scriptWorkers are getting empowered by digital campaign | डिजिटल अभियान से सशक्त हो रहे हैं श्रमिक | Patrika News

डिजिटल अभियान से सशक्त हो रहे हैं श्रमिक

ई-श्रम पोर्टल भारत की श्रम शक्ति को सशक्त बनाएगा।असंगठित क्षेत्र के अंतिम छोर तक खड़े मजदूर को इसका सही लाभ तभी मिलेगा, जब ज्यादा से ज्यादा श्रमिक इस पर स्वयं को रजिस्टर करेंगे।

Published: April 27, 2022 07:34:12 pm

गोपाल कृष्ण अग्रवाल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
भारतीय जनता पार्टी

भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति विकट है,जो महामारी के दौरान और बदतर हो गई। इस दौरान पलायन करने वाले मजदूरों की दुर्दशा सामने आई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2018-19 के अनुसार, करीब 88 प्रतिशत कामगार इसी क्षेत्र से आते हैं,जबकि इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 52 फीसदी है। इसके विपरीत संगठित क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 48 फीसदी है, जबकि यह कुल कार्य शक्ति के बमुश्किल 12 प्रतिशत कामगारों को ही रोजगार देता है। साफ तौर पर यह घरेलू कार्य बल के बीच असमानता दर्शाता है। अभी तक इस संबंध में मजदूरों को समय पर राहत ही नहीं मिल पाती, सामाजिक सुरक्षा देने के विषय में तो भूल ही जाइए। समय-समय पर करवाए जाने वाले राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के सर्वे से भी इस संबंध में वास्तविक व सम्पूर्ण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती। इस दिशा में ई-श्रम पोर्टल उपयुक्त कदम है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा बनाया गया ई-श्रम पोर्टल असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए डेटा बेस है,जो आधार से जुड़ा है। पोर्टल पर रजिस्टर करने के बाद असंगठित कामगारों को डिजिटल फॉर्म पर ई-श्रम कार्ड/आइडी मिलता है। वे पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से अपनी प्रोफाइल को अपडेट भी कर सकते हैं। यह एप विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और असंगठित क्षेत्र में कर्मचारियों की पात्रता संबंधी जागरूकता लाने का काम करता है।
ई-श्रम कार्ड का यूनिवर्सल अकाउंट नम्बर(यूएएन) देश भर में मान्य होगा। इसके आधार पर कार्डधारक को सामाजिक सुरक्षा, जैसे बीमा कवर, मातृत्व लाभ, पेंशन, शिक्षा, प्रोविडेंट फंड, आवास योजना आदि लाभ मिलेंगे। सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने के लिए कर्मचारियों को अपनी पहचान संबंधी जानकारियां पोर्टल पर उपलब्ध करवानी होंगी, जैसे नाम, व्यवसाय, पता, शैक्षणिक योग्यता, कौशल आदि। साथ ही, ई-श्रम कार्ड के आधार पर प्रवासी मजदूर अपने बच्चों को निकटवर्ती स्कूल में प्रवेश दिलवा सकते हैं। यह उनकी मुख्य समस्याओं में से एक बड़ी समस्या है। ई-श्रम आइडी को वे पहचान पत्र के तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाय) के अनुसार, लाभार्थियों की मृत्यु होने या स्थाई रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में 2 लाख रुपए व आंशिक रूप से दिव्यांग होने पर 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद का प्रावधान है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले सभी पात्र कर्मी ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं निर्माण क्षेत्र के मजदूर, प्रवासी मजदूर, गाड़ी व प्लैटफॉर्म मजदूर, ठेले-रेहड़ी वाले, घरेलू कर्मचारी, कृषि कर्मी, दूध वाले, मछुआरे, ट्रक चालक वगैरह। पात्र कर्मचारी चार लाख से भी अधिक साझा सेवा केंद्रों (सीएससीएस) के माध्यम से रजिस्टर कर सकते हैं। यह केंद्र डिजिटल सेवा अदायगी के केंद्र हैं। गत 30 दिसम्बर तक पोर्टल पर रजिस्टर करने वालों की संख्या 27 करोड़ पहुंच गई।
नीति निर्माण और उसके लक्षित क्रियान्वयन के लिए सही व प्रामाणिक क्षेत्रीय व ***** संबंधी डेटा बहुत महत्त्वपूर्ण है। पोर्टल असंगठित क्षेत्र के कर्मियों के व्यवसाय के आधार पर भी उनका डेटा संग्रह करता है। जैसा कि हम जानते हैं भारतीय अर्थव्यवस्था तीन क्षेत्रों पर निर्भर है-कृषि (प्राथमिक), औद्योगिक (द्वितीय) और सेवा (तृतीय)। ई-श्रम पोर्टल के अनुसार, 52 फीसदी नामांकन प्राथमिक क्षेत्र में हुए हैं, जो बाकी क्षेत्रों से अधिक है। असंगठित क्षेत्र में सर्वाधिक मजदूर निर्माण व कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके अलावा पोर्टल पर रजिस्टर करने वाले अन्य मजदूर हैं-घरेलू नौकर, वस्त्र उद्योग कर्मी, ऑटोमोबाइल व परिवहन क्षेत्र, खुदरा एवं खाद्य उद्योग कर्मचारी। लैंगिक आधार पर देखा जाए, तो पोर्टल पर रजिस्टर करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। महिलाओं की यह संख्या 53 फीसदी है, बाकी 47 फीसदी पुरुष हैं। निश्चित रूप से महिलाओं का ज्यादा रजिस्ट्रेशन होना और श्रम शक्ति में उनकी कम भागीदारी आश्चर्यजनक है। पोर्टल के डेटा अनुसार, पंजीकृत मजदूरों में से 94 फीसदी की मासिक आय 10,000 रुपए या इससे कम है। इसके अलावा ज्यादातर मजदूर युवा हैं। करीब 61 फीसदी मजदूर 18 से 40 वर्ष वाले आयु वर्ग के हैं। पोर्टल पर मजदूरों का प्रवासी स्टेटस भी दर्ज है।
यह पोर्टल भारत की श्रम शक्ति को सशक्त बनाएगा। ई-श्रम पोर्टल सरकार के लिए अति आवश्यक था, क्योंकि यह सरकार को एक ही मंच पर असंगठित क्षेत्र के सारे कामगारों की जानकारियां उपलब्ध करवाएगा, ताकि वह उनकी चिंताओं का समाधान कर सके। असंगठित क्षेत्र के अंतिम छोर तक खड़े मजदूर को ई-श्रम पोर्टल का सही लाभ तभी मिलेगा, जब ज्यादा से ज्यादा श्रमिक इस पर स्वयं को रजिस्टर करेंगे।
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