आपकी बात, भड़काऊ बयानबाजी राजनीति का हिस्सा क्यों बन गई है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 03 Mar 2021, 07:06 PM IST

बुनियादी समस्याओं से ध्यान भटकाना
आज के नेता देश की बुनियादी समस्याओं से पल्ला झाड़ कर जानबूझकर ऐसी विवादित बयानबाजी करती है, जिससे देश के नागरिकों का ध्यान मूल समस्या से भटक जाए। ऐसा कृत्य करके वे लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि जनता का भी मखौल उड़ाते हैं। वोट बैंक की राजनीति को चमकाने के लिए वे विशेष जाति समूह के लोगों पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं। अपना उल्लू सीधा करने के लिए वे विशेष जाति समूह को केंद्र बिंदु में रखकर ही देश के वातावरण को बिगाड़ते रहते हैं।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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कट्टर समर्थक बनाने का रास्ता
राजनीतिक पार्टियां ऐसा माहौल बना रही है जिससे लोग उत्तेजित हों और उनके कट्टर समर्थक बन जाएं। पार्टी के कुछ नेता प्रायोजित किए जाते भड़काऊ भाषण देते हैं। ऐसे में लोगों का ध्यान विकास से जुड़े मुद्दों से हट जाता है। ।
-सुनील बैनीवाल, भादरा, हनुमानगढ़
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नेताओं की सत्तालोलुपता
चुनाव आते ही नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी तेज हो जाती है। भड़काऊ एवं अशिष्ट बयानों से देश में अराजकता का माहौल निर्मित होता है। धार्मिक भावनाएं भड़काकर किसी धर्म विशेष के लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की तीव्र भत्र्सना होनी चाहिए। ऐसे बयान देश की एकता एवं अखण्डता को खण्डित करते हैं, उनकी आलोचना एवं निन्दा होना जरूरी है। विवादित बयानों की राजनीति बंद हो। चुनाव आयोग त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। ऐसे विवादित बयान नेताओं की सत्तालोलुपता को दर्शाते हंै। इससे दलों की बौखलाहट दिखाई पड़ती है।
-खुशवंत कुमार हिंडोनिया, चित्तौडग़ढ़
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मीडिया भी जिम्मेदार
दरअसल भड़काऊ बयानबाजी को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका है। टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसे बयानों को तूल दिया जाता है। इसी का फायदा नेता उठाते हैं और विवादित बयान देकर चर्चित होना चाहते हैं।
-गौरव शर्मा, ग्वालियर, मध्यप्रदेश
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सवालों से बचने का तरीका
नेता चुनाव के समय असली मद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल एवं भड़काऊ बयान देते हैं। ऐसे नेता जनता का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य रहात है कि जनता अपनी बुनियादी सुविधाओं, महंगाई, बेरोजगारी एवं कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े सवाल ना कर पाए।
-महेश आचार्य, नागौर
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लोकतंत्र को नुकसान
भड़काऊ बयानबाजी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का आसान तरीका है, जो कि सोशल मीडिया के इस युग में बहुत तेजी से प्रचारित होती है। इसके अलावा धर्म, जाति, क्षेत्र के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करना भी राजनीतिक पार्टियों का उद्देश्य होता है। मुख्य मुद्दे जैसे बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई आदि से लोगों का ध्यान हटाना भी एक कारण है। चुनावों में अधिकांश राजनीतिक पार्टियों भड़काऊ बयानबाजी मुख्य हथियार बन गया है। इससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचता है।
-विजय झोरड़, संगरिया, हनुमानगढ़
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जनता को गुमराह करना मुश्किल
सियासतदानों द्वारा भड़काऊ बयानबाजी का एकमात्र उद्देश्य अपने लिए चुनावी माहौल तैयार करना ही रहा है। इसके बावजूद जनता बहुत सतर्क व जागरूक है। वह सब जानती है कि कौन क्या है? उसे अब गुमराह नहीं किया जा सकता है।
-गजानन पाण्डेय, हैदराबाद
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जनता को भ्रमित करने का तरीका
भड़काऊ बयानबाजी से लोग राजनीति में सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं। भड़काऊ बयानों को लेकर उनकी सोच रहती है कि लोग उनका समर्थन करेंगे। इस तरह के बयानों में नेता अपना स्वार्थ देखते हैं। यह सब वोट बैंक की राजनीति होती है। वे जनता को भ्रमित करने का काम करते हैं। उनको देश और जनता के हित की परवाह नहीं होती। पार्टी में बड़े नेताओं के कहने पर ही इस तरह के भड़काऊ बयान दिए जाते हैं। बयान से कुछ फायदा दिखता है तो उनकी पार्टी के लोग समर्थन में आ जाते हैं और अगर वह भड़काऊ बयान उल्टा पड़ जाए, तो बयान से किनारा कर लेते हैं।
-हरिराम कस्वां, धमेरी, चुरू
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संयम बरते मीडिया
अनर्गल और विवादित बयानबाजी के मूल में है मीडिया। किसी ने कोई बेवकूफी की बात की और मीडिया ने उसे आगे बढ़ा दिया। वीडियो दिखाने लगे, बहसें होने लगीं। मतलब यह है कि बकवास करने वाले को नायक बना दिया गया। नेताओं को भी लगता है कि प्रचार पाने का ये सबसे अच्छा तरीका है। इसलिए वे कुछ भी बोल देते हैं। अब अगर फंस गए तो कह देते हैं कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इस तरह की बयानबाजी पर अंकुश के लिए मीडिया को संयम बरतना होगा।
-अजय कुमार चतुर्वेदी, भोपाल
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राजनीति का गिरता स्तर
आजकल नेता हर समय भड़काने वाले बयान देते रहते हैं। ऐसा लगता है कि ये लोग लोकतंत्र का अर्थ ही नहीं जानते हैं। शायद इनकी शिक्षा में ही कमी रह गई है। राजनीति का गिरता स्तर हमारे देश को कमजोर कर रहा है। काश नेता सत्ता पाने की होड़ में लगने की बजाय देश की उन्नति के लिए अपनी बुद्धि और ऊर्जा लगाते। ऐसे नेताओं को जनता जरूर सिर माथे पर बिठाती, तब देश भी आगे बढ़ता और इनकी इज्जत भी होती।
-जयश्री वैष्णव, उदयपुर
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कठोर कार्रवाई जरूरी
आजकल भड़काऊ भाषण देने के मामले पहले की अपेक्षा बढ़ गए हैं। इसका कारण है बिना मेहनत किए सस्ती लोकप्रियता हासिल करना और उच्च पद पर जल्दी पहुंचने की लालसा। कभी-कभी इन गैर जिम्मेदाराना बयानों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है और समाज में द्वेष की भावना पैदा हो जाती है। सरकार को चाहिए कि इस तरह के बयान देने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे तथा इस सम्बन्ध में कड़े कानून बनाए जाए !!
-स्वरूप गोस्वामी, बाड़मेर

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