आपकी बात, अवैध रूप से शराब का निर्माण और बिक्री क्यों नहीं रुक रही?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 20 Nov 2020, 04:26 PM IST

नेताओं से भी मिलीभगत
शराब का निर्माण और बिक्री का काम सफेदपोश नेता, उनके नजदीकी रिश्तेदार, मित्र और प्रभावशाली लोग कर रहे हैं। इनका सत्ता और प्रशासन में दबदबा है। पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग भी अवैध शराब के निर्माण और बिक्री की पूरी जानकारी रखते हैं, लेकिन उन्हें अपने हिस्से से मतलब होता है। उच्च अधिकारियों को दिखाने के लिए कभी-कभार कार्रवाई होती है। इस दौरान कुछ लीटर अवैध शराब नष्ट या बरामद करके अपराधियों को फरार बता देते हंै या आदतन किसी अपराधी को गिरफ्तारी दिखा देते हैं। कमजोर कानून और बहुत कम सजा का प्रावधान होने से अवैध शराब का कारोबार करने वाले फल-फूल रहे हैं। जनता इसके लिए खुद जिम्मेदार है, क्योंकि जनता अवैध कारोबार करने वाले कुछ नेताओं और अपराधियों को चुनकर सत्ता तक पहुंचा देती है और उनसे उम्मीद करती है कि ये हमारे क्षेत्र का विकास करा देंगे।
-अखलाक हुसैन, कोटा
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जरूरी है कठोर कार्रवाई
भ्रष्ट और धनलोलुप लोग नेताओं से गठजोड़ कर शराब के अवैध कारोबार को आगे बढ़ाते हैं। इसका खमियाजा सरकार को राजकोषीय घाटा उठाकर और जनता को स्वास्थ्य बिगाड़ कर भुगतना पड़ता है। प्रशासन की निष्क्रियता, मिलीभगत और अनदेखी के कारण अवैध रूप से शराब का निर्माण का काम फल-फूल रहा है। इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए समय रहते कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
-भगवान प्रसाद गौड़, उदयपुर
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बेलगाम शराब माफिया
शासन और प्रशासन की मिलीभगत होने के कारण ही अवैध शराब की बिक्री हो रही है। यही वजह है कि शराब का अवैध निर्माण भी नहीं रुक रहा। अवैध रूप से बनने वाली शराब की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं होता। ऐसी शराब पीने से लोग मर भी जाते हैं। इसके बावजूद शराब माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती।
-तिलक सिंह राजोरिया, भिंड, म्रप्र
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लापरवाह हैं अधिकारी
अवैध रूप से शराब का निर्माण और बिक्री नहीं रुकने का सबसे बड़ा कारण सरकार की ढिलाई है। इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए कठोर कानून भी नहीं है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है।
-सुरेंद्र बिंदल, जयपुर
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शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
देश के विभिन्न भागों में वर्षों से अवैध रूप से शराब का निर्माण और बिक्री निरंतर जारी हैै। असल में अवैध शराब निर्माणकर्ता, पुलिस प्रशासन तथा आबकारी विभाग की मिलीभगत के चलते ही ऐसा हो रहा है। शिकायत के बावजूद संबंधित शासन-प्रशासन शिकायतों पर गौर नहीं करता है। उल्टे शिकायतकर्ता को ही फंसा दिया जाता है।
-कैलाश सामोता, शाहपुरा, जयपुर
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शराब माफिया को संरक्षण
राजस्थान में भी अवैध शराब का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यह गुजरात और बिहार तक पहुंचाई जा रही है, क्योंकि इन राज्यों में शराबबंदी कानून लागू है। अवैध शराब निर्माण के गोरखधंधे में कई माफिया सक्रिय हैं, जिनकी राजनीति और प्रशासनिक स्तर पर अच्छी पहुंच है। अवैध शराब बिक्री के इस खेल में आबकारी अधिकारी, राजनेता एवं बड़े पुलिस अधिकारी शामिल हंै। ये रिश्वत लेकर शराब माफियाओं को संरक्षण प्रदान करते हैं। अवैध शराब निर्माण एवं बिक्री को रोकने के लिए कठोर कानून की जरूरत है।
-शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर
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पुलिस की शह
कई लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए अवैध शराब का कारोबार करते हैं। इन लोगों को कानून का कोई भय नहीं है और पुलिस की मिलीभगत से बेखौफ शराब की बिक्री करते हंै। ऐसे में यह अवैध कारोबार नहीं रुक रहा।
-हनुमान बिश्नोई, धोरीमन्ना, बाड़मेर
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सरकारी विभागों में सामंजस्य नहीं
अवैध शराब के निर्माण व बिक्री को रोकना आवश्यक है। हथकढ़ शराब सस्ती और सर्वसुलभ है। इससे इसकी खूब बिक्री होती है। शराब के निर्माण पर अत्यधिक कर होने से शराब चोरी-छिपे बनाने, बेचने का काम हो रहा है। आबकारी विभाग व पुलिस विभाग आपसी सामंजस्य से इसको रोकने का प्रयास करें, तो परिणाम बेहतर आ सकते है।
-सत्तार खान कायमखानी, कुचेर, नागौर

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लालच के चलते फंसते हैं इस अवैध धंधे में
जल्द धनवान बनने और चकाचौंध भरी जिंदगी जीने की लालसा मनुष्य को अपराध के दलदल में धकेल देती है। अधिक पैसा कमाने के लालच में आकर ही लोग अवैध रूप से शराब निर्माण और बिक्री के काम में लगते हैं। बाद में उनको पछताना भी पड़ता है। इसे रोकने के लिए प्रशासन को अधिक सतर्क होने के की जरूरत है। साथ ही आम लोगों को भी प्रशासन का साथ देना होगा, जिससे इस प्रकार के अवैध कामों पर लगाम लगाई जा सके।
-कपिल एम. वडियार, पाली
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अंकुश की जरूरत
अवैध रूप से शराब का निर्माण और बिक्री दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद हर जगह यह काम धड़ल्ले से हो रहा है। असल में निजी स्तर पर शराब बनाकर ठेकों के मुकाबले कम रेट में बेचकर मुनाफा कमाया जाता है। शराब निर्माण के दौरान गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जाता और हादसे हो जाते हैं। पुलिस और प्रशासन चाहे तो इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
-पंकज कारगवाल, सरदारपुरा जीवन,श्रीगंगानगर

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