कांग्रेस नेताओं का भाजपा में शामिल होने का सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 11 Jun 2021, 03:49 PM IST

स्वार्थ को प्राथमिकता
कांग्रेस नेता ही नहीं, भाजपा या अन्य दलों के नेताओं में में भी दल बदलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह राजनीति के बिगड़ते स्वरूप का सबूत है। जितिन प्रसाद या ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के पीछे स्वार्थ सिद्धि करने का संकल्प लगता है। जिन्हें विरासत में पद-प्रतिष्ठा मिली, जब तक मंत्री-सांसद बनते रहे कांग्रेस अच्छी थी और जनता ने चुनावों में ठुकरा दिया तो नीति-सिद्धांत सब गौण हो गए। कांग्रेस अछूत हो गई। जीवन भर बीजेपी को कोसते रहे, आज उसके हो गए। पद-पैसा ऐसे लोगों का ध्येय रहता है। इसीलिए ऐसे लोग गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। जनता में ऐसे लोगों की छवि जीरो रहती है।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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युवा नेताओं को मिले महत्व
भारतीय राजनीति में कांग्रेस पार्टी का स्थान महत्वपूर्ण है और इसका महत्व इसलिए और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि अनेक महापुरुषों ने अपनी मेहनत के दम पर इसे खड़ा किया। किसी भी पार्टी के सदस्यों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह चरम पर होता है, तो पार्टी बिखरने लगती है। किसी समय देश के ज्यादातर हिस्सों में सत्ता पर काबिज रहने वाली कांग्रेस अब चुनाव दर चुनाव केवल अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ती नजर आती है और उसमें भी उसे विफलता ही प्राप्त होती है। पिछले कुछ वर्षों में दिग्गज नेताओं के भ्रष्टाचार में लिप्त होने और आपसी कलह की खबरों ने कांग्रेस की छवि को लगभग धूमिल कर दिया है। वर्तमान में कांग्रेस के नेताओं का पार्टी छोडऩे का सिलसिला जारी है। इसका सबसे बड़ा कारण है, परिवारवाद और युवाओं को उचित सम्मान ना देना। कांग्रेस आज भी कुछ दिग्गज नेताओं के दम पर चुनाव लडऩा चाहती है, जो कि अनुचित है। जब तक कांग्रेस युवा प्रतिभाओं को सम्मान नहीं देगी, उन्हें अवसर नहीं देगी तब तक युवा इसी तरह से पार्टी छोड़ कर जाते रहेंगे।
- पंकज कुमावत, जयपुर
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दोषारोपण ठीक नहीं
कांग्रेस पार्टी से भगदड़ का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह बजाय कम होने के तेज होता जा रहा है। केवल विधायकों या उस स्तर के नेताओं को ही शामिल किया जाए, तो यह संख्या अब तक सैकड़ों में पहुंच चुकी है। पार्टी के भीतर लगातार उठा-पटक जारी है। वास्तव में किसी पार्टी का भविष्य उसके युवा नेताओं से जुड़ा होता है। जब उदीयमान युवा नेता पार्टी छोड़कर जाने लगें, तो सवाल पैदा होते हैं कि यह हो क्या रहा है? इन खबरों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है। जब लोग पार्टी छोड़कर जाते हैं, तब पार्टी आत्ममंथन नहीं करती, बल्कि दूसरे पर दोषारोपण करती है।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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सत्ता सुख ही लक्ष्य
वर्तमान समय की राजनीति केवल सत्ता सुख भोगने तक ही सीमित रह गई है। इसीलिए कांग्रेस के नेताओं का भाजपा में जाने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। वर्तमान में केंद्र में भाजपा सरकार है। इसलिए कांग्रेसियों का भाजपा में जाने का सिलसिला सत्ता सुख भोगने के लिए जारी है। नेताओं में सिद्धांत और पार्टी के प्रति वफादारी आज के समय में कोई मायने नहीं रखती। येन-केन प्रकारेण सत्ता सुख मिल जाए इसलिए ही कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
आशुतोष मोदी, सादुलपुर, चूरु
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महत्वाकांक्षा का परिणाम
आजकल नेताओं में जनहित की भावना नहीं, बल्कि अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करना पहली प्राथमिकता है। जरा सी उपेक्षा पार्टी बदलने को उद्यत करती है। कांग्रेस में नई सोच, दिशा व ऊर्जावान वक्ताओं की कमी है। अब पुराने ढर्रे पर चलना पार्टी को भारी पड़ रहा है। ऐसे दौर में आकंठ स्वार्थी नेताओं का अन्य आश्रय तलाशना कोई अजूबा नहीं है।
- बी.आर. एस.बांधे, रायपुर, छत्तीसगढ़
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बदल गए हालात
चुनावों में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के कारण नेताओं को अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा है। इसलिए नेता कांग्रेस से किनारा कर रहे है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से अलग हो गए। अब जितिन प्रसाद भाजपा में गए। कभी नेहरू और इंदिरा गांधी की कांग्रेस हुआ करती थी। आज हालात अलग हैं।
-कांतिलाल मांडोत सूरत
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स्वार्थ सिद्धि के लिए दलबदल
कांग्रेस नेताओं का भाजपा में शामिल होना इनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है। नेता जनता के हित में काम करता है। अब ऐसा नहीं है। अब नेताओं को जनता की परवाह नहीं है। सभी दलों के नेता एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। जब इनका स्वार्थ सिद्ध नहीं होता, मन वांछित पद नहीं मिलता तब ये दल-बदल लेते हैं। अभी वर्तमान में यही हो रहा है। जनता की किसी को कोई परवाह नहीं। बात एक ही है चाहे चाकू खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर कटना तो खरबूजे को ही है जनाब। भुगतना जनता को ही पड़ता है। असली नेता परिस्थिति में जनता का दिल जीत सकता है।
-अरुण कुमार भट्ट, रावतभाटा
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शीर्ष नेतृत्व कमजोर
नेताओं का अवसर के अनुसार पार्टी बदलना है तो अनुचित, मगर यह हो रहा है। यह हकीकत है। ऐसे नेताओं में कांग्रेसी सबसे ज्यादा हंै। असल में इस समय कांग्रेस में हताशा व्याप्त है। शीर्ष नेतृत्व बेदम है। कांग्रेस पार्टी डूबती नैया है, तो सभी सवार किसी सुरक्षित जगह चले जाना चाहते हैं ।
- डॉ पद्मजा शर्मा ,जोधपुर
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असंतोष का परिणाम
जब महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होती, स्वार्थ सिद्ध नहीं होता तो नेता पाला बदलने पर विचार करते हैं। यही स्थिति वर्तमान में कांग्रेस से भाजपा में जाने वाले नेताओं के साथ है। अब वे कांग्रेस से पाला बदलकर भाजपा में जाकर अपने राजनीतिक वजूद को सिद्ध करना चाहते है। कांग्रेस हाईकमान को आत्म चिंतन करना चाहिए कि आखिर यह असंतोष क्यों उभर रहा है? कांग्रेस संगठन में जब तक युवाओं पर विश्वास कर उनकी भावनाओं को नहीं समझा जाएगा, तब तक कांग्रेस के दिग्गज नेता भाजपा में शामिल होते रहेंगे।
-रेखा उपाध्याय, मनेन्द्रगढ कोरिया, छत्तीसगढ़
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घरेलू कलह
जब हम अपने घर के आंतरिक कलह नहीं संभाल पाते तब बाहरी ताकतें इनका फायदा उठाती हैं। कांग्रेस की आज की स्थिति का कारण भी यही है। समय रहते विद्रोह की दस्तक सुन लेना तथा संयम और सांत्वना से समस्याओं का निपटारा किया जाना बुद्धिमानी होती है। किंतु अहम् तथा वहम् की राजनीति आंतरिक कलह को आक्रोश में बदल देती है, यही कारण है कि कांग्रेस के अनेक नेता जिस सम्मान के हकदार थे, उन्हें उनकी पार्टी में शायद प्राप्त नहीं हो पाया। इसीलिए उन्होंने बीजेपी का हाथ थामा। अब कांग्रेस को अपनी रणनीति में पुनर्विचार की आवश्यकता है। कमजोरी को स्वीकार कर उसमें सुधार करना सबसे बड़ी बुद्धिमानी और समझदारी होती है , जिसकी आवश्यकता अब कांग्रेस को है।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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विपक्ष की मजबूती जरूरी
किसी लोकतंत्र में जितना महत्व सत्तारुढ़ दल का होता है, उतना ही विपक्ष का भी होता है। जिस तरह कुछ समय से कांग्रेस अपना जनाधार खोती जा रही है, एक बड़ी चिंता उभर कर सामने आने लगी है कि सरकार की मनमानी का विरोध कौन करेगा? इतने बड़े देश में कांग्रेस के अलावा वर्तमान में कोई दूसरा दल तो आगे आता हुआ प्रतीत नहीं होता। इसलिए कांग्रेस का कमजोर होना पूरे देश एक लिए एक चिंता की बात है। कांग्रेस को अपनी कमियां तलाश करनी चाहिए। अपनी नीति को भी मजबूत करना चाहिए।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश
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पार्टी में सामंजस्य का अभाव
कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा । भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में न केवल युवा नेता हैं, बल्कि कई दिग्गज नेता भी शामिल हैं। इसके पीछे यदि कारणों की बात करें, तो पार्टी में आपसी सामंजस्य का अभाव बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर जिन नेताओं के बल पर कांग्रेस पार्टी मजबूत बनी है, उन्हें ही पार्टी में उचित स्थान नहीं मिले तो उनका पार्टी छोडऩा स्वाभाविक ही है।
-कमलेश कुमार कुमावत, चौमूं, जयपुर

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