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आपकी बात, जहरीली शराब से मौतें क्यों नहीं रुक रहीं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: November 08, 2021 05:46:17 pm

कड़ाई से लागू हो शराबबंदी
शराब के बढ़ते व्यवसाय के माध्यम से राज्य सरकारों को भारी राजस्व प्राप्त होता है। इसीलिए सरकार का ध्यान अधिक से अधिक शराब के ठेके खोलने पर रहता है। इसका नकारात्मक प्रभाव आम जनता पर पड़ता है। शराब की लत के शिकार सस्ती शराब खोजते हैं, जिसका फायदा नकली शराब बनाने वाले उठाते हैं। वे घातक रासायनिक पदार्थों से निर्मित शराब की बिक्री करते हैं। ऐसी शराब जहरीली हो जाती है, जिसके सेवन से मौत तक हो जाती है। जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला तभी थमेगा, जब शासन पूर्ण शराबबंदी करे और उसे कड़ाई से लागू भी करे।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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आपकी बात, जहरीली शराब से मौतें क्यों नहीं रुक रहीं?
आपकी बात, जहरीली शराब से मौतें क्यों नहीं रुक रहीं?
गरीब होते हैं शिकार
शराब की लत के शिकार गरीब तबके के लोग सस्ती शराब के चक्कर में जहरीली शराब खरीद लेते हैं और मौत के मुंह में समा जाते हैं। अवैध रूप से निर्मित इस तरह की शराब में कम लागत के लिए इथेनॉल की बजाए मेथेनॉल का प्रयोग किया जाता है। इससे यह जहरीली हो जाती है और अनेक लोगों की मौत का कारण बनती है। अवैध शराब निर्माता, प्रशासन तथा नेताओं के गठजोड़ के कारण यह व्यवसाय फल फूला रहा है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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नहीं चलता अभियान
जहरीली शराब से होने वाली मौतें नहीं रुकने का कारण मिलावटी और नकली शराब को रोकने के लिए थाना स्तर पर आबकारी विभाग द्वारा निरंतर अभियान नहीं चलाना है। मिलावटखोर और नकली शराब बनाने वाले राजनीतिक संरक्षण के कारण सजा से बच जाते हैं।
- भगवती प्रसाद गेहलोत, मंदसौर
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मिथाइल अल्कोहल है कारण
जहरीली शराब में कई तरह के रसायन मिलाने से मिथाइल अल्कोहल बन जाता है। इसके सेवन से शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं । अधिकतर मौतों का कारण जहरीली शराब का सेवन होता है।
-आकांक्षा रूपा चचरा, कटक, ओडि़शा
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प्रशासन की मिलीभगत
जहरीली शराब पीने से मौतें तो तब रुकेंगी, जब जहरीली शराब बनना बंद होगी। अवैध रूप से शराब बनाने वालों से प्रशासन की मिलीभगत रहती है। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी इन लोगों से पैसे की वसूली करते हैं। प्रशासन इतना संवेदनहीन हो गया है कि कोई जीए या मरे, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर प्रशासन चाहे तो कठोर कार्रवाई कर शराब के इन ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है और जहरीली शराब बनाने पर रोक लगा सकता है। ऐसा होने पर जहरीली शराब से मौत स्वत: ही रुक जाएगी।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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मुनाफाखोरी का नतीजा
सवाल उत्पन्न होता है कि शराब जहरीली क्यों हो जाती है? कम लागत एवं शराब से अधिक मुनाफे के कारण घटिया रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल कर शराब तैयार की जाती है। ऐसी शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। इसके सेवन से मौत तक हो जाती है। शराब से मौतों के सिलसिले रोकने के लिए सरकार को शराबबंदी कड़ाई से लागू करनी चाहिए।
-सतीश उपाध्याय, मनेन्द्रगढ कोरिया, छत्तीसगढ़
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कठोर कानून जरूरी
शराब माफिया पर कठोर कार्रवाई नहीं होती। ऊंचे पदों पर बैठे लोग इसमें शामिल होते हैं। पुलिस की लापरवाही भी इसका कारण है। कच्ची शराब के सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है। सस्ती शराब के चक्कर में लोगों की मौत होती है। कठोर कानून बनाकर इसे रोका जा सकता है।
-गोविन्द भारद्वाज, अजमेर
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कड़ी कार्रवाई जरूरी
सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण जहरीली शराब के सेवन से मौतों का सिलसिला जारी है। दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में अधिकारी कठोर कार्रवाई नहीं कर पाते हैं, राजनीतिक हस्तक्षेप भी किसी सीमा तक जिम्मेदार है। जहरीली शराब का बनना बंद नहीं होगा, तब तक यह बिकना बंद नहीं होगी। ऐसे मामले में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
-खुशवंत कुमार हिंडोनिया, चित्तौडग़ढ़
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जड़ पर प्रहार जरूरी
सरकार आय प्राप्त करने के उद्देश्य से शराब बेचने के ठेके, शराब बेचने के लाइसेंस प्रदान करती है। जब मालूम है कि शराब कोई जीने के लिए अनिवार्य वस्तु नहीं तो इसे बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है? इसे जड़ से ही खत्म करना चाहिए। शराब ही नहीं मिलेगी, तो जहरीली शराब से मौतें भी नहीं होंगी।
-मंजू बोरावड़, खारा, बीकानेर
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भ्रष्ट तंत्र जिम्मेदार
जहरीली शराब से मौत के मामले में मुख्य रूप से जिम्मेदार है सरकारी भ्रष्ट तंत्र। शराब की बिक्री से राज्य सरकारों को भारी राजस्व प्राप्त होता है। इसीलिए शराब के मामले में शासन काफी उदार रहता है। शराब की गैरकानूनी व अवैध तरीकों से बिक्री नहीं रुक रही। मिथाइल अल्कोहल ज्यादा मिलाने से शराब जहरीली बन जाती है। इसकी लोगों को संपूर्ण जानकारी नहीं होती है।
- धर्मेंद्र पूनमसिंह सिंगाड़, थांदला, मप्र

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