scriptWhy is there still controversy regarding GST? | आपकी बात, जीएसटी को लेकर अब भी विवाद क्यों होता है? | Patrika News

आपकी बात, जीएसटी को लेकर अब भी विवाद क्यों होता है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

Published: December 29, 2021 05:35:20 pm

परेशान हैं व्यापारी
जीएसटी को लेकर जो प्रावधान लागू किए गए हैं, उन प्रावधानों के पालन में व्यापारियों को व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। जीएसटी नियम के तहत नकद लेनदेन करने वाले व्यापारियों के लिए भी काफी मुश्किल आ रही है। इसीलिए जीएसटी को लेकर असंतोष व्याप्त है। ई वे बिल की वैधता अवधि को भी कम कर दिया गया है, जो आम व्यापारियों को स्वीकार नहीं है। कोरोना संक्रमण काल में व्यापार में आई मंदी के कारण व्यापारियों की हालत पतली है। इसके बावजूद जीएसटी के नियमों को कठोर बनाकर व्यापार करना मुश्किल कर दिया गया है।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़
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आपकी बात, जीएसटी को लेकर अब भी विवाद क्यों होता है?
आपकी बात, जीएसटी को लेकर अब भी विवाद क्यों होता है?
भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से नहीं है जीएसटी
जीएसटी को लेकर 4 साल बाद भी देश में विवाद नहीं थमने के पीछे कई कारण है। पूरा काम ऑनलाइन है, जिसमें कई तकनीकी कमियां हैं। कानून को भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से सरल नहीं बना कर विदेशी हिसाब से बनाया गया है। भारत जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कोहिमा तक फैला हुआ है, जहां की परिस्थितियां और भूगोल भिन्न है। जीएसटी को 'एक देश, एक टैक्स ' के नारे के साथ लागू किया था। तरह-तरह की दरें हैं, जिससे इस कानून का मूल उद्देश्य समाप्त हो चुका है।
-भगवती लाल जैन, राजसमंद
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व्यापारियों के लिए सिरदर्द है जीएसटी
जीएसटी प्रारंभ से ही विवादित रहा है, आज भी है और आने वाले समय में और भी जटिल होने वाला हैं। मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए सिर का दर्द बना हुआ है। आइटीसी की क्लेम में बहुत बड़ा रोड़ा बनने वाला हैं, क्योंकि प्रदायकर्ता व्यापारी यदि रिटन्र्स दाखिल नहीं करता है, तो उसमें खरीददार की क्या गलती। जीएसटी में पेनल्टी व दण्ड के प्रावधान बहुत कठोर हैं तथा मध्यम वर्ग के व्यापार को ध्वस्त करने वाले हैं।
-संजय माकोड़े बड़ोरा, बैतूल
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जीएसटी प्रणाली में सुधार हो
कपड़े पर जीएसटी 5 से 12 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। समय-समय पर केंद्र सरकार राज्यों को क्षतिपूर्ति का आश्वासन देती है, किंतु इसे क्रियान्वित नहीं किया जाता। यही वजह है कि जीएसटी प्रणाली में सुधार की मांग उठती रहती है।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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केंद्र और राज्यों में टकराव
जीएसटी अब भी राज्य और केंद्र सरकार के बीच विवाद का बड़ा कारण बना हुआ है। जीएसटी से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आई थी। पिछले कई महीनों से इसकी भरपाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तकरार चल रही है। केंद्र और राज्य सरकारें चालू वित्त वर्ष में जीएसटी राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर आमने-सामने हैं। केंद्र के सभी प्रयास विफल साबित हुए हैं। राज्यों का डर बराबर बना हुआ है।
-अजिता शर्मा, उदयपुर
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सरलीकरण किया जाना चाहिए
जीएसटी को लेकर व्यापारियों के मन में अभी भी कई आशंकाएं हैं। सरकार को जीएसटी स्ट्रक्चर को समझाने के लिए एक उचित प्रणाली तैयार करनी चाहिए, जिससे टैक्स भरते वक्त कर दाताओं के मन में किसी प्रकार की कोई आशंका न रहे। सरकार को जीएसटी के सरलीकरण के प्रयास करने चाहिए, ताकि विवाद न हो।
-प्रियंका महेश्वरी, जोधपुर
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बना हुआ है विवाद
जीएसटी मुआवजे को लेकर केंद्र और राज्यों में विवाद बना हुआ है। जीएसटी कानून के तहत, राज्यों को जीएसटी लागू होने के पहले पांच वर्षों के भीतर राजस्व के नुकसान की भरपाई की गारंटी दी गई थी।
राहुल पालीवाल, राजसमंद
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जीएसटी दर बहुत ज्यादा
मूल जीएसटी दरों को केंद्र सरकार द्वारा परिवर्तित किये जाने पर भी दवाइयों और खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी बहुत ज्यादा है। दवाइयों और खाद्य पदार्थों पर जीएसटी न्यूनतम होना चाहिए।
-मुकेश भटनागर, भिलाई
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हितों का टकराव
जीएसटी को लेकर केंद्र तथा राज्य में आए दिन हितों का टकराव देखने को मिल रहा है। रोटी, कपड़ा, मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में टकराव बढ़ जाता है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की कर संचय को घटा दिया है। राज्यों के पास पर्याप्त संसाधनों का अभाव दिखाई दे रहा है और वे जीएसटी प्रणाली में सुधार तथा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। कोरोना के समय उन्हें पर्याप्त क्षतिपूर्ति का आश्वासन दिया गया था, वह भी पूरा नहीं किया गया।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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महंगे हो जाएंगे कपड़े
जब जीएसटी लागू हुआ था, तब हर वस्तु की दर फिक्स कर दी गई थी। अब कपड़ो और रेडीमेड गारमेंट्स पर जीएसटी 5 प्रतिशत से 12 प्रतिशत करने की क्यों आवश्यकता पड़ी? कोरोना के बाद इन वस्तुओं के भावों की पहले ही बहुत बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी की नई दर लागू होने कपड़े और महंगे हो जाएंगे।
-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर

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