आपकी बात, अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 11 Jan 2021, 07:20 PM IST

नहीं रहता विद्युत भार का ध्यान
अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं बढऩे का कारण यह है कि जब अस्पताल बनता है उस समय के विद्युत भार के हिसाब से मैन केबल और वायरिंग कर दी जाती है। कुछ समय बाद अस्पतालों में नई मशीनें और लगा दी जाती हैं। साथ ही नए-नए डिपार्टमेन्ट खोल दिए जाते हैं। इस कारण विद्युत भार बढ़ता चला जाता हैं। अस्पतालों के जिम्मेदार लोग इस बढ़े हुए विद्युत भार को नजरअंदाज कर देते हैं और जब किसी समय एक साथ विद्युत भार बढ़ जाता हैं, तब वायरिंग गर्म होकर शॉर्ट सर्किट हो जाता है। और आग लग जाती हैं
-मनोज कुमार सारस्वत, जामनगर, गुजरात
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प्रशासनिक लापरवाही के दुष्परिणाम
अस्पतालों में आग लगने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय है। आए दिन हम समाचार पत्रों में देखते हैं कि अस्पतालों में आग लगने से जान मे तक चली जाती है। छोटे-छोटे मासूमों और मरीजों को लेकर बड़ी ही उम्मीद के साथ लोग अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन जब इनके साथ इस तरह की घटनाएं होती हैं, तब उन पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ता है। इन हादसों के पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही प्रमुख कारण है। सरकार को चाहिए कि वह प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करते हुए मुस्तैदी दिखाए और दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करे। इसके अलावा कई बार स्टाफ की कमी होने पर भी ऐसे गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं । सरकार को इस दिशा में भी पर्याप्त सुधार की जरूरत है। किसी भी विभाग के प्रशासनिक व्यवस्था के अधिकारी औऱ कर्मचारीगण यदि मानवीय संवेदनाओं को दृष्टिगत रखते हुए यदि अपनी जिम्मेदारी निष्ठापूर्वक निभाएंगे तथा कर्म को पूजा मानकर कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से इस तरह की घटनाओं से निजात पाई जा सकती है।।
-रमेश कुमार लखारा, देच, जोधपुर
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अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही
आए दिन अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हंै। आखिरकार मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन हैं? अस्पताल ऐसी जगह है, जहां मरीज अपना जीवन बचाने आते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर प्रशासन को हर वक्त सजग रहना होगा। नियमित रूप से निगरानी रखनी होगी। इसके लिए बिजली विभाग के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली आपूर्ति में कोई रुकावट तो नहीं है ओर अगर कोई फाल्ट है तो तत्काल ठीक किया जाए। धुंआ निकलने के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो, कई बार दम घुटने से मरीज मर जाते हैं। आग लगने पर सरकार दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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विद्युतीय तंत्र का रख-रखाव आवश्यक
अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं सीधे-सीधे प्रबंधकीय लापरवाही है। आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट ही होता है। सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं किया जाता है। विद्युतीय तंत्र का रखरखाव एवं निरीक्षण नियमित रूप से नहीं किया जाता है। विद्युतीय बाधा उत्पन्न होने पर ही उसकी मरम्मत की जाती है, तब तक आग लगने जैसी घटना हो चुकी होती है। शासन ऐसी घटनाओं के प्रति गंभीर नहीं है। प्रभावित व्यक्ति को मुआवजा देकर काम की इतिश्री कर देता है। सुरक्षा की दृष्टि से अस्पतालों में दक्ष और जिम्मेदार तकनीकी कर्मचारियों को लगाया जाना चाहिए।
-नरेंद्र कुमार शर्मा, मालवीय नगर, जयपुर
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व्यवस्था में सुधार की जरूरत
अस्पतालों में आए दिन आगजनी की घटनाएं देखने को मिलती हैं। इसका मुख्य कारण लापरवाही ही है, इसमें कोई संदेह नहीं है। भंडारा(महाराष्ट्र) के सरकारी अस्पताल का अग्निकांड दिल दहलाने वाला है, जहां 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई। इसी प्रकार घटनाएं अहमदाबाद के कोविड अस्पताल और राजकोट की अस्पतालों में हो चुकी है। फिर भी व्यवस्था को ठीक नहीं किया गया। अब भी नहीं चेते तो इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति होने से कोई नहीं रोक सकता है।
-कैलाश चन्द्र मोद, सादुलपुर, चूरू
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नियमित निरीक्षण जरूरी
सरकारों को अस्पतालों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी करना चाहिए और जहां भी खामियां पाई जाती हंै, तो उस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए। अस्पतालों में लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही हंै। अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वहां पर्याप्त मात्रा में आग बुझाने के उपकरण की व्यवस्था करे और नियमित उसकी मॉनिटरिंग करे। जिला प्रशासन को भी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर वहां की खामियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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नियमों की पालना जरूरी
अस्पतालों में आग लगने की घटना को लापरवाही का नतीजा कहा जा सकता है, क्योंकि जब अस्पताल सुरक्षा मानकों का पालन ढंग से नहीं करते हैं, तभी ऐसी घटनाएं घटित होती हंै। अत: बचाव के लिए जरूरी है कि सभी मानकों एवं नियमों का पालन हो।
-शुभम् कुमार बाहेती, चौहटन, बाड़मेर
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रहे जिम्मेदारी का ध्यान
अस्पताल में आग लगने का पहला कारण प्रशासन की गंभीर लापरवाही है। छोटे से लेकर बड़े-बड़े अधिकारी तक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। यह प्रवृत्ति गलत है। सभी को अपनी जिम्मेदारी का ध्यान रखना होगा।
-अरविंद सीकदार, ब्यावर, अजमेर
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स्मोक अलार्म जरूरी
अस्पतालों में स्मोक अलार्म होना आवश्यक है तथा समय-समय पर उसकी मरम्मत तथा वार्ड में सुरक्षा गार्ड होना आवश्यक है। लापरवाही पर कड़ी सजा हो, सब अपनी जिम्मेदारी समझें।
-बीना श्रीवास्तव, छबड़ा, बारां
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भ्रष्टाचार भी मुख्य कारण
अस्पतालों में आगे लगने की बढ़ती घटनाओं के लिए शत प्रतिशत भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। भ्रष्टाचार के प्रति सरकारों का उदासीन रवैया है। इस रवैये के कारण ही लापरवाही बरतने वाले बेखौफ होकर लापरवाही पर लापरवाही बरतते रहते हैं।
-राजेश कुमार चौहान, जालंधर
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प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव
अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम इसलिए नाकाफी साबित हो रहे हैं, क्योंकि वहां आग बुझाने के उपकरण तो रख रखे हैं, लेकिन वे बहुत ही पुराने हो चले हैं। साथ ही अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी आग से बचाव का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है इसलिए अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही है
-शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर

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