scriptWhy are hunger deaths not stopping in the country? | आपकी बात, देश में भूख से मौतें क्यों नहीं रुक पा रहीं? | Patrika News

आपकी बात, देश में भूख से मौतें क्यों नहीं रुक पा रहीं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: November 18, 2021 05:43:29 pm

खरीद क्षमता बढ़ाई जाए
भारत के अनाज गोदाम खाद्यान्न से भरे हैं। फिर भी देश में भूख से मौतें हो रही हैं। असल में अनाज उत्पादन के साथ जनता की खरीद क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक है। लोग आज भी भूख से मर रहे हैं, क्योंकि बेरोजगारी और गरीबी की समस्या बनी हुई है। जब अनाज ही लोग नहीं खरीद पाते तो फल-सब्जी की क्या बात करें। जब तक देश में खाद्य उत्पादन के साथ-साथ खाद्य वितरण और खाद्य खरीदने की क्षमता पर रणनीतिपूर्वक कार्य नहीं किया जाएगा, भूख से मौतें होती रहेंगी। जरूरतमंदों तक खाद्य पदार्थ पहुंचा कर भूख से मौतों को रोका जा सकता है।
-मोनिका जैन, जोधपुर
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आपकी बात, देश में भूख से मौतें क्यों नहीं रुक पा रहीं?
आपकी बात, देश में भूख से मौतें क्यों नहीं रुक पा रहीं?
अव्यवस्था का नतीजा
गोदामों में अनाज का भंडारण क्षमता से अधिक होने के कारण खाद्यान्न को खुले में रख दिया जाता है। बारिश में लाखों टन अनाज खराब हो जाता है। दूसरी तरफ देश में लाखों लोग भूख से भी दम तोड़ रहे हैं। यह सरकारी तंत्र की घोर अव्यवस्था का नतीजा है। देश का प्रशासनिक अमला इतना निकम्मा एवं लापरवाह है कि गरीब जरूरतमंदों तक अनाज पहुंचाने में उसे कोई दिलचस्पी नहीं है। यही कारण है देश में भूख से निरंतर मौतों हो रही हैं।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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ठोस योजना का अभाव
देश में अनाज की कमी नहीं है। हर व्यक्ति को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को ठोस योजना बनानी पड़ेगी। अनाज गोदामों में पड़ा-पड़ा सड़ जाता है। सरकार खाद्यान्न को संभाल नहीं सकती तो जरूरतमंदों को इसका नि:शुल्क वितरण ही करा दे, ताकि लोग भूख से न मरें।
-लता अग्रवाल चित्तौडग़ढ़
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जनसंख्या वृद्धि भी एक कारण
देश में खाद्यान्न उत्पादन तो खूब हो रहा है। इसके बावजूद लाखों लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। आज भी भुखमरी के आंकड़े देश को शर्मसार कर रहे हैं। खाद्य भंडारण व्यवस्था निर्धारित मानकों से बहुत निचले स्तर की है। जो अनाज गोदामों में सुरक्षित रखा जाता है, उसका भी एक बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता। बढ़ती जनसंख्या भी बड़ा कारण है। साथ ही भोजन की बर्बादी रोकने के लिए सामाजिक चेतना लानी होगी।
-साजिद अल, इंदौर .
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मानवीय संवेदनाओं का अभाव।
हम क्या कहते हैं यह मायने नहीं रखता हम क्या कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण है। एक तरफ हम फूड पार्क, फूड म्यूजियम खोल रहे हैं, तो दूसरी तरफ एफसीआइ के भंडारों में लाखों क्विंटल खाद्यान्न बर्बाद हो रहा है। लाखों लोग दो जून की रोटी के लिए तरस रहे हंै। जब कभी भूख से इंसानों की मृत्यु की खबर सुर्खियां में होती है, तब ऐसा लगता है, जैसे सरकार के साथ हम सभी कहीं ना कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। यह हमारी मानवीय संवेदनाओं का अभाव प्रदर्शित कर रहा है। सरकार और प्रशासन की कथनी और करनी में भी अंतर दिखाई देता है। 2013 में खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम पास हुआ। फिर भी जमीनी धरातल पर पूर्ण रूप से क्रियान्वित नहीं हो पाया। आज देश में भुखमरी से मरने वालों की संख्या इतनी अधिक है कि वैश्विक सूचकांक में भी भारत की स्थिति निरंतर गिरती जा रही है जो चिंता का विषय है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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बदहाल है अनाज भंडारण व्यवस्था
दिनों दिन भूख से मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अनाज पर आत्मनिर्भरता का दावा करने वाला भारत अनाज भंडारण के कुप्रबंधन की मार झेल रहा है, जिसके चलते टनों अनाज प्रतिवर्ष सड़ जाता है। इसका परिणाम देश में भुखमरी व महंगाई के रूप में हमारे सामने है। जब सरकारी गोदामों में खाद्यान्न भरा पड़ा है, तो फिर आम लोग भूख से क्यों मरते हैं? इसके अतिरिक्त गोदामों में क्षमता से बहुत खाद्यान्न रखा जाता है, जो खुले में पड़े होने के कारण खराब हो जाता है।
-अजिता शर्मा, उदयपुर
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वितरण प्रणाली में खामियां
भूख से हो रही मौतों को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास अभी तक नहीं हुए हैं। दुनियाभर में खाद्य पदार्थों का निर्यात करने वाले देश में ही लगभग तीस करोड गरीब जनता भूखी सोती है। जाहिर है कि खाद्यान्न वितरण प्रणाली में खामियां हैं।
-रामचंद्र सिंह राजावत, कोटा
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अनाज वितरण में खामियां
देश में भूख से मौतें होना एक गहन चिंता का विषय है। देश में अनाज की कमी नहीं है, लेकिन सरकार द्वारा जो अनाज गरीबों को देने के लिए रखा जाता है, वह धांधली के कारण उन तक पहुंच नहीं पाता है। मुश्किल यह है कि पूरी व्यवस्था ही भ्रष्टाचार में लिप्त है तो गरीबों की पुकार सुनेगा कौन? साथ ही प्रतिदिन घरों, होटलों और समारोहों से भोजन बर्बाद होना भी भुखमरी से मौत का एक बड़ा कारण है। बचे हुए भोजन को भूखे-जरूरतमंदों को खिला दिया जाए, तो भूख से मौतें कम होंगी और अन्न देवता का अपमान भी न होगा।
- विभा गुप्ता, बैंगलुरु
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विशेष कार्ययोजना बनाई जाए
केंद्र सरकार भूख से हो रही मौतों को रोकने के लिए कुपोषण ग्रस्त क्षेत्रों के लिए विशेष कार्य योजना तैयार करे। सभी राज्य सरकारों के साथ इस संबंध में बैठक कर उनसे भी इस संबंध में सुझाव लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करे।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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संभव है समस्या समाधान
देश में कहीं भोजन फेंका जा रहा है, कहीं जानवर खा रहे हैं और कहीं भूखे इंसान बिलबिला रहे हैं। हर शहर-गांव में इस अधिकता और अभाव के बीच यदि कोई मानवीय संस्था सेतु का कार्य करे तो भुखमरी की समस्या का निदान संभव है।
-मुकेश भटनागर, भिलाई
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ठोस योजना बनाई जाए
भूख से मौतों का मुख्य कारण गरीबी और बेरोजगारी है, जिससे व्यक्ति पोषक तत्त्वों से वंचित रह जाता है। भुखमरी पर लगाम के लिए सरकार को ठोस योजना बनानी चाहिए।
-अनुराग गिरि, रावतसर, हनुमानगढ़
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सामुदायिक भोजनालय की शुरुआत की जाए
हमारे देश में भूख के कारण भी लोग मर रहे हैं। भूख से मौत का प्रमुख कारण जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की योजना का न होना है। हर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना की तरह ही सामुदायिक भोजनालय की शुरुआत होनी चाहिए। इस संबंध में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी केन्द्र सरकार को फटकार लगाई है। हर व्यक्ति को भोजन मिलना चाहिए।
-सुरेश दीवान, रायपुर, छत्तीसगढ़
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जरूरतमंदों तक पहुंचाएं अनाज
हमारे देश में अन्न की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही तालमेल और सही व्यवस्था न होने के कारण जहां पर अन्न की जरूरत है, वहां पर अन्न नहीं पहुंच पाता हैै। कोई भूखा ना मरे, इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और देश के नागरिकों को इसके लिए पहल करनी पड़ेगी। वे अपने आस-पड़ोस के इलाकों में जरूरतमंदों तक अन्न पहुंचाने की व्यवस्था करें।
-बालकिशन अग्रवाल, सूरत, गुजरात

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