Exclusive: पुरखों की धरती पर खेलना सबसे बड़ा मौका मानते हैं WWE फाइटर जिंदर महल

PRABHANSHU RANJAN

Publish: Dec, 07 2017 09:08:38 (IST) | Updated: Dec, 08 2017 02:34:08 (IST)

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भारतीय मूल के डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइटर जिंदर महल से पत्रिका की खास बातचीत, जानें क्या कहा जिंदर महल ने...

नई दिल्ली। डब्ल्यूडब्ल्यूई का क्रेज पूरी दुनिया में फैला हुआ है और भारतीय खेल प्रेमी भी फ्रीस्टाइल फाइटिंग के इस मनोरंजक संस्करण के आकर्षण से अछूते नहीं हैं। ऐसे में 9 दिसंबर को यहां इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में जब दुनिया के दो बड़े फाइटरों के बीच मुकाबला होने जा रहा है तो निश्चित तौर पर हर किसी के मन में उसे लेकर लाखों सवाल हैं। लेकिन खुद ये फाइटर भी आबादी के लिहाज से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश में खेलने को लेकर क्या सोचते हैं? यही जानने के लिए गुरुवार को जब पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूई वर्ल्ड चैंपियन और मॉडर्न-डे महाराजा के नाम से मशहूर भारतीय मूल के कनाडाई फाइटर जिंदर महल से पत्रिका के लिए कुलदीप पंवार और रवि गुप्ता ने बात की।

 

jinder mahal

भारत की धरती पर खेलना बड़ा मौका
जिंदर महल ने अपने पुरखों की धरती पर खेलने को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका बताया और इसके चलते खुद को थोड़ा नर्वस भी बताया। असल जिंदगी में युवराज सिंह धेसी नाम रखने वाले जिंदर ने कहा कि ये मेरे करियर का सबसे बड़ा मैच है। एक लेजेंडरी सुपरस्टार और पहले ही हाल ऑफ फेम में शामिल फाइटर किंग ऑफ किंग्स के नाम से मशहूर ट्रिपल एच से मुझे अपने ही लोगों के सामने भिडऩा है। पंजाब में मेरे गांव से भी ये मैच देखने के लिए लोग आ रहे हैं तो इसका भी दबाव है। लेकिन ये अच्छा है, क्योंकि मैं दबाव पसंद करता हूं और ये मुझे और अच्छा खेलने के लिए प्रेरित करता है।

 

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चाचा ने बोला था पहले स्टडी पूरी करो
जिंदर के चाचा गामा सिंह भी नामी डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइटर थे। जब पूछा गया कि उनसे क्या मदद मिली तो जिंदर बोले, चाचा ने कहा था कि पहले स्टडी पूरी करो, फिर फाइटर बनना। वे मेरे उस्ताद हैं और आज भी मुझे किसी तरह की समस्या होती है तो मैं सबसे पहले उन्हीं से टेक्नीक आदि पर सलाह लेता हूं। ट्रिपल एच जैसे महान रेसलर से मैच के लिए भी मैंने उनसे सलाह ली है कि बॉडी पार्ट पर, गेम प्लानिंग पर सलाह ली है।

 

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बचपन से सोचता था रेसलर बनना
4 साल की उम्र में पंजाब से कनाडा चले गए जिंदर ने बताया कि वे बचपन से सोचते थे कि मुझे डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बनना है। उन्होंने कहा, मैं जब पहली बार ये कुश्ती देखी थी तो ब्रेड हार्ट, शॉन माइकल और अंडर टेकर, फिर रॉक, स्टोन जैसे बड़े खिलाड़ी देखे। हाईस्कूल में आया तो जॉन शीनर, रेंडी, ट्रिपल एच जैसे मशहूर लोग देखे, तभी सोच लिया था कि मुझे ये ही करना है। आज उन्हीं ट्रिपल एच से मेरा मैच होगा, जो मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।

 

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बहुत संघर्ष किया चैंपियन बनने को
जिंदर बताते हैं कि 2014 में मैं डब्ल्यूडब्ल्यूई ने मुझे रिलीज कर दिया यानि मैं फेल करार दे दिया गया। दो साल मैं बाहर रहा, मेहनत की और लक्ष्य बनाया कि मुझे डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियन बनना है। अब मैं दो बार चैंपियन बन चुका हूं।

 

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दारा सिंह हैं सबसे बड़े पहलवान
जब जिंदर से पूछा गया कि पंजाब के किस पहलवान को वो सबसे बड़ा मानते हैं तो उन्होंने तपाक से दारा सिंह का नाम लिया। उन्होंने कहा, पंजाब पहलवानों की धरती है। कई बड़े दिग्गज जैसे, दारा सिंह, 19वीं सदी के शुरू में द ग्रेट गामा (जिंदर के चाचा नहीं), द ग्रेट खली हुए हैं, लेकिन सबसे बड़ा नाम दारा सिंह ही हैं। जिंदर कहते हैं कि द ग्रेट खली से उनका कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है, लेकिन वे मेरे बड़े भाई जैसे हैं और आज भी हमारी बात होती हैं।

 

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पंजाब को पेश करता हूं सबके सामने
अपने हर इवेंट में पंजाबी पगड़ी पहनकर रिंग में आने के पीछे का राज भी जिंदर ने खोला। उन्होंने कहा, मैं दुनिया के सामने अपने पंजाब का प्रतिनिधित्व करता हूं और इसी कारण यहां की पारंपरिक ड्रेस पहनकर रहता हूं। दिल्ली वाली फाइट के लिए भी मैंने विशेषतौर पर पंजाबी जैकेट डिजाइन कराई है। जिंदर ने कहा कि उन्हें फिलहाल तो कोई बॉलीवुड हीरोइन पसंद नहीं हैं और ना ही उनका बॉलीवुड फिल्मों में काम करने का ही कोई इरादा है।

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