scriptwhy is there no stop on suicide cases in forces, paramilitary forces? | आपकी बातः सैन्य-अर्द्ध सैन्य बलों में क्यों नहीं थम रहीं खुदकुशी की घटनाएं? | Patrika News

आपकी बातः सैन्य-अर्द्ध सैन्य बलों में क्यों नहीं थम रहीं खुदकुशी की घटनाएं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: March 07, 2022 05:08:51 pm

सगे-संबंधियों से दूर रहना वजह

सैन्य-अर्धसैन्य बलों में खुदकुशी के मामले बढ़ने का मूल कारण इनका परिवार, दोस्तों और सगे संबंधियों से दूर रहना है। सैन्य बलों में कार्मिकों व अफसरों को कम से कम साल में तीन माह की छुट्टी मिलनी चाहिए।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
-चंद्रशेखर प्रजापत, जोधपुर

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आपसी विवाद भी हैं कारण

यह वाकई चिंता का विषय है। ज्यादातर घटनाओं में देखा जाए तो सैन्यबलों में कार्यरत साथियों के साथ आपसी विवाद उन पर गोली चलाने या खुदकुशी करने के पीछे बड़ी वजह रहते हैं। सैन्य बलों के लिए कठोर अनुशासन में रहना अतिआवश्यक होता है। इसके लिए उनको शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। कई बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं जिनके कारण व्यक्ति अपने मन को काबू में नहीं रख पाता है। समय-समय पर सैनिकों की समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर उनका समाधान कर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
-गजेन्द्रनाथ चौहान, राजसमंद

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मानसिक तनाव जिम्मेदार

सैन्य और अर्धसैन्य बलों में खुदकुशी की घटनाएं उनमें मानसिक तनाव को लेकर हैं। किसी प्रकार का सहयोग न मिलने पर मजबूरी में खुदकुशी का ही चारा रहता है।
-श्रीकृष्ण पचौरी, ग्वालियर, मध्यप्रदेश

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समय रहते समाधान हो

सैन्य-अर्ध सैन्य बल हमारी सुरक्षा में तैनात होते हैं। इसे वे भी अपना धर्म मानते हैं। लेकिन आम तौर पर इसी व्यस्तता में वे पारिवारिक जिम्मेदारियों की तरफ ध्यान नहीं दे पाते। परिवार की जरूरतों को समय पर पूरा न कर पाना, माता-पिता व बच्चों से चाहते हुए भी न मिल पाना इन जवानों को आंतरिक रूप से कुंठित कर देता है। इसी निराशा के कारण खुदकुशी करने जैसे कदम उठा लेते हैं।
-वन्दना दीक्षित, बूंदी, राजस्थान

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अवसाद बड़ी वजह

आम तौर पर जवान अवसाद के कारण आत्महत्या करते हैं। इनको कामकाज का सही माहौल नहीं मिल पाता। कई बार तो तनाव के चलते अपने ही सहयोगियों पर हमलावार हो जाते हैं। घर जाने के लिए लंबे समय तक अवकाश नहीं मिलना भी इनके अवसाद में आने का कारण है।
-लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़

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आर्थिक समस्याएं भी बनती हैं कारण

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में किसी भी क्षेत्र में भर्ती के लिए नागरिकों पर दबाव नहीं डाला जाता। फिर भी भारत में सैनिकों की आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। मानसिक तनाव, परिवार से दूरी, आर्थिक समस्याएं आदि कारक इस माहौल के लिए जिम्मेदार हैं। सरकार को चाहिए कि इनकी सब समस्याओं का उपचारात्मक समाधान किया जाए।
-रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर

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मशीन नहीं हैं जवान

हमारे जवान कोई मशीन नहीं बल्कि जीते जागते इंसान हैं। उनकी भी जरूरतें होती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियां होती हैं जिनको पूरा करने का उन पर दबाब होता है। उन जरूरतों और जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए वक्त पर अवकाश न मिलने पर तनाव होता है जिसकी परिणति आत्महत्या या हिंसा के रूप में होती है।
-बिपिन चंद्र जोशी, बेंगलूरु

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मानसिक स्थिति में बदलाव की जरूरत

सैन्य बलों में आपसी मामूली बातों को लेकर अपने ही साथियों से वैमनस्य के कारण भी ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं। संबंधों में कड़वाहट के कारण ऐसे जवान हीनभावना से ग्रसित होकर आत्महत्या जैसा कठोर निर्णय ले लेते हैं। अब वक्त है सैन्य बलों के सभी सिपाहियों में आपसी मैत्रीपूर्ण संबंध प्रगाढ़ करने का तथा उनकी कमजोर होती मानसिक स्थिति को स्वस्थ और सुदृढ़ बनाने का।
-सी.आर. प्रजापति, हरढ़ाणी, जोधपुर

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जीवन किसे प्यारा नहीं

हम इंसानों की सहनशक्ति बहुत प्रबल होती है। लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी हावी हो जाती हैं कि अच्छे-अच्छे इससे विचलित हो जाते हैं। आज सीमा पर खड़े सैनिक हों या समाज के दूसरे लोग, अधिकांश मानसिक तनाव व अवसाद का शिकार हो रहे हैं। बीमारी तन से अधिक मन की बढ़ गई है। कुछ इसे झेल जाते हैं और कुछ इससे मुक्ति का शॉर्टकट अपनाते हैं।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़

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तनाव भरी व्यवस्थाएं

भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों में हर साल बड़ी संख्या में होने वाली आत्महत्या की घटनाएं चिंता पैदा करने वाली हैं। सैनिकों में बढ़ते तनाव और अवसाद और उनके रहन-सहन और कामकाज का प्रतिकूल माहौल सैनिकों को इस प्रकार के कदम उठाने को मजबूर करता है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर

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सरकार को देना होगा ध्यान

यों तो सैन्य-अर्धसैन्य बलों का मनोबल काफी ऊंचा होता है किन्तु घर से दूर रहने और कुछ पारिवारिक समस्याओं के चलते कुछ सैनिकों के मामलों में आत्मबल कमजोर हो सकता है। सैनिकों को ड्यूटी पर भले ही बहुत-सी सुविधाएं दी जाती हैं किन्तु उनकी पारिवारिक सुख-सुविधाओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-महेश नेनावा, इंदौर

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हताशा बड़ा कारण

कभी-कभी हमारे जवान विपरीत परिस्थितियों को झेलते-झेलते निराशा और हताशा में डूब जाते हैं और जब इनके पास कोई और उपाय नहीं बचता तब वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। हमारे जवान मानसिक तनाव के शिकार न हों, इसके लिए सरकार को प्रयास करने होंगे।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छग

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काम के अधिक घंटे जिम्मेदार

आए दिन समाचारों में सैन्य बलों में हत्याओं और आत्महत्याओं के समाचार मन को विचलित करने वाले होते हैं। इन क्षेत्रों मे काम के घंटे अधिक तो हैं ही, अनुशासन भी सख्त होता है। परिवारों से जवानों का दूर रहना भी बड़ी वजह है। इससे जवानों में अवसाद, खिन्नता और चिड़चिड़ापन होने लगता है। ऐसे में या तो वे खुदकशी जैसा कदम उठाते है अथवा अपने साथियों पर जानलेवा हमला कर बैठते हैं।
-नरेश कानूनगो, देवास, म.प्र.

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व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान जरूरी

लंबे समय तक परिवार से दूर रहने वाले जवान न तो अपनी व्यक्तिगत समस्याएं आपस में साझा कर पाते हैं, न ही इनके लिए किसी तरह की काउंसलिंग का बंदोबस्त होता है। सरकार को जवानों की समस्याओं को लेकर डेटा एकत्र करना चाहिए। साथ ही कोई ऐसा मंच बनाना चाहिए जहां इनकी समस्याओं की सुनवाई और समाधान दोनों हो सकें।
-डॉ. माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, सीकर

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