scriptWhy is the trend of defection increasing? | आपकी बात, दलबदल की प्रवृत्ति क्यों बढ़ती जा रही है? | Patrika News

आपकी बात, दलबदल की प्रवृत्ति क्यों बढ़ती जा रही है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: January 13, 2022 04:51:44 pm

पार्टी बदलने पर तुरंत न मिले टिकट
किसी भी नेता का दलबदल कृत्य उस क्षेत्र के मतदाताओं का अपमान है। स्वार्थ सिद्धि नहीं होने पर नेता पाला बदल लेता है। राजनीति में आने का मकसद अपने क्षेत्र, समाज व राष्ट्र के विकास में सहयोग करने का होना चाहिए। नेता यही प्रचारित कर जनता से वोट लेते हैं। चुनाव के पहले जनता के चरणों मे गिरने वाला नेता, जनता को चरणदास समझने लगता है और यह मानकर चलता है कि अब वह कुछ भी कर सकता है, जनता उसके पीछे चलेगी। बेहतर तो यह है पार्टी बदलने वाले नेता को नई पार्टी में 5 वर्ष बाद ही टिकट देने का प्रावधान किया जाए।
-सुनील पाठक, मुंगेली, छत्तीसगढ़
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जरूरी है लगाम
दलबदल देश के लिए एक समस्या बन गया है। नेता अपने निजी स्वार्थों के कारण देश का नुकसान कर रहे हैं। दलबदल की बढ़ती प्रवृत्ति पर लगाम लगनी चाहिए।
-भंवर लाल प्रजापत, आसींद, भीलवाड़ा
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आपकी बात, दलबदल की प्रवृत्ति क्यों बढ़ती जा रही है?
आपकी बात, दलबदल की प्रवृत्ति क्यों बढ़ती जा रही है?
स्वार्थ के लिए होता है दलबदल
दलबदल की प्रवृत्ति बढऩे का कारण निजी स्वार्थ है। अगर किसी को अपने दल से टिकट न मिले या उसका निजी कार्य सिद्ध न हो, तो वह तुरंत दूसरे दल में चला जाता है, चाहे दल की विचारधारा कोई भी हो।
-दिलीप शर्मा
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जरूरी है सेवाभाव
लालच और अहंकार भाव के कारण ही दलबदल की प्रवृत्ति बढ़ती है। जब तक नेताओं में सेवाभाव का गुण नहीं आएगा, तब तक यह क्रम चलता ही रहेगा।
-विकास पंडित, सेंधवा, बड़वानी मप्र
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सत्ता हासिल करना ही लक्ष्य
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां पर सरकारें चुनावों के माध्यम से चुनी जाती हैं। सत्ता हासिल करने के लिए नेता दल बदलने में देर नहीं लगाते हैं। बिना सिद्धांत के दूसरी पार्टी में ऐसे जम जाते हैं, जैसे वे शुरू से इसी पार्टी में हों।
-कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर, चूरु
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दलबदल कानून में संशोधन जरूरी
नेताओं का लक्ष्य सिर्फ सत्ता प्राप्ति है। उनके लिए न तो कोई लोकमत का महत्व है, न ही जनतंत्र का। उनके न कोई मूल्य हैं और न ही सिद्धांत। वे सत्ता की चाह में साम, दाम, दंड, भेद सब अपनाते हैं। दलबदल कानून में पुन: संशोधन होना चाहिए।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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कोई दल पीछे नहीं
दलबदल की प्रवृत्ति उन सभी राज्यों में दिख रही है जहां चुनाव होने जा रहे हैं । साम, दाम, दंड, भेद से सत्ता हथियाने की इच्छा से कोई दल अछूता नहीं है। इसलिए चंद सीटों के लालच में ऐसे नेताओं को अपनाने से कोई दल पीछे नहीं रहना चाहता ।
- ओजस्वी शर्मा, बैंगलूरु
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नैतिकता से दूर नेता
देश में जितना भ्रष्ट आचरण राजनीति के गलियारों में हो रहा है, उतना और किसी जगह नहीं। खरीद-फरोख्त की बढ़ती गतिविधियों पर रोक लगाने का कोई सशक्त माध्यम नजर नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि नेताओं ने नैतिकता को तिलांजलि दे दी है। जनता किंकर्तव्यविमूढ़ है।
-ओम पाटोदी, इंदौर
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राजनीतिक भविष्य के लिए दलबदल
दलबदल की प्रवृत्ति के बढऩे का मुख्य कारण तो यह है कि कोई नेता अपने दल में सहज महसूस नहीं कर पा रहा है। अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं होने से नेता दूसरे दल में चले जाते हैं।
-आशुतोष सुखवाल, बूंदी
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दलबदल की बढ़ती प्रवृत्ति
भारत में लगातार दलबदल की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण है दलबदल कानून का सख्त न होना।
रियाज अंसारी
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नेताओं का मकसद सेवा नहीं
आजकल नेताओं का राजनीति में आने का मकसद देश सेवा कम और अपनी स्वार्थपूर्ति अधिक होता है। जिसे पद प्रतिष्ठा मिल गई, वह और अधिक पाने के लिए दल बदलता रहता है।
- उदय बक्षी, कोटा
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टिकट है मुख्य कारण
नेताओं को चुनाव के लिए टिकट का न मिलना दलबदल का प्रमुख कारण है। जब किसी दल के किसी सदस्य को या उसके साथी को पार्टी टिकट नहीं मिलता है, तो वह उस दल को छोड़ देता है। राजनीतिक विचारों में परिवर्तन व दल से मौलिक मतभेद भी दलबदल का कारण है।
-तरुणा साहू, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

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