं। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग नीति के तहत कम्पनियां किसानों का शोषण भी कर सकती हैं। किसानों को आशंका है कि वे अपने ही खेत में मजदूर बनकर रह जाएंगे।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
......................

जरूरी है परिवर्तन
आर्थिक रूप से कमजोर किसान खेतों में ही लगा रहता है। आर्थिक रुप से सम्पन्न कृषक आसानी से गरीब किसानों को भ्रमित कर राजनीति करते हंै। कृषि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नवीन परिवर्तनों से सरकार डरती है। परिवर्तन तो करने ही होंगे। राजनीति से परे शुद्ध कृषक आंदोलन हो, तभी किसानों को फायदा होगा।
-नरेंद्र कुमार शर्मा, जयपुर
.......................

समर्थन मूल्य पर फसल की बिक्री हो
किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। सरकार समर्थन मूल्य तो घोषित कर देती है, लेकिन मंडियों में समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर किसान अपनी उपज बेचने के लिए विवश होते रहते हैं। किसान सरकार से इस बात की गारंटी मांग रहे हैं कि समर्थन मूल्य से कम पर उनकी उपज नहीं बिक सके।
-नवीन थिरानी, नोहर
...................

भ्रमित हैं किसान
केन्द्र सरकार से कोई किसान नाराज नहीं है। विपक्षी दल किसानों को बहला-फुसला रहे हैं। किसानों को नए कानून के बारे में भ्रमित किया जा रहा है, क्योंकि वे नए कानूनों के बारे में पूरी तरह से जानते ही नहीं। उन्हें अगर नए कानूनों के बारे में सही जानकारी हो तो वे बहकावे में नहीं आएंगे। सरकार का दायित्व है कि किसानों को भ्रम के जाल से निकाले।
-दिनेश लोधा, पाडलिया, मनोहरथाना
.................

किसानों से बात की जाए
सरकार जिस किसान की आय बढ़ाने की बात कर रही हैं, उससे बात किए बिना इतने बड़े बदलाव क्यों किए जा रहे हैं? किसानों से खुलकर बात की जाए। केंद्र सरकार किसानों को अपनी नीति समझाए और उनकी तकलीफ समझे।
-प्रखर गुप्ता, भीलवाड़ा
......................

कृषि पर कॉर्पोरेट के कब्जे का खतरा
केन्द्र सरकार ने कृषि कानूनों में संशोधन किए हैं, जिससे किसानों को लग रहा है कि वे बर्बाद हो सकते हैं। किसानों को लगता है कि समर्थन मूल्य का प्रावधान खत्म हो जाएगा और कॉर्पोरेट घराने सिंडिकेट बनाकर कृषि बाजार पर एकाधिकार जमा सकते हैं।
-हेमलता चारवे बुदनी, मध्यप्रदेश
...........................

विरोध प्रदर्शन को दबाना ठीक नहीं
तीन कृषि कानूनों में संशोधन किया गया है, जिसका कई किसान संगठन विरोध कर रहे हंै। किसान संगठनों का मानना है कि इन कानूनों के आने से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जबकि सरकार का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि किसानों के सामने और अन्य विकल्प खुलेंगे। सरकार इन कानूनों के सम्बन्ध में किसानों को समझाए और उनकी आशंकाओं का समाधान करे। किसानों के विरोध प्रदर्शन को दबाना ठीक नहीं।
-हनुमान बिश्नोई, धोरीमन्ना, बाड़मेर
........................

नेता बरगला रहे हैं किसानों को
किसान जितनी मेहनत करता है, उसे उसका प्रतिफल नहीं मिलता। इसलिए सरकार कानून लाई है, ताकि बिचौलिए समाप्त हों और उसे उसकी फसल की वाजिब कीमत मिल सके। इससे राजनीतिज्ञों और उनसे जुड़े आढ़तियों की दलाली मारी जा रही है। इसलिए नेता भोले-भाले किसानों को बरगला रहे हैं। अगर किसान नाराज होता, तो पूरे देश का किसान आंदोलन करता?
-शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर,मप्र

Gyan Chand Patni
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned