हां, जॉर्ज फ्लॉयड की जिंदगी का मतलब था

जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में जूरी का फैसला: स्वीकार किया कि अच्छे, सेवा के प्रति समर्पित और अपने समाज के लिए जान की बाजी लगा देने वाले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ ऐसे भी हैं जो अपने अधिकारों और हमारे भरोसे का दुरुपयोग करते हैं और लोगों की जान तक ले लेते हैं।
मिनेसोटा के एटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने कहा, 'जॉर्ज फ्लॉयड का अपना वजूद था... परिवार और मित्रों का चहेता होना ही उसके जीने की वजह नहीं थी, उसकी जिंदगी की अहमियत इसलिए भी थी कि वह एक इंसान था और इस सच्चाई से हम मुंह नहीं मोड़ सकते।'

By: विकास गुप्ता

Updated: 22 Apr 2021, 08:40 AM IST

रॉबिन गिवहन

आखिरकार, जूरी को आंखों देखी पर विश्वास करना ही पड़ा और पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन को जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या का दोषी करार दे दिया गया। जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ 9 मिनट 29 सेकंड के फासले के हर एक पल को बयां करने वाले वीडियोटेप में दिख रहा है कि कैसे पुलिस अफसर चाउविन अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर अपना घुटना अड़ा कर टिकाए हुए हैं, डरा हुआ फ्लॉयड दया की गुहार लगा रहा है, ऑक्सीजन मांगता है और अंतत: आखिरी सांस में अपनी मां को पुकारता है। इस टेप को सही मानते हुए जूरी ने मिनीपोलिस कोर्ट (मिनेसोटा स्टेट) में कई चिकित्सा विशेषज्ञों की बात सुनी, जिन्होंने कहा कि फ्लॉयड की मौत दिल की बीमारी से नहीं हुई और न ही ड्रग की लत की वजह से हुई, जिसमें कार्बन मोनोक्साइड का जहर फैलने से मौत का डर रहता है। जूरी ने घटनास्थल पर मौजूद रहे उन प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही भी सुनी जो मूकदर्शक बन सब कुछ देखने को मजबूर थे और चाह कर भी एक असहाय आदमी की जिंदगी नहीं बचा पाए, क्योंकि उन्हें चुपचाप खड़े रहने की हिदायत दी गई थी।

बारह सदस्यों वाली इस जूरी - अश्वेत और श्वेत और मिश्रित नस्ल, महिला और पुरुष, बुजुर्ग और युवा - में उक्त घटना के बाद अमरीका और विश्व भर में इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में सड़कों पर उतर आए सभी नागरिकों की विविधता प्रतिबिंबित हो रही थी। कितने ही लोगों ने बहुत करीब से इस निर्मम हत्या को होते देखा। इस फैसले से लाखों लोगों और फ्लॉयड के परिजनों को राहत मिली है। फ्लॉयड के भाई टेरेंस ने कहा, ''यह फैसला इतिहास में मील का पत्थर है। हमें वह न्याय मिला, जो हम चाहते थे। हमने कहा - 'हे ईश्वर, हमें न्याय दो। हमें यह अभी चाहिए।' और उसने हमारी सुन ली।''

फ्लॉयड की हत्या ने एक तरह से सबको हिला कर रख दिया। घटना की भयावहता टीवी, फोन और लैपटॉप से निकल कर लोगों के जेहन में घर कर गई। जिस बेरहमी से घटना को अंजाम दिया गया, उसे अनदेखा करना या नकारना नामुमकिन है। हालांकि जूरी के सामने तीन हफ्ते चले ट्रायल के दौरान सिक्योरिटी फुटेज और पुलिस बॉडी-कैमरा वीडियो साक्ष्य के तौर पर पेश किए थे, लेकिन जूरी ने इससे परे देखा। एक प्रत्यक्षदर्शी का फ्लॉयड की मौत का वीडियो बिल्कुल स्पष्ट था और मरते हुए व्यक्ति का दर्द इसमें साफ सुना जा सकता था। निर्ममता की दास्तां इसमें साफ बयां हो रही थी।

मिनेसोटा के एटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने कहा, 'जॉर्ज फ्लॉयड का अपना वजूद था, वह अपने परिवार और दोस्तों का चहेता था। उसकी मौत से हमारे समुदाय, देश और पूरे विश्व को गहरा धक्का लगा है। परिवार और मित्रों का चहेता होना ही उसके जीने की वजह नहीं थी, उसकी जिंदगी की अहमियत इसलिए भी थी कि वह एक इंसान था और इस सच्चाई से हम मुंह नहीं मोड़ सकते।' अभियोजन पक्ष के वकीलों के अनुरोध पर जूरी ने यह वीडियो देखा। उन्होंने साथ ही यह भी स्वीकारा कि काफी समय से 'ब्लैक' और 'ब्राउन' अमरीकी एक-दूसरे के काफी करीब हैं, यह भी कि उनमें पुलिस के डर के अच्छे-खासे कारण मौजूद हैं, यह भी कि जहां अच्छे, सेवा के प्रति समर्पित और अपने समाज के लिए जान की बाजी लगा देने वाले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ ऐसे भी हैं जो अपने अधिकारों और हमारे भरोसे का दुरुपयोग करते हैं और लोगों की जान तक ले लेते हैं - और अक्सर, मृतक अश्वेत होते हैं।

फैसला पढ़े जाने के बाद अभियोजक जैरी ब्लैकवेल ने कहा - 'कोई भी फैसला जॉर्ज पैरी फ्लॉयड को वापस नहीं ला सकता लेकिन यह फैसला उसके परिवार के लिए एक संदेश है, यह कि वह भी एक ऐसा शख्स था, जिसकी जिंदगी की अहमियत थी, यह कि हम सबकी जिंदगी की अहमियत है। मुझे यह भी उम्मीद है कि यह फैसला बेहतर इंसानियत की राह प्रशस्त करेगा।'

हालांकि यह फैसला अतीत में लोगों ने जिस अन्याय का सामना किया, उन गलतियों को सही नहीं कर सकता। यह जान गंवा चुके लोगों में प्राण नहीं फूंक सकता, लेकिन उनके प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है। फ्लॉयड के एक अन्य भाई फिलोनिस फ्लॉयड ने कहा, 1955 में मारा गया 14 साल का अफ्रीकी-अमरीकी एमेट टिल पहला जॉर्ज फ्लॉयड था। हमें अन्याय के इस अंतहीन कुचक्र का विरोध करना ही होगा। मेरी लड़ाई अब सिर्फ जॉर्ज के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के हर शख्स के लिए है। यह फैसला हमें याद दिलाता है कि 'सबके लिए न्याय' का सिद्धांत भुलाया नहीं गया है। जरूरत है तो सबको साथ मिल कर प्रयास करने की, जैसा कि इस मामले में हुआ: राहगीर रुक गए और फिक्र दिखाई, पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी तोड़ी, ऐसी जूरी जो पीडि़त और धमकाने वाले के बीच फर्क कर सकी।

इस फैसले ने साबित कर दिया कि एक पुलिस अफसर कानून से ऊपर नहीं है और बंटी हुई मानसिकता की ओर बढ़ रहे देश को यह संदेश दिया कि अब भी हम सही-गलत में भेद कर सकते हैं। कोर्ट में जिस वक्त फैसला सुनाया जा रहा था, चाउविन वहीं मौजूद था। उसे गैर इरादतन हत्या, हत्या और निर्मम हत्या का दोषी माना गया। फैसला सुनने पर सभी 12 जूरी सदस्यों ने सहमति जताते हुए 'हां' कहा। इसके बाद न्यायाधीश पीटर काहिल ने चाउविन की जमानत अर्जी खारिज कर दी और एक वर्दीधारी पुलिस अफसर ने चाउविन के हाथों में हथकड़ी डाल दी।

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(लेखिका राजनीति, नस्ल और कला पर आलोचनात्मक लेखन करती हैं और पुलित्जर पुरस्कार विजेता हैं)

द वॉशिंगटन पोस्ट

विकास गुप्ता
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