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आपकी बात, 'निजी स्कूलों की मनमानी क्यों नहीं रुक पा रही? '

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: April 18, 2022 04:04:14 pm

फीस पर नियंत्रण जरूरी
निजी स्कूल संचालक अपनी मर्जी से फीस वृद्धि करके अभिभावकों की कमर तोड़ रहे हैं। सरकार को फीस का निर्धारण करके उससे अधिक फीस वसूलने पर सख्त कार्रवाई करनी होगी, जिससे लोगों को राहत मिल सके। निजी स्कूलों में बच्चों के उत्पीडऩ की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिए।
-सी. आर. प्रजापति, हरढ़ाणी जोधपुर
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सरकारी स्कूलों की हालत ठीक हो
सरकारी स्कूलों की शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, जबकि निजी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण होती है क्योंकि वहां शिक्षण कार्य की निगरानी होती है। दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की कोई जवाबदेही तय नहीं होती। अगर सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी बच्चों को अच्छी तरह पढ़ाएं, तो अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूल की तरफ बढ़ जाएगा।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़।
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आपकी बात, 'निजी स्कूलों की मनमानी क्यों नहीं रुक पा रही? '
आपकी बात, 'निजी स्कूलों की मनमानी क्यों नहीं रुक पा रही? '
जरूरी है सख्ती
निजी स्कूलों की मनमानी की खबरें अक्सर पढऩे को मिलती हैं। सरकारों की मंशा और नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो सके। इससे निजी स्कूलों पर निर्भरता कम हो सकती है। निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार सख्ती से पेश आए।
-साजिद अली, इंदौर
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नहीं रुक रही मनमानी
निजी स्कूलों में अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली जा रही हैं। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के आदेश बेअसर साबित हो रहे हैं। अभी तक सरकारी तंत्र इन स्कूलों पर नकेल नहीं कस पा रहा है। अभिभावक लगातार इसको लेकर गुहार लगा रहे हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद निजी स्कूल संचालकों द्वारा विभिन्न मदों में फीस वसूली की जा रही है। अभिभावकों द्वारा प्रतिरोध करने पर स्कूल प्रबंधन उन्हें धमकाता है। कोरोना काल के दौरान ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी भी मद से फीस नहीं लेने पर हाईकोर्ट द्वारा निजी स्कूलों को आदेश दिया गया था, लेकिन ये कोर्ट का भी आदेश नहीं मान रहे। जिन किताबों की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें भी खरीदने के लिए कहा जाता है।
-प्रदीप सिंह अड़सेला, कोटा
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शिक्षा को व्यापार न बनाएं
निजी स्कूलों को खुली लूट की छूट मिलने व उनकी मनमानी नहीं रुकने के लिए सरकारी उदासीनता जिम्मेदार है। कुकुरमुत्ते की तरह उगे निजी स्कूलों की न कोई नीति है और न नियम। बार-बार फीस बढ़ाने, पहली क्लास तक पहुंचने में ही बच्चों के परिजनों से भारी रकम लेने, कॉपी, किताब, विकास, वाहन, मनोरंजन, ड्रेस, सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर निजी स्कूलों की लूट पर अंकुश नहीं लग पाया है। सरकार को निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाकर शिक्षा को व्यापार बनाने से बचाना चाहिए।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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व्यापक कानून की जरूरत
निजी स्कूलों में मनमानी फीस को रोकने के लिए अभी तक एक व्यापक कानून का अभाव है। सरकार सुस्त है। अब समय आ गया है कि सरकार को एक विस्तृत कानून बनाना चाहिए, ताकि अभिभावकों का शोषण न हो ।
-पारस मल, गुडमालानी, बाडमेर
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नहीं होती कार्रवाई
निजी स्कूल किसी न किसी बहाने फीस वसूलते रहते हैं। इस तरह की शिकायतों के बाद भी स्कूलों के खिलाफ पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। उनकी हर शिकायत को अनदेखा किया जाता है। स्कूल जब चाहे फीस बढ़ा देते हैं। जो बच्चे फीस नहीं भरते, उन्हें क्लास से बाहर कर दिया जाता है।
-सरिता प्रसाद, पटना, बिहार
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राजनीतिक संरक्षण
आज तक किसी ने भी अभिभावकों के उस दर्द को नहीं समझा है, जो उन्हें निजी स्कूलों के माध्यम से मिलता है। आज के जमाने में निजी स्कूल शिक्षा के मंदिर न हो कर पूरी तरह व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन गए हैं। शिक्षा माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिला होता है, जिनके चलते वे मनमानी करते हैं।
--- नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश
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नियमों का पालन करवाया जाए
निजी स्कूल प्रतिस्पर्धा के नाम पर आज विद्यार्थियों में इतना अधिक दबाव डाल रहे हैं कि उनका बचपन पूरी तरह नष्ट हो रहा है। अभिभावक मजबूर हैं, क्योंकि उनके पास कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं है। सरकारी स्कूल बदहाल हैं। सरकार को स्कूलों की फीस सम्बंधित नियम बनाने चाहिए और उनका पालन भी करवाना चाहिए।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश

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