गोल्ड मिलने का नहीं है मलाल, एशियन गेम्स में करूंगा कसर पूरी : मुक्केबाज मनोज कुमार

मनोज को पुरुषों की 69 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा के सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था

By: Siddharth Rai

Updated: 16 Apr 2018, 04:24 PM IST

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित किए गए 21वें राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक के पक्के दावेदार के रूप में पहुंचे मुक्केबाज मनोज कुमार कांस्य तक सीमित रहने से निराश नहीं हैं। उनका कहना है कि वह अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और खेल में और सुधार कर आगे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। मनोज को पुरुषों की 69 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा के सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था और इसी के साथ स्वर्ण पदक का यह दावेदार कांसे तक ही सीमित रह गया। फाइनल में मनोज को इंग्लैंड के पैट मैक्कोरमैक ने 5-0 से मात दी।

रेफरी के निर्णय को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं
मनोज ने कहा कि वह अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और सकारात्मक रहते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं। मनोज ने कहा, " मुझे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी। मैंने अपनी तरफ से अच्छा प्रदर्शन किया। जो रेफरी का निर्णय होता है वो मान्य होता है। मैं उसे मानता हूं उसे मानने का अलावा कोई विकल्प नहीं है। मैंने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया और अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।"

स्वर्ण नहीं आया कांस्य आया, ये खेल का हिस्सा है चलता रहता है
उन्होंने कहा, "मैं क्यों हारा ये कोच बता सकते हैं। स्वर्ण नहीं आया कांस्य आया, ये खेल का हिस्सा है चलता रहता है। जिंदगी में हार-जीत चलती रहती है। हमें सकारात्मक रहकर चलना चाहिए। हार से कुछ न कुछ सबक तो लेते हैं ही, साथ ही जीत का लक्ष्य भी तय करते हैं। मुझे उम्मीद है कि एशियाई खेलों में इस पदक का रंग जरूर बदलूंगा।"

राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले मुक्केबाज बन जाते
मनोज का मनाना है कि इंग्लैंड के खिलाड़ी के खिलाफ उनका मुकाबला काफी करीबी था और रेफरी किसी को भी विजेता घोषित कर सकते थे। उन्होंने कहा, "काफी करीबी मुकाबला था। रेफरी किसी को भी विजेता घोषित कर सकते थे। इस बात का जवाब कोच बेहतर तरीके से दे सकते हैं।" मनोज ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इस बार उनके पास उस सफलता को दोहराने का मौका था लेकिन वो इससे चूक गए। मनोज अगर इस बार स्वर्ण पदक जीत जाते तो वह राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले मुक्केबाज बन जाते।

इरादा स्वर्ण जीत इतिहास रचने का था
इस उपलब्धि से चूकने के बारे में मनोज ने कहा, "इरादा तो इस बार फिर स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचने का था। कोशिश थी कि देश के लिए एक और स्वर्ण जीतकर इतिहास रचूं, लेकिन भगवान को शायद कांस्य मंजूर था। वो कहते हैं ना कि किस्मत से ज्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिलता। मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं। आगे और अच्छा करने की कोशिश रहेगी।"

एशियाई खेलों में पदक का रंग बदलना चाहते हैं
मनोज ने अपना अगला लक्ष्य आने वाले एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना बताया है। इससे पहले वो अपनी कुछ चोटों का इलाज कराना चाहेंगे। उन्होंने कहा, "कुछ पुरानी चोटें हैं। मेरी ग्रोइन की चोट है पुरानी और कुछ हाथों में चोट थी इस बार वो अपने आप ठीक हो जाती हैं और अपने आप उभर आती है। उसका इलाज अच्छे से करवाऊंगा और एशियाई खेलों की तैयारी अच्छे से करूंगा।"

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