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प्रसंगवश: शिक्षक तबादलों के लिए पारदर्शी नीति क्यों नहीं?

पारदर्शी नीति बनाए बिना यह उम्मीद रखना व्यर्थ है कि तबादलों में डिजायर का दौर खत्म हो जाएगा

Published: May 20, 2022 09:38:33 pm

शिक्षकों के रिक्त पद भरने की कवायद को भले ही राज्य सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही हो लेकिन शिक्षकों की बड़ी मांग को लेकर अनदेखी चिंताजनक है। तमाम शिक्षक संगठन शिक्षा विभाग में पारदर्शी तबादला नीति बनाने की मांग करते रहे हैं। इसके बावजूद न कोई नीति बन पाई और न ही कोई कायदे लागू हो पाए। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने बुधवार को राजधानी में संयुक्त धरना देकर सरकार का ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया है। इन शिक्षक संगठनों का आरोप है कि शिक्षकों से तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए तब उम्मीद बंधी थी कि शायद अब नीति से तबादले होंगेे। पिछले साल अगस्त में जब तबादलों के लिए आवेदन मांगे गए तब करीब 85 हजार शिक्षकों ने आवेदन किया था। इससे साफ झलकता है कि कितनी बड़ी संख्या में शिक्षक अपने इच्छित स्थान पर तबादले की आस लगाए हुए हैं। खास तौर से एकल महिलाएं जो अपने घर-परिवार से दूर रहकर ड्यूटी कर रही हैं। यह सही है कि स्कूल व्याख्याता व द्वितीय श्रेणी शिक्षकों व प्रधानाचार्य स्तर के अधिकारियों के तबादले आंशिक रूप से होते रहे हैं। लेकिन यह समस्या अध्यापक संवर्ग की ज्यादा है जो पिछले तीन साल से तबादलों की बाट जोह रहे हैं। इतना जरूर है कि राजनीतिक पहुंच वाले शिक्षक इस दौरान भी अपने इच्छित स्थान पर पदस्थापन की गली निकाल ही लेते हैं।

प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद शिक्षकों के सम्मान कार्यक्रम में शिक्षकों से ही सवाल करते हैं कि क्या उन्हें तबादलों के लिए पैसे देने पड़ते हैं तो यह आसानी से समझा जा सकता है कि तबादलों में भ्रष्टाचार भी कम नहीं होता। ऐसे में केवल कमेटियां बनाने से ही काम नहीं चलेगा। पिछले सालों में तबादला नीति बनाने के नाम पर बनाई गई दर्जनों कमेटियों की सिफारिशें फाइलों की धूल खा रही हैं। शिक्षक के गरिमामय पद पर बैठे व्यक्ति को भी अपनी वाजिब मांग के लिए राजनेताओं का चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़े तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का क्या होगा? यह बात सही है कि शिक्षकों की नियुक्ति काउंसलिंग प्रक्रिया से होने में पदस्थापन में भ्रष्टाचार की शिकायत खत्म-सी हो गई है। लेकिन तबादलों के लिए स्थायी और पारदर्शी नीति बनाए बिना यह उम्मीद करना व्यर्थ होगा कि तबादलों में डिजायर का दौर खत्म हो जाएगा। (ह.पा.)

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